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Amazon IIT Roorkee Eco-friendly Packaging: अमेज़न इंडिया और IIT रुड़की की बड़ी पहल: पराली से बनेगा पैकिंग का सामान

Rajesh Pandey
Last updated: February 15, 2026 6:09 pm
Rajesh Pandey
2 months ago
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Amazon IIT Roorkee Eco-friendly Packaging: रुड़की/देहरादून। भारत में हर साल लगभग 50 करोड़ टन कृषि अपशिष्ट (पराली और अवशेष) पैदा होता है, जिसे अक्सर खेतों में जला दिया जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए अमेज़न इंडिया (Amazon India) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की ने एक साझेदारी की है। इस प्रोजेक्ट के तहत अब खेतों की पराली और कृषि कचरे से ई-कॉमर्स डिलीवरी के लिए पर्यावरण के अनुकूल ‘बायोडिग्रेडेबल पेपर मेलर्स’ (पैकिंग लिफाफे) तैयार किए जाएंगे।

Amazon IIT Roorkee Eco-friendly Packaging: यह 15 महीने का रिसर्च प्रोजेक्ट गेहूं के भूसे, पराली और गन्ने के अवशेष (Bagasse) को उच्च गुणवत्ता वाले कागज में बदलने पर काम करेगा। इससे न केवल प्लास्टिक का उपयोग कम होगा, बल्कि उत्तर भारत में प्रदूषण का मुख्य कारण माने जाने वाली ‘पराली जलाने’ की प्रथा पर भी अंकुश लगेगा।

इस पहल से लकड़ी की लुगदी (Wood Pulp) के लिए पेड़ों की कटाई पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, किसानों को उनके कृषि अवशेषों के लिए एक नया बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में इजाफा होगा।

कैसे तैयार होगा पैकिंग मटेरियल?

Amazon IIT Roorkee Eco-friendly Packaging: कृषि अपशिष्ट (agricultural waste) से अमेज़न पैकेजिंग बनने तक का बदलाव IIT रुड़की के डिपार्टमेंट ऑफ पेपर एंड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी की INNOPAP (Innovations in Paper and Packaging) लैब से शुरू होता है। यहां गेहूं की पराली, पुआल और खोई (गन्ने का अवशेष), जिन्हें आमतौर पर कटाई के बाद फेंक दिया जाता है, प्रोसेसिंग के लिए लाए जाते हैं।

सबसे पहले, इन कृषि अवशेषों को एक ऑटोक्लेव डाइजेस्टर (autoclave digester) में पचाया (digested) जाता है, जिससे कच्चा माल टूटकर लुगदी (pulp) में बदल जाता है। यह प्रक्रिया फसल के कचरे को उपयोग योग्य फाइबर में बदल देती है, जिससे कागज उत्पादन में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होने वाले नए कच्चे माल पर निर्भरता कम हो जाती है।

एक बार लुगदी तैयार हो जाने के बाद, अशुद्धियों को दूर करने और निरंतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इसे धोने (washing) और छानने (screening) की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसके बाद, छनी हुई लुगदी का उपयोग दबाने और सुखाने (pressing and drying) की प्रक्रिया के माध्यम से कागज बनाने के लिए किया जाता है। प्रत्येक नमूने का निर्माण अमेज़न के टिकाऊपन (durability) और पुनर्चक्रण (recyclability) संबंधी विशिष्टताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।

अमेजन की वेबसाइट पर प्रकाशित इस न्यूज में अमेज़न इंडिया के ऑपरेशंस वाइस प्रेसिडेंट अभिनव सिंह के हवाले से कहा गया है, “हम भारत में अपने नेटवर्क को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कृषि अवशेषों से पैकेजिंग बनाकर हम ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा दे रहे हैं।”

IIT रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने बताया, “यह सहयोग भारत के ‘स्वच्छ भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन की ओर एक बड़ा कदम है। हम कच्चे माल की कमी और पराली जलाने, दोनों चुनौतियों का समाधान एक साथ कर रहे हैं।” इस शोध का नेतृत्व प्रो. विभोर कुमार रस्तोगी और डॉ. अनुराग कुलश्रेष्ठ कर रहे हैं। सफल परीक्षणों के बाद, अगले साल के मध्य तक इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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