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बड़ी खबरः AIIMS Rishikesh में की गई खतरनाक परजीवी से फैलने वाले दुर्लभ रोग की सर्जरी

Rajesh Pandey
Last updated: April 2, 2024 6:55 pm
Rajesh Pandey
2 years ago
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AIIMS Rishikesh Building
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ऋषिकेश। न्यूज लाइव

एम्स ऋषिकेश में एक ऐसी दुर्लभ रोग की सर्जरी की गई, जो परजीवी से फैलता है। यह खतरनाक बीमारी मुख्य रूप से दिल और फेफड़ों में होती है और मस्तिष्क व अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। इससे शरीर के किसी भी अंग में सिस्ट बनने लगती है, जिसमें परजीवी के अंडे होते हैं। हानिकारक रोगजनक परजीवी जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। यह मनुष्यों में आमतौर पर संक्रमित कुत्तों के मल के संपर्क में आने से होता है, क्योंकि इनके मल में टेपवर्म के अंडे मौजूद होते हैं।

एम्स में आए उत्तर प्रदेश निवासी 20 साल के युवक, जिनको सांस फूलने एवं बलगम में खून आने की शिकायत थी। चिकित्सकीय जांच से मालूम हुआ कि उनके दोनों फेफड़ों के साथ साथ दिल में भी जलस्फोट यानि hydatid नामक व्याधि है। यही नहीं सघन स्वास्थ्य परीक्षण के बाद पता चला कि इस जटिल बीमारी के कुछ अंश राइट वेंट्रिकल (Right Ventricle) से टूटकर फेफड़ों की नसों में भी पहुंच चुके हैं।

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युवक एक साल से भी अधिक समय से विभिन्न चिकित्सकों से लगातार उपचार ले रहा था, मगर कोई आराम नहीं हुआ। लिहाजा दिन प्रतिदिन बढ़ती बीमारी के चलते मरीज ने ऋषिकेश एम्स की ओर रुख किया।

संस्थान के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भानु दुग्गल एवं डॉ. यश श्रीवास्तव ने पेशेंट की इको जांच कराई। पल्मोनोलॉजी विभाग में डॉ. मयंक मिश्रा एवं डॉ. रूचि दुआ ने उसकी ब्रोंकोस्कोपी जांच की। इसके बाद केस को शल्य चिकित्सा के लिए सीटीवीएस विभाग के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन को रेफर कर दिया गया। इस मरीज का संस्थान के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डॉ. अनीश गुप्ता की टीम ने जटिलतम सर्जरी कर जलस्फोट को दिल और दोनों फेफड़ों से एक साथ निकाला।

इस हाई रिस्क ऑपरेशन में डॉ. अनीश गुप्ता की टीम ने सफलता हासिल की और मरीज को नया जीवन दिया।

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शल्य चिकित्सा के बाद से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनको स्वास्थ्य संबंधी पूर्व में होने वाली कोई दिक्कतें नहीं हैं। इस जटिलतम सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अजय मिश्रा आदि चिकित्सकों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, डॉ. अभिशो, डॉ. ईशान एवं डॉ. शुभम, नर्सिंग विभाग से केशव, मोहन, धरम, चांद व संतोष ने सहयोग प्रदान किया।

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संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस जटिल शल्य चिकित्सा की सफलता व मरीज को जीवनदान देने के लिए डॉ. अनीश गुप्ता और उनकी टीम की सराहना की। उन्होंने बताया कि एम्स संस्थान में हृदय और वक्ष संबंधी सभी व्याधियों के उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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क्या है दिल का जलस्फोट (hydatid )

यह एक विशेष पैरासाइट से होने वाला गंभीर संक्रमण है, जो संभावित रूप से मरीज के जीवन के लिए घातक हो सकता है। hydatid रोग मुख्यरूप से जिगर और फेफड़ों में होता है, कुछ मामलों में यह मस्तिष्क या अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

Life cycle of echinococcus granulosus. This graphic has been provided by AIIMS Rishikesh.

दिल के अंदर इस बीमारी का पाया जाना बेहद दुर्लभ है। यह दिल के दाएं या बाएं भाग में पाया जा सकता है। इस रोग से ग्रसित मरीज में शरीर के किसी अंग में सिस्ट (सिस्ट) बनने लगती है, जिसमें परजीवी के अंडे (लार्वा ) होते हैं।

ऐसे फैलता है हाइडेटिड रोग (hydatid )

हाइडेटिड रोग एक परजीवी संक्रमण है, जो जीनस एकाइनोकॉकस (Genus Echinococcus) के टेपवर्म से होता है। यह एक हानिकारक रोगजनक परजीवी है, जो कि जानवरों से मनुष्यों में फैलता है।

यह मनुष्यों में आमतौर पर संक्रमित कुत्तों के मल के संपर्क में आने से होता है, क्योंकि इनके मल में टेपवर्म के अंडे मौजूद होते हैं।

टेपवर्म या उनके अंडों से संपर्क मुख्य रूप से भोजन, पानी और जानवरों के बाल आदि से होता है।

संक्रमित कुत्तों की पूंछ व गुदा के आस-पास के बालों में टेपवर्म के अंडे चिपके रह जाते हैं और उन्हें उठाने या हाथ लगाने से यह अंडे हाथों पर लग जाते हैं। खाना खाने, पानी पीने या सामान्य तौर पर मुंह पर हाथ लगाने से यह अंडे मुंह तक पहुंच कर शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। जिससे व्यक्ति इस खतरनाक बीमारी से ग्रसित हो जाता है। ऐसे में खासकर पशु पालकों और पशु प्रेमियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, अन्यथा वह इस खतरनाक बीमारी के शिकार हो सकते हैं।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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