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AIIMS Rishikesh में एक अप्रैल से कटे होंठ और तालू की निःशुल्क सर्जरी

ऋषिकेश। न्यूज लाइव

जन्म से कटे होंठ और मुंह में कटे हुए तालू के मरीजों का एम्स ऋषिकेश में अब निःशुल्क ऑपरेशन किया जा सकेगा। इस मामले में ऑपरेशन स्माइल (आईएनसी) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के मध्य एमओयू साइन किया गया है।

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एम्स के बर्न और प्लास्टिक चिकित्सा विभाग ने जन्मजात कटे होंठ और मुंह में कटे तालू की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए शीघ्र ही विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस समस्या से ग्रसित लोगों की सर्जरी भी निःशुल्क की जाएगी। इस संबंध में एम्स और ऑपरेशन स्माइल (आईएनसी) के बीच समझौता किया गया है।

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एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया जिन लोगों के कटे होंठ अथवा कटे तालू होते हैं, वह ढंग से भोजन नहीं कर पाते हैं और उन्हें बोलने में भी दिक्कत रहती है।

उन्होंने बताया, संस्थान के प्लास्टिक चिकित्सा विभाग मुहिम चलाकर सुनिश्चित करेगा कि जिन बच्चों व वयस्क लोगों केे जन्म के समय से ही कटे होंठ व कटे तालू की समस्या है, ऑपरेशन के माध्यम से उनकी इस समस्या का निदान किया जाए।

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ऑपरेशन स्माइल संस्था के कार्यकारी निदेशक अभिषेक सेन गुप्ता ने बताया, संस्था पिछले 40 वर्षों से निम्न और गरीब तबके के रोगियों की मदद के लिए विभिन्न कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन स्माइल का मानना है कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता युक्त सर्जरी कराने का अधिकार रखता है।

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एमओयू के बारे में बर्न और प्लास्टिक चिकित्सा विभाग की डाॅ. देवरती चट्टोपाध्याय ने बताया कि ऐसे मरीजों को सर्जरी के अलावा वाक उपचार (स्पीच थेरेपी), डेंटल उपचार, पोषण और व्यापक देखभाल की सुविधा भी निःशुल्क प्रदान की जाएगी।

उत्तराखंड के अलावा समीपवर्ती अन्य राज्यों के लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इस दौरान ऑपरेशन स्माइल (आई.एन.सी.) यूएसए की ओर से संस्था के कार्यकारी निदेशक व एसोसिएट उपाध्यक्ष (एशिया क्षेत्र) अभिषेक सेन गुप्ता, एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, विधि अधिकारी प्रदीप चन्द्र पांडेय और बर्न व प्लास्टिक चिकित्सा विभाग की डॉ. देवरती चट्टोपाध्याय आदि मौजूद रहे।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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