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उत्तराखंड में गन्ने का नया समर्थन मूल्य घोषित

देहरादून। उत्तराखंड में किसान लंबे समय से बढ़ी हुई दरों पर गन्ने का समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने सोमवार को गन्ने की अगेती एवं सामान्य प्रजाति के समर्थन मूल्य को क्रमशः ₹355 और ₹345 प्रति क्विंटल कर दिया है। इसको अब तक की सबसे बड़ी गन्ना मूल्य बढ़ोतरी बताया जा रहा है।
साथ ही, गन्ना भाड़ा में भी कमी की घोषणा की है। किसानों को अभी तक गन्ना भाड़ा 11 रुपये प्रति क्विंटल चुकाना पड़ता था, उसको कम करके साढ़े नौ रुपये कर दिया गया है। हालांकि किसानों ने गन्ना उत्पादन की लागत में वृद्धि को देखते हुए इस रेट को कम बताते हुए निराशा व्यक्त की है।
गन्ना क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे आगे हरिद्वार, उसके बाद ऊधमसिंह नगर, फिर देहरादून और नैनीताल का नंबर आता है। राज्य में वर्ष 2020-21 में कुल गन्ना क्षेत्रफल 84088 हेक्टेयर है, जो कि प्रति वर्ष कम होता जा रहा है। वर्ष 2010-11 में 104860 हेक्टेयर था। पूरे राज्य में लगभग सवा लाख गन्ना किसान हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गन्ना मूल्य वृद्धि को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है, जिसमें कहा गया है, अन्नदाता खुशहाल हो तो देश भी खुशहाल रहता है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार दृढ़ संकल्पित है।

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इसी सोच के चलते आज हमारी सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए गन्ने के समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि करके गन्ने की अगेती एवं सामान्य प्रजाति के समर्थन मूल्य को क्रमशः ₹355 और ₹345 प्रति क्विंटल कर दिया है।

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मुख्यमंत्री धामी ने सितारगंज में ‘दि किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड’ का शुभारंभ किया। एक अन्य पोस्ट में मुख्यमंत्री लिखते हैं, आज का दिन सितारगंज के लिए ऐतिहासिक है। राज्य के गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए हमने गन्ने की अगेती प्रजाति का भाव 355 रुपये प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का भाव 345 रुपये प्रति कुन्तल करने की घोषणा की है।

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मालूम हो कि इससे पहले गन्ने की अगेती प्रजाति का समर्थन मूल्य रुपये 327 तथा सामान्य प्रजाति का समर्थन मूल्य 317 रुपये था।
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प्रगतिशील गन्ना किसान उमेद बोरा का कहना है कि सरकार ने किसानों की मांग के अनुसार गन्ने का समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया है। किसान गन्ने का समर्थन मूल्य  450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि लगभग चार साल से रेट नहीं बढ़ाया गया। पेट्रोल, डीजल, पानी, खाद, श्रम और अन्य संसाधनों की दर दोगुनी हो गईं, पर गन्ना मूल्य उसके अनुसार नहीं बढ़ाया जा रहा है। इससे किसान निराश हैं। भानियावाला के कृषक हरविंदर सिंह का कहना है कि हम प्रति क्विंटल 450 रुपये की मांग कर रहे हैं। सरकार द्वारा घोषित नया रेट निराशाजनक है। क्योंकि खेती में लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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