पहाड़ की स्त्री

Rajesh Pandey
  • अनीता मैठाणी

क्या तुम जानते हो
जब तुम पहाड़ कहोगे
तुम एक स्त्री कहोगे
पहाड़ सा अचल कहोगे
तो भी, तुम एक स्त्री कहोगे।

जब तक मैं मिला नहीं था पहाड़ की स्त्री से
मैंने पहाड़ को पुल्लिंग संबोधित किया
जब तक मैंने
पहाड़ में पहाड़ सी ढली स्त्री को
देखा नहीं था।
मैं फिर कहता हूँ
मैंने पहाड़ को पुल्लिंग संबोधित किया था।

मैं गया तो था पहाड़ देखने
पर मैंने वहाँ पहाड़ी स्त्री को देखा
जो नख से शिख तक कतई स्त्री होते हुए भी
पहाड़ थी।
भीतर से कोमलांगी होते हुए भी
बाहर से अखरोट की तरह सख़्त थी।
मिजाज गर्म था उसका
तथैव
उसे श्रम और संघर्ष भी
पिघला ना पाए थे।

वो कृत संकल्प थी पहाड़ में जन्म के साथ
कठोर परिश्रम को।
उसके दिन रात बंटे थे
रोटी-भुज्जी-पानी और लकड़ी-घास के लिए।
घर-परिवार और गोरू-गौशाला के बीच
उसके पास अपने लिए कोई समय ही नहीं था।
फिर भी वो;
जब मर्जी, चुरा लेती, इन्हीं के बीच कुछ पल
इन्हीं पलों में जी लेती जिंदगी।

हंसी- ठठाओं में दंतपंक्ति दिखाती
छलका देती आंसू,
सारा सुख-दुःख खिन (खोदना) आती,
और ऊपर से भुरभुरा देती हंसी।
वो ज्यादा कुछ चाहती भी नहीं थी,
खुशी उसके लिए
किसी दिन पर्याप्त हरी घास का मिलना था
तो; किसी दिन लकड़ी के गट्ठर का भारी होना।

पहाड़ पर उतरते-चढ़ते
उसकी चाल कभी गजगामिनी सी नहीं होती
बल्कि हमे…शा… चपल मृग सी कुलांचे भरते दिखती।
घास और लकड़ी के संघर्ष में
वानर सी फुर्ती के साथ पेड़ों पर चढ़कर
नर्म पत्तों के टुक्के काट आती,
अपने मवेशियों के हिस्से की भूख को जीती
सपने भी उसको हरी घास के आते।

कभी वो बन में भालू और तेंदुए से
दो-दो हाथ करती मारी जाती और
कभी विजयी हो लौटती।
पेड़ की डाल से पैर फिसलने से चली जाती कभी
चट्टानों पर उसकी जान।
इतनी निडर होते हुए भी
जैसे ही दाखिल होती गाँव से होते हुए
घर के भीतर,
क्यूं चुप लगा लेती है।

 

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *