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धर्मनिरपेक्ष गन्ने के बाद अब भांग का तड़का

चुनाव नजदीक हैं और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हर बात में सियासत तलाश रहे हैं। कुछ दिन पहले स्वयं को गन्ना मैन घोषित कर चुके हरीश रावत ने कॉमर्शियल हैंप को उत्तराखंड के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला करार दिया है। राई की भुजिया में भांग के तड़के के सहारे उन्होंने भाजपा को भी निशाने पर लेने का मौका नहीं चूका।
हरीश रावत सोशल मीडिया पोस्ट पर कहते हैं, मैंने कल रात्रि प्रवास सैंधीखाल ग्राम, जयहरीखाल में किया। भाई-बहनों के साथ बातचीत करते हुए, स्थानीय गीत-संगीत के साथ-साथ भजन-कीर्तन और महावीर माधव सिंह भंडारी जी पर नृत्य नाटिका अद्भुत थी।
जिस परिवार के साथ रुका, मैं उस परिवार का बहुत आभारी हूँ, बड़ी आत्मीयतापूर्ण तरीके से खाना खिलाया।
मैंने राई की इतनी बढ़िया भुजिया सब्जी कभी नहीं खाई, उसमें जो तड़का डाला गया था, पहले मैं उसको जखिया मान रहा था, लेकिन वो जाखिया नहीं भांग का तड़का था, तो इतनी बहु उपयोगी है उत्तराखंड की भांग।
रावत लिखते हैं, कभी मुझे व सत्ता को चुप कराने के लिए भाजपा ने इसी भांग-भंगीरे के खिलाफ विधानसभा से लेकर गांव के गली-कूचे तक आवाज उठाई थी और आज वही भांग घर-घर में सब्जियों का तड़का बनकर ज़ायका बढ़ा रही है, भांग की चटनी जो पहले से ही विद्यमान थी, अब तड़के के रूप में भी भांग का प्रवेश।
रावत की सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार,  राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने गांव में भांग के रेशे को मिलाकर एक घर का निर्माण किया है, वो भी समाचार पत्रों में सुर्खियां बना था।
हवाई जहाज इंडस्ट्री से लेकर वस्त्र-आभूषण आज सभी क्षेत्रों में भांग का उपयोग है, सिर्फ नशे के लिए भांग का उपयोग नहीं होना चाहिए और इसीलिए मैं एक कॉमर्शियल हेंप, वाणिज्य हेंप का बीज, बायोलॉजी का बीज विकसित करके गया था, यदि ठीक से उसका प्रचार-प्रसार हो, तो उत्तराखंड के लिए जो गेमचेंजर साबित हो सकती हैं, उनमें एक उत्पाद भांग का भी होगा।
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपना एक और नाम रखा है, वो है गन्ना मैन। रावत कहते हैं,  I am the Ganna man. गन्ना मैन नाम उन्होंने स्वयं रखा है। उन्होंने गन्ने को हिंदू और मुसलमान, दलित, स्वर्ण सबका प्यारा बताया था l सबका दोस्त बताया था l उन्होंने गन्ने को धर्मनिरपेक्ष जाति निरपेक्ष बताया था l
अब हम हेंप के व्यावसायिक उपयोग के लिए हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल की बात करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में एक बैठक में रावत ने भांग (हेंप) के व्यावसायिक उपयोग के लिए नियमावली जल्द तैयार करने के निर्देश दिए थे। उद्यान विभाग से भांग के ऐसे बीज विकसित करने के लिए कहा था, जिसमें टीएचसी (टेट्रा हाइड्रो केनेबिनोल) तत्व अनुमन्य सीमा के भीतर हों। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो बीज फार्म स्थापित करने के निर्देश दिए थे।
बैठक में बताया गया कि हिमालयी जलवायु में विकसित भाग के रेशे की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है, लेकिन प्राकृतिक रूप से यहां उगने वाली भाग में टीएचसी तत्व अनुमन्य सीमा से अधिक होने के कारण व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि टीएचसी तत्व अनुमन्य सीमा में हो तो इनका व्यावसायिक उपयोग भी किया जा सकता है और ऐसी भांग का उपयोग नशे के लिए भी नहीं हो पाता है।
उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर इस गुणवत्ता के बीज आयात करने की बात भी कही थी। तब भी रावत ने कहा था, यदि व्यावसायिक उपयोग की श्रेणी के भांग का बीज यहां तैयार हो जाता है तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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