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उत्तराखंड लोक सेवा आयोगः इस परीक्षा के लिए जमा कराएं शुल्क और करें आवेदन

आयोग ने न्यायिक सेवा सिविल जज (जेडी) की मुख्य परीक्षा के लिए जारी किए निर्देश

हरिद्वार। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिजीवन) की मुख्य परीक्षा के लिए परीक्षा शुल्क जमा कराने तथा ऑनलाइन आवेदन के लिए वेबसाइट का लिंक बुधवार को खोल दिया दिया है।

आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार, सिविल जज (जेडी) की प्रारंभिक परीक्षा 13 मार्च 2022 को आयोजित की गई थी, जिसका रिजल्ट 19 अप्रैल, 2022 को घोषित किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा में औपबन्धिक रूप से सफल घोषित अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा का आयोजन किया जाना है। आयोग की वेबसाइट https://ukpsc.gov.in/ पर मुख्य परीक्षा का शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन आवेदन का लिंक 27 अप्रैल, 2022 (बुधवार) से खोल दिया गया है।

आयोग ने इस संबंध में विज्ञप्ति सहित चेक लिस्ट और अन्य उपयोगी लिंक उपलब्ध कराए हैं, जिन पर अभ्यर्थी अधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं। लिंक इस प्रकार हैं-

1. विज्ञप्ति के लिए यहां क्लिक करें।

2. चेकलिस्ट के लिए यहां क्लिक करें।

3. नाम में भिन्नता के संबंध में स्वघोषणा।

4. ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा किए जाने एवं ऑनलाइन आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।

आयोग के अनुसार, अभ्यर्थियों द्वारा उक्त लिंक का प्रयोग करते हुए परीक्षा शुल्क जमा करने के पश्चात ऑनलाइन आवेदन-पत्र (जिसमें अनुक्रमांक अंकित हो) तथा अभिलेखों की चैकलिस्ट आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड करते हुए उक्त ऑनलाइन आवेदन-पत्र में किए गए दावे के सापेक्ष समस्त शैक्षणिक , आरक्षण इत्यादि अभिलेखों की स्वहस्ताक्षरित छायाप्रति के साथ आयोग कार्यालय में जमा किया जाना है।

अभ्यर्थी लिफाफे के ऊपर परीक्षा का नाम ’’उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल जज (जू.डि.) (मुख्य) परीक्षा-2021” एवं अनुक्रमांक अवश्य अंकित करें। उक्तानुसार समस्त अभिलेख सचिव, उत्तराखंड लोक सेवा, आयोग, हरिद्वार-249404 के कार्यालय में डाक द्वारा अथवा अन्य किसी भी माध्यम से जमा किए जाने की अन्तिम तिथि 17 मई, 2022 (मंगलवार) (सायं 06ः00 बजे तक) निर्धारित की गयी है।

पूरी जानकारी के लिए देखें- आयोग द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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