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NEWSLIVE24x7 > Blog > Featured > कोरोना की लहरें बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेंगी या अधिक घातक होंगी, ये सभी अटकलें हैं
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कोरोना की लहरें बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेंगी या अधिक घातक होंगी, ये सभी अटकलें हैं

Rajesh Pandey
Last updated: July 21, 2021 7:22 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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नई दिल्ली। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के शिशु रोग विभाग के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने बच्चों पर कोविड-19 के प्रभाव, उनकी सुरक्षा की आवश्यकता और गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली माताओं को टीका लगवाने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।

महामारी ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित किया है? इसके दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के लिए क्या करने की आवश्यकता है?

महामारी का बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वे एक साल से अधिक समय से घर तक ही सीमित हैं। इसके अलावा, परिवार में बीमारियां, माता-पिता के लिए वेतन के नुकसान से तनाव बढ़ा है। बच्चे एक अलग तरीके से व्यवहार करके मनोवैज्ञानिक संकट (उदासी) व्यक्त कर सकते हैं। प्रत्येक बच्चे अलग-अलग रूप से व्यवहार करते हैं। कुछ खामोश हो सकते हैं ,जबकि दूसरे क्रोध और अतिसक्रियता व्यक्त कर सकते हैं।

देखभाल करने वाले लोगों के लिए बच्चों के साथ धैर्य रखने और उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत है। छोटे बच्चों में तनाव के लक्षणों की तलाश करें, जिससे अत्यधिक चिंता या उदासी,  अस्वास्थ्यकर भोजन या नींद की आदतें, ध्यान और एकाग्रता में कठिनाई हो सकती हैं। परिवारों को भी तनाव से निपटने और उनकी चिंता को दूर करने के लिए बच्चों का समर्थन करने की आवश्यकता है।

क्या आपको लगता है कि भविष्य की लहरें बच्चों को और अधिक गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं? शिशु रोगियों को गुणवत्ता देखभाल प्रदान करने के संबंध में कैसे देश को कोविड-19 की भविष्य की लहर के लिए तैयार करने की जरूरत है?

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कोविड-19 एक नया वायरस है जिसमें म्यूटेट होने की क्षमता है। यह अटकलें हैं कि क्या भविष्य की लहरें बच्चों को अधिक प्रभावित करेंगी या अधिक घातक होंगी। लोगों की अटकलें हैं कि भविष्य की लहरें बच्चों को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि अधिकतर वयस्कों को अगले कुछ महीनों में टीका लगाया जाएगा,जबकि इस समय हमारे पास बच्चों के लिए कोई स्वीकृत टीका नहीं है।

हालांकि हम नहीं जानते कि भविष्य में वायरस बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करेगा और प्रभाव डालेगा, लेकिन हमें अपने बच्चों को संक्रमण से बचाने की जरूरत है। घर में वयस्कों को कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करना चाहिए तथा संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए अपने सामाजिक संबंधों को सीमित करना चाहिए, क्योंकि वे संक्रमण दूसरों तक ले जा सकते हैं और फैला सकते हैं। इसके अलावा सभी वयस्कों को टीके लगवाने चाहिए, जिससे बच्चों की काफी हद तक सुरक्षा भी होगी।

और अब टीका गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी उपलब्ध है। इससे जानलेवा संक्रमण से बढ़ते भ्रूण और नवजात को कुछ हद तक सुरक्षा मिलेगी।

कोविड-19 की दूसरी लहर ने कैसे बच्चों को प्रभावित किया है?

दूसरी लहर ने बच्चों को समान रूप से प्रभावित किया है। कोविड-19 एक नया वायरस है और यह सभी आयु समूहों को प्रभावित करता है, क्योंकि हमारे पास इस वायरस के खिलाफ प्राकृतिक रोग प्रतिरोधी क्षमता नहीं है। एनसीडीसी/आईडीएसपी डैशबोर्ड के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत संक्रमित कोविड का योगदान 20 वर्ष से कम आयु के रोगियों द्वारा किया गया था।

हाल के सर्वेक्षणों ने बच्चों और वयस्कों में एक तरह की सेरोपॉजिटीविटी दिखाई है। यद्यपि दूसरी लहर के दौरान प्रभावित लोगों की बड़ी संख्या के कारण संक्रमित बच्चों की संख्या पहली लहर की तुलना में अधिक थी। अभी तक वयस्कों की तुलना में बच्चों में मृत्यु दर कम रही है और सामान्य तौर पर यह रोगग्रस्त बच्चों में देखी गई है।

शिशु रोगियों के इलाज में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर उन लोगों को जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत थी?

मोटे तौर पर हम कोविड संक्रमित बच्चों के लिए समर्पित बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से अच्छी तरह से बच्चों का प्रबंधन करने में सक्षम थे। लेकिन दूसरी लहर के शिखर के दौरान हमें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि अनेक वरिष्ठ डॉक्टर, रेजीडेंट डॉक्टर, स्टॉफ नर्सें पॉजिटिव हो गई थीं। हमें दूसरी लहर के शिखर के दौरान सभी रेफरल को समायोजित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

Key words:- Dr. Praveen Kumar Director, Lady Hardinge Medical College, corona third wave, Impact of COVID-19 on children, How has the pandemic affected children’s mental and physical health, Can future waves affect children more severely,  COVID impact on children’s mental health, Impact of COVID on Children’s mental health, Impact of COVID 19 on children’s physical health

Contents
नई दिल्ली। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के शिशु रोग विभाग के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने बच्चों पर कोविड-19 के प्रभाव, उनकी सुरक्षा की आवश्यकता और गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली माताओं को टीका लगवाने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।महामारी ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित किया है? इसके दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के लिए क्या करने की आवश्यकता है?महामारी का बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वे एक साल से अधिक समय से घर तक ही सीमित हैं। इसके अलावा, परिवार में बीमारियां, माता-पिता के लिए वेतन के नुकसान से तनाव बढ़ा है। बच्चे एक अलग तरीके से व्यवहार करके मनोवैज्ञानिक संकट (उदासी) व्यक्त कर सकते हैं। प्रत्येक बच्चे अलग-अलग रूप से व्यवहार करते हैं। कुछ खामोश हो सकते हैं ,जबकि दूसरे क्रोध और अतिसक्रियता व्यक्त कर सकते हैं।देखभाल करने वाले लोगों के लिए बच्चों के साथ धैर्य रखने और उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत है। छोटे बच्चों में तनाव के लक्षणों की तलाश करें, जिससे अत्यधिक चिंता या उदासी,  अस्वास्थ्यकर भोजन या नींद की आदतें, ध्यान और एकाग्रता में कठिनाई हो सकती हैं। परिवारों को भी तनाव से निपटने और उनकी चिंता को दूर करने के लिए बच्चों का समर्थन करने की आवश्यकता है।क्या आपको लगता है कि भविष्य की लहरें बच्चों को और अधिक गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं? शिशु रोगियों को गुणवत्ता देखभाल प्रदान करने के संबंध में कैसे देश को कोविड-19 की भविष्य की लहर के लिए तैयार करने की जरूरत है?जैसा कि हम सभी जानते हैं, कोविड-19 एक नया वायरस है जिसमें म्यूटेट होने की क्षमता है। यह अटकलें हैं कि क्या भविष्य की लहरें बच्चों को अधिक प्रभावित करेंगी या अधिक घातक होंगी। लोगों की अटकलें हैं कि भविष्य की लहरें बच्चों को और अधिक प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि अधिकतर वयस्कों को अगले कुछ महीनों में टीका लगाया जाएगा,जबकि इस समय हमारे पास बच्चों के लिए कोई स्वीकृत टीका नहीं है।हालांकि हम नहीं जानते कि भविष्य में वायरस बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करेगा और प्रभाव डालेगा, लेकिन हमें अपने बच्चों को संक्रमण से बचाने की जरूरत है। घर में वयस्कों को कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करना चाहिए तथा संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए अपने सामाजिक संबंधों को सीमित करना चाहिए, क्योंकि वे संक्रमण दूसरों तक ले जा सकते हैं और फैला सकते हैं। इसके अलावा सभी वयस्कों को टीके लगवाने चाहिए, जिससे बच्चों की काफी हद तक सुरक्षा भी होगी।और अब टीका गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी उपलब्ध है। इससे जानलेवा संक्रमण से बढ़ते भ्रूण और नवजात को कुछ हद तक सुरक्षा मिलेगी।कोविड-19 की दूसरी लहर ने कैसे बच्चों को प्रभावित किया है?दूसरी लहर ने बच्चों को समान रूप से प्रभावित किया है। कोविड-19 एक नया वायरस है और यह सभी आयु समूहों को प्रभावित करता है, क्योंकि हमारे पास इस वायरस के खिलाफ प्राकृतिक रोग प्रतिरोधी क्षमता नहीं है। एनसीडीसी/आईडीएसपी डैशबोर्ड के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत संक्रमित कोविड का योगदान 20 वर्ष से कम आयु के रोगियों द्वारा किया गया था।हाल के सर्वेक्षणों ने बच्चों और वयस्कों में एक तरह की सेरोपॉजिटीविटी दिखाई है। यद्यपि दूसरी लहर के दौरान प्रभावित लोगों की बड़ी संख्या के कारण संक्रमित बच्चों की संख्या पहली लहर की तुलना में अधिक थी। अभी तक वयस्कों की तुलना में बच्चों में मृत्यु दर कम रही है और सामान्य तौर पर यह रोगग्रस्त बच्चों में देखी गई है।शिशु रोगियों के इलाज में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, खासकर उन लोगों को जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत थी?मोटे तौर पर हम कोविड संक्रमित बच्चों के लिए समर्पित बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से अच्छी तरह से बच्चों का प्रबंधन करने में सक्षम थे। लेकिन दूसरी लहर के शिखर के दौरान हमें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि अनेक वरिष्ठ डॉक्टर, रेजीडेंट डॉक्टर, स्टॉफ नर्सें पॉजिटिव हो गई थीं। हमें दूसरी लहर के शिखर के दौरान सभी रेफरल को समायोजित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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TAGGED:Can future waves affect children more severelycorona third waveCOVID impact on children's mental healthDr. Praveen Kumar DirectorHow has the pandemic affected children's mental and physical healthImpact of COVID 19 on children's physical healthImpact of COVID on Children's mental healthImpact of COVID-19 on childrenLady Hardinge Medical College
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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