By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: डोईवाला के जीशान घोड़ा बुग्गी पर बैठकर सिलाई सीखने जाते थे, आज कामयाब टेलर हैं
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > डोईवाला के जीशान घोड़ा बुग्गी पर बैठकर सिलाई सीखने जाते थे, आज कामयाब टेलर हैं
Blog LiveFeaturedNewsUttarakhand

डोईवाला के जीशान घोड़ा बुग्गी पर बैठकर सिलाई सीखने जाते थे, आज कामयाब टेलर हैं

Rajesh Pandey
Last updated: January 31, 2024 7:02 pm
Rajesh Pandey
2 years ago
Share
देहरादून जिले के डोईवाला में 34 वर्षीय जीशान के पैरों में दिक्कत है, पर उन्होंने हार नहीं मानी और सिलाई सीखकर जीवन यापन कर रहे हैं। फोटो- सार्थक पांडेय
SHARE

राजेश पांडेय। डोईवाला

34 साल के जीशान सुसुवा नदी के पुल के पास कुड़कावाला नई बस्ती में रहते हैं। यह जगह डोईवाला से बुल्लावाला जाते समय सुसुवा नदी के पुल से सटी है। पैरों में दिक्कत की वजह से जीशान बैसाखियों के सहारे चलते हैं। बैसाखियों के सहारे चलना सिखाने का श्रेय वो एक पूर्व फौजी को देते हैं। कहते हैं, वो मुझे नहीं सिखाते तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता। उनके बारे में वो विस्तार से बताते हैं। पर, जीशान से मुलाकात की वजह उनका हुनर है। जीशान के बनाए कपड़े लोग पसंद करते हैं। उनकी खास बात यह है कि वो चैलेंज स्वीकार करके जमकर मेहनत करते हैं।

जीशान बताते हैं, सातवीं तक पढ़ाई की। पहले कुड़कावाला रहते थे, बाद में पिता ने नई बस्ती में घर बना लिया। जब मैं छोटा था, तब भाई पीठ पर बैठाकर स्कूल ले जाता था। थोड़ा बड़ा हुआ तो बैसाखियों पर चलना सीखा। एक पूर्व फौजी ने मुझे बैसाखियों पर चलने के लिए कहा। मुझे इन पर बहुत डर लगता था। मैं कई बार उनको बुरा भला कह देता था, बचपन की बात थी, मुझे इतना कोई पता था कि वो मेरे भले के लिए यह सबकुछ कर रहे हैं। उन्होंने मुझे आगे चलना, पीछे की ओर चलना सिखाया। खुदा उनको जन्नत नसीब फरमाएं।

नई बस्ती में घर बनाया। पिता ने मुझे खोखा खोलकर दिया, जिसमें छोटा मोटा खाने का सामान बेचता था। यह काम अच्छा चलने लगा। खोखा बड़ा करके उसमें सामान भर दिया। बाद में सुसुवा नदी का पुल बना। वहां काम करने के लिए श्रमिक आए। दुकान अच्छी चलने लगी। पर, बाद में दुकान का काम अचानक ठप होने लगा। हमने बस्ती के बीच दुकान खोली, पर वो ज्यादा समय नहीं चल सकी।

जीशान बताते हैं, मेरे पिता ने कह दिया, मैंने जितना करना था कर दिया। तुम अब खुद देखो। मैं अब और मदद नहीं कर सकता। पिता के कहने पर मैंने टेलरिंग शॉप पर जाकर काम सीखना शुरू कर दिया। पहले देहरादून, फिर मियावाला और बाद में डोईवाला में काम सीखा। घर से इतनी दूर जाने में दिक्कत होती। यहां से घोड़ाबुग्गी डोईवाला जाती थी, उसमें बैठकर जाने लगा। कभी किसी जानने वाले की मोटरसाइकिल पर जाता। वहां से शाम को घर आने में काफी तकलीफों को सहा, पर हार नहीं मानी। हर मौसम अपना सीखना जारी रखा। पहले दुकान पर कुछ आय हो जाती थी, पर कहीं भी सीखने के दौरान कोई पैसा नहीं मिला। मुझे अपना काम शुरू करना था, इसलिए मन लगाकर सीखा।

जीशान अपनी दुकान चलाते हैं। ईद और शादियों के दिनों में उनके पास इतना काम होता है कि कारीगर भी रखने पड़ते हैं। कहते हैं, उनके उस्ताद जी ने कहा था, तुम एक महीने में 25 हजार रुपये तक का काम कर सकते हो, पर मैंने सीजन में 34 हजार रुपये तक कमाए। आजकल काम मंदा है, इसलिए खाली बैठा हूं। अब कुछ दिन बाद काम फिर शुरू हो जाएगा, हम व्यस्त हो जाएंगे।

वो कहते हैं, सीखना हमेशा काम आता है। मेहनत करने से जिंदगी आसान हो जाती है।

You Might Also Like

मेरा पड़ोसी आम का पेड़
देहरादून व नैनीताल में जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवाओं के लिए 125 मिलियन डॉलर
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023ः सीएस ने कहा, यातायात के कारण आम जनता को परेशानी न हो
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र डाउनलोड करें
युवा जोश कार्यक्रम: एम्स के डॉक्टर संतोष कुमार ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य जीवन में खुशियों की कुंजी है
TAGGED:Skill DevelopmentTailor shops in DehradunTailor's StoryTailoring shop
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article पांच मिनट की पांच कहानियां देती हैं जीवनभर की सीख
Next Article आपके वेब पोर्टल का लिंक कहीं ओर तो नहीं खुल रहा
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?