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यह कॉलम जिंदगी के हर उस आयाम को छूने की कोशिश है, जिनसे आर्थिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और वैचारिक रूप से भी समृद्धता हासिल होती है। इसमें ग्रामीण भारत, खासकर उत्तराखंड के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गांवों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

Latest Blog Live News

दशहरा मेला लाइवः रावण के पुतले की लकड़ी

राजेश पांडेय मैं अपने बेटे के साथ दशहरा…

नेताजी का इंटरव्यू

पड़ोस का कल्लन अब बड़ा आदमी हो गया।…

मास्टर जी की छड़ी

पांचवी क्लास की पिटाई अब तक नहीं भूला।…

इनको भी जीने लायक बना दो…

मैं आज 17 मई, 2018 दोपहर अपने दोस्त…

आज वह खुश है जिंदगी से

आपसे एक घटना शेयर करना चाहता हूं, जो मुझे…

तो ये दाग अच्छे हैं…

करीब एक साल पहले मैं कुछ बच्चों को…

मेरी समझ से बाहर हैं, अर्थ और अनर्थ

इन दिनों कुछ लोग मुझे देश की आर्थिक…

वो सपने दिखाता है …

शहर के एक खाली मैदान में मजमा लगा…

इनसे सड़क भरी पड़ी है, किस किस को सबक सिखाओगे

कुछ दिन पहले मैंने एक गलती कर दी,…

पहले एक था, अब गली-गली रावण

देहरादून जाते वक्त रास्ते में पड़ने वाले हर…

दिमाग हैक कर गए ये रोबोट

जब मैं छठीं क्लास में था, तब मेरे…

मैं मौत से भी ज्यादा तकलीफ देती हूं…

जो यह कहते हैं कि ईश्वर हर जीव…

वो मासूम बच्चा…

बात डेढ़ साल पुरानी है, लेकिन आज भी ऐसा…

जो सुर्खियों में हैं, वो मैं नहीं… 

आज जो सुर्खियों में हैं, वो मैं नहीं…

मां, तू तो मृत शैया पर अच्छी लगती है…

कहते हैं कि मां का दिल बहुत बड़ा…

आपका पलायन, हमारा पलायन…

आप पहाड़ के गांवो को छोड़कर देहरादून में…

सत्ता की संजीवनी हूं मैं

राजेश पांडेय लोग कहते हैं कि मैं जिंदगी…

मैं टूट गई तो जिंदगी रूठ जाएगी

जब तक मैं हूं, इंसान तो क्या जानवर…