
Uttarakhand Child Mental Health Survey: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पहली विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट
Uttarakhand Child Mental Health Survey: देहरादून, 11 नवंबर: उत्तराखंड में बाल और किशोर मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर पहली विस्तृत और समुदाय-आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी कर दी गई है।
रिपोर्ट का विमोचन 11 नवम्बर 2025 को चिकित्सा स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य बच्चों में ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता और सामान्य मानसिक विकारों की वास्तविक स्थिति को समझना और भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए ठोस आधार तैयार करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह सर्वे कराया।
देश का पहला सामुदायिक सर्वेक्षण
Uttarakhand Child Mental Health Survey: राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और निमहांस (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान), बेंगलुरु के सहयोग से गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून द्वारा यह सर्वेक्षण पूरा किया गया। यह रिपोर्ट न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का पहला सामुदायिक आधारित सर्वेक्षण है।
मुख्य बिंदु:
- आयु वर्ग और सैंपल: अध्ययन में 0 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के 802 बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया।
- भौगोलिक क्षेत्र: देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों में सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व शामिल रहा।
- अध्ययन की आवश्यकता: सर्वेक्षण ने बच्चों और किशोरों में मानसिक विकारों के मामलों में समय पर पहचान और उपचार की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता को उजागर किया है।
Uttarakhand Child Mental Health Survey: रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह सुझाव दिया गया है कि मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और विद्यालय स्वास्थ्य अभियानों में शामिल किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य की पहचान और सहायता के लिए विशेष प्रशिक्षण देने की भी पुरजोर अनुशंसा की गई है।
रिपोर्ट के विमोचन अवसर पर मुख्य अतिथि निमहांस की निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति ने इस पहल को राज्य की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया गया, तो उत्तराखंड बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बन सकता है।
राज्य सरकार पहले से ही निमहांस के साथ मिलकर “टेली-मानस” और “नमन” जैसी योजनाओं के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ कर रही है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट भविष्य में राज्य स्तरीय कार्ययोजना के लिए एक आधार बनेगी, जो “हर बच्चे को देखभाल, सहयोग और अवसर” सुनिश्चित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
इस अवसर पर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सलाहकार एसएचएसआरसी डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निमहांस के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप और डॉ. के. जॉन विजय सागर, तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी मौजूद रहे। सभी विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को राज्य की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया।













