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हरीश रावत बोले, यशपाल आर्य की गिरफ्तारी की साजिश हो रही है

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस बात की आशंका व्यक्त की है कि पूर्व मंत्री यशपाल आर्य को गिरफ्तार किया जा सकता है। उनका कहना है कि आर्य को गिरफ्तार करने की साजिश हो रही है। इसके विरोध में उन्होंने अपने आवास पर एक घंटा मौन व्रत रखने की बात कही।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत अधिकतर बार सोशल मीडिया के माध्यम से संवाद करते हैं। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा-
“जबरा मारे रोने न दे ” उत्तराखंड में यही कहावत बाजपुर में चरितार्थ हो रही है। सत्तारूढ़ दल का खनन माफिया के साथ गठबंधन, श्री Yashpal Arya पर प्राणघातक हमला और अब श्री यशपाल आर्या जी पर ही मुकदमा दर्ज हो गया है ।

पूर्व सीएम रावत लिखते हैं, श्री यशपाल आर्या द्वारा की गई एफआईआर में दर्ज अपराधी पकड़े नहीं गए हैं और श्री यशपाल आर्या को गिरफ्तार करने की साजिश हो रही है।
रावत कहते हैं, मन बहुत व्यथित है, छोटा राज्य है यदि इसी तरीके से चलेगा तो यह राज्य, माफिया राज्य में परिवर्तित हो जाएगा। राज तो बदला जा सकता है, राज्य भी वर्णित हो गया तो हमारे राज्य बनाने की कल्पना छितरा जाएगी। मैं अत्यधिक आहत महसूस कर रहा हूंँ, पूरे घटनाक्रम से, इसलिए मैंने तय किया है कि 10 बजे से 11 बजे तक मैं अपने आवास पर मौनव्रत रखूंगा।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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