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Glass House Farming in the Netherlands: इतिहास और आधुनिक कृषि में योगदान

नीदरलैंड में ग्लास हाउस फार्मिंग के फायदे और बढ़ता उत्पादन

Glass House Farming in the Netherlands: newslive24x7.com। 22 August, 2025: ग्लास हाउस फार्मिंग, आधुनिक कृषि की सबसे उन्नत और प्रभावी पद्धतियों में से एक है। यह केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि भोजन उत्पादन के भविष्य की दिशा है, जो पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान पेश करती है। ग्लास हाउस एक प्रकार का ग्रीनहाउस है, लेकिन हर ग्रीनहाउस ग्लास हाउस नहीं होता। जब शोधकर्ता और वैज्ञानिक इन तकनीकों पर अध्ययन करते हैं, तो वे अक्सर “ग्रीनहाउस” जैसे व्यापक शब्द का उपयोग करते हैं, जो प्लास्टिक और कांच दोनों तरह की संरचनाओं को कवर करता है।

ग्लास हाउस का इतिहास

ग्लास हाउस फार्मिंग का विचार नया नहीं है, बल्कि सदियों पुराना है। यह एक क्रमिक विकास का परिणाम है:

  • प्राचीन रोम: इस अवधारणा का सबसे पहला ज्ञात उदाहरण रोमन साम्राज्य में मिलता है। सम्राट टाइबेरियस के लिए, माली ‘स्पेक्ट्रकुलरिया’ नामक एक प्रणाली का उपयोग करते थे। इसमें अभ्रक (mica) या तेल लगे कपड़ों से ढंकी लकड़ी की चौखटों का इस्तेमाल होता था, ताकि सर्दियों में भी खीरा उगाया जा सके। यह आज के ग्रीनहाउस का एक प्रारंभिक रूप था।

History

  • पुनर्जागरण काल: 16वीं और 17वीं सदी में, यूरोप में ‘ऑरेंजेरी’ नामक संरचनाएं बनने लगीं। ये कांच की खिड़कियों वाले भवन थे, जिनका उपयोग भूमध्यसागरीय पौधों जैसे संतरों को ठंडी जलवायु में बचाने के लिए किया जाता था।
  • औद्योगिक क्रांति: 19वीं शताब्दी में बड़े पैमाने पर और सस्ती दर पर कांच का उत्पादन शुरू हुआ, जिससे आधुनिक ग्लासहाउस का उदय हुआ। इंग्लैंड और फ्रांस जैसे देशों में वैज्ञानिक अनुसंधान और वनस्पति संग्रह के लिए बड़े-बड़े ग्लासहाउस बनाए गए।
  • नीदरलैंड्स में क्रांति: ग्लास हाउस फार्मिंग को आधुनिक और औद्योगिक रूप देने का श्रेय नीदरलैंड्स को जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, नीदरलैंड ने अपनी सीमित भूमि का अधिकतम उपयोग करने के लिए इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया। उन्होंने इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वचालित जलवायु नियंत्रण और हाइड्रोपोनिक्स जैसी उन्नत तकनीकों को जोड़ा, जिससे वे इस क्षेत्र में एक वैश्विक नेता बन गए।

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आधुनिक कृषि में योगदान

ग्लास हाउस फार्मिंग आज कई मायनों में कृषि के भविष्य को आकार दे रही है:

  • सालभर उत्पादन: ग्लास हाउस के नियंत्रित वातावरण के कारण, किसान साल के किसी भी समय और किसी भी मौसम में फसल उगा सकते हैं, जिससे ऑफ-सीजन में भी ताजे उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
  • उत्पादकता में वृद्धि: यह पद्धति खुले खेत की तुलना में प्रति वर्ग मीटर कई गुना अधिक पैदावार देती है।
  • संसाधनों का कुशल उपयोग: ड्रिप सिंचाई और हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकें पानी की खपत को कम कर देती हैं। इसके अलावा, सीमित स्थान में अधिक उत्पादन होने से भूमि का भी कुशल उपयोग होता है।
  • उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद: नियंत्रित वातावरण में उगी हुई फसलें कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रहती हैं, जिससे कीटनाशकों का उपयोग कम होता है। इसका परिणाम उच्च गुणवत्ता और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पादों के रूप में सामने आता है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन: ग्लास हाउस फसलों को अत्यधिक गर्मी, ठंड, भारी बारिश और ओलावृष्टि जैसे मौसम के चरम प्रभावों से बचाता है।

नीदरलैंड में ग्लास हाउस फार्मिंग (Glass House Farming in the Netherlands)

नीदरलैंड में ग्लास हाउस फार्मिंग का इस्तेमाल न केवल आज भी हो रहा है, बल्कि यह दुनिया भर में इस क्षेत्र का सबसे उन्नत और अग्रणी उदाहरण है। यह वहाँ की अर्थव्यवस्था और कृषि का एक अभिन्न अंग बन चुका है।

नीदरलैंड में ग्लास हाउस फार्मिंग के वर्तमान स्वरूप का विस्तार से विवरण इस प्रकार है:

1. विशाल और सघन स्वरूप

ग्लास सिटी (Glass City): नीदरलैंड के ‘वेस्टलैंड’ जैसे क्षेत्रों में, ग्लास हाउस इतनी बड़ी संख्या में और इतने पास-पास बने हैं कि उन्हें उपग्रह से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे यह कांच का एक विशाल शहर हो। NASA की एक रिपोर्ट के अनुसार, नीदरलैंड्स के वेस्टलैंड क्षेत्र को दुनिया की ‘ग्रीनहाउस राजधानी’ माना जाता है। यह अमेरिका के बाद मूल्य के हिसाब से खाद्य पदार्थों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। यह सब लगभग 100 वर्ग किलोमीटर में फैले ग्रीनहाउस के भीतर किया जाता है। उदाहरण के लिए, टमाटर का उत्पादन प्रति वर्ष 10 लाख टन है, जो केवल 18 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में उगाया जाता है, जिससे यह दक्षता में विश्व में नंबर एक बन जाता है। नासा ने12 जून 2014 को ली गई एक तस्वीर के अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट दी। 

नीदरलैंड की Wageningen University & Research की एक स्टडी के अनुसार, खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने वर्ष 1964-1965 के लिए प्रत्येक देश की खाद्य संतुलन शीट प्रकाशित की थी। उस समय, नीदरलैंड्स का कुल क्षेत्रफल 25,68,000 हेक्टेयर था। इसमें 13,37,000 हेक्टेयर पर घास के मैदान थे। 8,00,000 हेक्टेयर पर खेती योग्य भूमि थी। 1,28,000 हेक्टेयर बागवानी के अंतर्गत थी, जिसमें से 6000 हेक्टेयर में ग्लास हाउस थे। उस समय कुल जनसंख्या लगभग 1.25 करोड़ थी।

2. अत्याधुनिक तकनीक का केंद्र

नीदरलैंड के ग्लास हाउस केवल कांच के ढाँचे नहीं हैं, बल्कि ये उच्च तकनीक से संचालित होने वाले पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) हैं। यहाँ इस्तेमाल होने वाली कुछ प्रमुख तकनीकें इस प्रकार हैं:

  • सटीक जलवायु नियंत्रण: कंप्यूटर और सेंसर के माध्यम से ग्लास हाउस के अंदर के तापमान, आर्द्रता, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) स्तर और प्रकाश को लगातार नियंत्रित किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि पौधे के लिए विकास की सबसे आदर्श परिस्थितियाँ बनी रहें।
  • हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स: अधिकांश ग्लास हाउसों में मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता। पौधे पोषक तत्वों से युक्त पानी के घोल में उगाए जाते हैं (हाइड्रोपोनिक्स), से पानी और उर्वरकों की 80% तक बचत होती है।
  • रोबोटिक्स और ऑटोमेशन: रोबोट पौधों की छंटाई करने, कटाई करने और उत्पादों को पैक करने का काम करते हैं। स्वचालित ट्रॉली और कन्वेयर सिस्टम से श्रम लागत कम होती है और दक्षता बढ़ती है।
  • सतत ऊर्जा का उपयोग: ऊर्जा की लागत को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए, कई ग्लास हाउस सौर ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा (geothermal energy) का उपयोग करते हैं। कुछ तो इतने कुशल हैं कि वे अपनी अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर मुनाफा भी कमाते हैं।

3. भविष्य की दिशा: स्थिरता और नवाचार

Glass House Farming in the Netherlands: नीदरलैंड्स अब ग्लास हाउस फार्मिंग को और अधिक टिकाऊ (sustainable) बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उनके भविष्य के लक्ष्यों में शामिल हैं:

  • कीटनाशकों का कम उपयोग: कीटों से बचाव के लिए जैविक तरीकों और प्राकृतिक शिकारियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता लगभग खत्म हो गई है।
  • जल पुनर्चक्रण: उपयोग किए गए पानी को साफ करके फिर से इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी शून्य के करीब हो जाती है।
  • कार्बन-तटस्थ उत्पादन: उनका लक्ष्य 2040 तक पूरी तरह से कार्बन-तटस्थ (carbon-neutral) खेती हासिल करना है।

नीदरलैंड में ग्लास हाउस फार्मिंग सिर्फ एक खेती का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक जटिल, बुद्धिमान और अत्यधिक कुशल उद्योग है जो भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और स्थिरता के नए मानक स्थापित कर रहा है।

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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