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    निहारना

    उमेश राय एकटक निहारना उसे, हारना कहाँ? बल्कि यहाँ कितना आनंद उमगता है, उर में, सुर में, अंत:पुर में दृश्य…

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    अभिराम राम

    उमेश राय हो निराशा जब प्रबल,तम में घिरा तमाम। चेतना के परिष्करण, तब याद आए राम ।। हर दिशाएं, सहमी-सहमी,…

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    खोजता हूँ

    उमेश राय अपने कमरे में उसे खोजता हूँ, खो जाता हूँ… पुनर्खोज क्या है? भूल को फूल की तरह पा…

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  • Blog Live

    तो ये दाग अच्छे हैं…

    करीब एक साल पहले मैं कुछ बच्चों को पढ़ाता था। इनमें क्लास छह का एक बच्चा ऐसा भी था, जो…

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