
AIIMS Rishikesh Yuva Josh Program: ऋषिकेश, 14 दिसंबरः प्रतिस्पर्धी दौर में शिक्षा, करियर और सामाजिक अपेक्षाओं के दबाव से जूझ रहे युवाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से एम्स, ऋषिकेश के डॉ. संतोष कुमार एक प्रेरक पहल चला रहे हैं। सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के अपर आचार्य डॉ. कुमार ने वर्ष 2018 में “युवा जोश – Youth Upliftment Journey Towards Optimism, Strength and Harmony” नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसने अब तक 5000 से अधिक छात्र-छात्राओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
चुनौतियों का समाधान
AIIMS Rishikesh Yuva Josh Program: डॉ. संतोष कुमार के अनुसार, करियर संबंधी असमंजस, मानसिक तनाव और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इन चुनौतियों को देखते हुए, ‘युवा जोश’ कार्यक्रम अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान केंद्रित करता है।
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कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ:
एम्स, ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. मीनू सिंह के दिशा-निर्देशन में चल रहे इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
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करियर फोकस और लक्ष्य प्राप्ति: युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार सही करियर चुनने और योजनाबद्ध तरीके से लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना।
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आत्मविश्वास और भावनात्मक नियंत्रण: मोटिवेशनल सत्र, योग और ध्यान के माध्यम से आत्मविश्वास और तनावपूर्ण स्थितियों में भावनाओं को संतुलित रखने की क्षमता विकसित करना।
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नशा-रोकथाम: नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से सशक्त बनाना।
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आर्थिक सशक्तिकरण: युवाओं को वित्तीय जागरूकता, निवेश के मूल सिद्धांतों और आर्थिक स्वतंत्रता के महत्व से अवगत कराना।
प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में सफल कार्यान्वयन
AIIMS Rishikesh Yuva Josh Program: ‘युवा जोश’ कार्यक्रम को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे आईआईटी रुड़की, आईआईटी दिल्ली, ग्राफ़िक एरा यूनिवर्सिटी, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी, एच एन बी गढ़वाल यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी जयपुर सहित कई अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
सकारात्मक परिणाम
कार्यक्रम के परिणामस्वरूप, लाभान्वित युवाओं में आत्मविश्वास, संगठन क्षमता और लक्ष्य-उन्मुखता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषज्ञ चिकित्सक की यह पहल युवाओं के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य को मजबूत करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में एक मिसाल बन चुकी है।













