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बया का गाँव …गाँव की बया !

jp-1एक बया ने तिनके- तिनके चुनकर नीड बनाया है,उस पेड़ पर आज अचानक स्मार्ट विकास का साया है।

नदी नाले , तालाब और रोहड और जो वो चरागाह था. गीली मिट्टी, झींगुर के गीत, धान रोपने की मिट्टी का गीलापन।

खेत की मेड़ पर गीली मिट्टी थोपते – चूड़ी भरे हाथ उन पर फंस जाता था अक्सर- धान की रोपाई से पहले.. काटे गए गेहूं का- आधा जला – सड़ा नट्टा ( गेहूं का स्ट्रॉ)।

छोटे छोटे खेत और उन्ही के अनुपात के हल – बैल
पर हमारे सपने छोटे नहीं थे-
रोज सहेज कर रखती माँ और बहन
खेत के किनारे उगे पेड़ों की टहनियां और पत्तियां साल भर के लिए !

तब गांवों में डरावने ठेकेदार, सेठ, मंत्री उनके संत्री और प्रधान….
पीली जेसीबी , बुलडोजर नहीं आते थे-
नहीं आते थे पेड़ काटने वाले कुल्हाड़े ।

पेड़ों के नीचे तब धान की खुशबू- महकती थी..
ऊपर पेड़ पर बया–बुनती थी- जीवन के गीत..
और नीड की हरियाली भरी नीॆव।

तब गाँव थे, लोग थे .
अब लोग हैं और है- पॉश कॉलोनी .
पर गांव नहीं रहे .

गाँव की भावना पेड़ काटने वाले कुल्हाड़े ले गए
बिल्डर के घर
बया ने रुख नहीं किया मुद्दत से
गाँव का ।

जेपी मैठाणी

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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