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साढ़े चार साल में 81 गांवों को पुनर्वासित कियाः सीएम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, प्राकृतिक आपदा के बाद प्रभावित गांवों एवं परिवारों के पुनर्वास नीति 2011 के प्रावधान के तहत राज्य में कुल 83 गांव एवं 1447 परिवारों को पुनर्वासित किया गया, जिसके लिए 61.02 करोड़ की धनराशि दी गई। जिनमें वर्ष 2017 से पहले दो गांवों के 11 परिवार तथा वर्ष 2017 के बाद 81 गांवों के 1436 परिवारों का पुनर्वास शामिल हैं।

बुधवार को अपने आवास में अन्तरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने अधिकारियों को पुनर्वासित परिवारों के लिए बिजली, पानी एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, जिन पुनर्वासित गांवों को सड़क से जोड़ा जाना है, उनकी सूची जल्द शासन को उपलब्ध कराई जाए।

धामी ने कहा, पुनर्वासित गांवों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्था मनरेगा से कन्वरजेंस एवं जिलाधिकारी के नियंत्रणाधीन विभिन्न कोषों से की जाए, इसके बाद भी कोई परेशानी हो, तो मामला शासन स्तर पर लाया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आठ जनपदों के पुनर्वासित गांवों के लोगों से बात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी समस्याओं का उचित हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों का लगातार सर्वे किया जाए। सर्वे के बाद जिन गांवों एवं परिवारों को तत्काल पुनर्वासित करने की आवश्यकता है, उनकी सूची भी जल्द उपलब्ध कराई जाए।

पुनर्वासित परिवारों के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार धनराशि दी गई है। पुनर्वासित क्षेत्र में अवस्थापना विकास के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, जिन लोगों का कोविड से निधन हुआ, उनको आश्रितों को आपदा मद से 50 हजार रुपये की धनराशि देने की व्यवस्था की जा रही है।

गढ़वाल मंडल में चमोली जनपद के 15 गांवों के 279  परिवार, उत्तरकाशी के 05 गांवों के 205 परिवार, टिहरी जनपद के 10 गांवों के 429 परिवार तथा रुद्रप्रयाग जनपद के दस गांवों के 136 परिवार पुनर्वासित किए गए।

जबकि कुमाऊं मंडल के अन्तर्गत पिथौरागढ़ के 31 गांवों के 321 परिवार, बागेश्वर जनपद के 09 गांवों के 68 परिवार, नैनीताल जनपद के एक गांव का एक परिवार एवं अल्मोड़ा जनपद के दो गांवों के आठ परिवार विस्थापित किए गए।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरूगेशन, वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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