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VIDEO: घेरते-घेरते अपनों में ही घिर गए हरीश रावत

देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत नहीं चाहते कि वर्ष 2016 में उनकी सरकार को खतरे में डालने वाले नेता फिर से घर वापसी करें। यशपाल आर्य की घर वापसी और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के बयानों के बाद, पूर्व सीएम रावत ने साफ-साफ कह दिया कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले, उन सभी को अपने पापों का प्रायश्चित करना होगा, जो उनकी सरकार गिराने में शामिल रहे।

वैसे तो, हरीश रावत सोशल मीडिया पर अपने बयानों और भाषा शैली को लेकर चर्चाओं में रहते हैं, पर हालिया वक्तव्य से तो यही संदेश जा रहा है कि अपने घर में पहले से ही घिरे रावत को अब और विरोधी नहीं चाहिए।

हालांकि, कांग्रेस में शामिल यशपाल आर्य को रावत ने उन जैसा नहीं बताया, जिनका वो विरोध कर रहे हैं। आर्य और हरीश रावत बाद में एक दूसरे से कितना सहज और असहज महसूस करेंगे, यह बाद की चर्चा का विषय है। हालांकि, माना यह भी जा रहा है कि  यशपाल आर्य के कांग्रेस में शामिल होने के बाद, हरीश रावत, अपने ही उस बयान में घिरते नजर आ रहे हैं, जो उन्होंने पंजाब के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद दिया था।

हरीश रावत ने उत्तराखंड में दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही थी। उनके इस बयान से सभी का ध्यान पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा की ओर जा रहा है, पर दो दिन पहले यशपाल आर्य की विधायक पुत्र सहित कांग्रेस में वापसी के बाद से हरीश रावत अपने बयान में ही घिरे दिखाई दे रहे हैं।

आर्य की कांग्रेस में वापसी का श्रेय नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को दिया जा रहा है। कांग्रेस में विधायक प्रीतम सिंह को हरीश रावत खेमे से बाहर माना जाता है। माना जा रहा है कि हरीश रावत के दलित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बयान के बाद से ही आर्य की कांग्रेस में वापसी की मुहिम तेज हो गई थी। आर्य को लेकर प्रीतम सिंह का यह बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने यशपाल आर्य के मुख्यमंत्री बनने में हर्ज नहीं होने की बात कही है। शायद, प्रीतम सिंह यही बात हरीश रावत को असहज कर रही है।

हालांकि रावत ने आर्य की वापसी का खुलकर कोई विरोध नहीं किया, पर उनका हालिया बयान विरोधियों की संख्या बढ़ने से रोकने के लिए है, जिससे साफ होता है कि रावत अपने पूर्व के बयान को लेकर पार्टी में ही अपने प्रतिद्वंद्वियों से घिरा पा रहे हैं।

वहीं, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से हरिद्वार में हुुई वार्ता और चुनाव नहीं लड़ने के बयान को प्रेशर पॉलिटिक्स से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बयान को भी उसी तरह समझा जा रहा है, जैसा कि ऐन चुनाव से पहले राजनीतिज्ञ जारी करते हैं। हालांकि माना जा रहा है कि हरक सिंह रावत डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, जबकि भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहले से ही इस सीट पर सक्रिय हैं।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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