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कोरोना संक्रमणः मददगार हो सकता है पोर्टेबल अस्पताल ‘मेडिकेब’

Rajesh Pandey
Last updated: May 4, 2021 9:09 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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फोटो साभार- इंडिया साइंस वायर
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भारत जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया का दूसरा बड़ा देश है। इस बढ़ती जनसंख्या के कारण समाज का एक बड़ा हिस्सा मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाता है।
इंडिया साइंस वायर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रति एक हजार लोगों पर केवल 0.7 बेड हैं। इस वक्त देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। जहां दिन-प्रतिदिन लाखों की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। जो एक चिंता का विषय है।

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भारत जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया का दूसरा बड़ा देश है। इस बढ़ती जनसंख्या के कारण समाज का एक बड़ा हिस्सा मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाता है।इंडिया साइंस वायर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में प्रति एक हजार लोगों पर केवल 0.7 बेड हैं। इस वक्त देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। जहां दिन-प्रतिदिन लाखों की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। जो एक चिंता का विषय है।इसके कारण अस्पतालों में बेड, दवाई और अन्य चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी उत्पन्न हो गई है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के स्टार्ट-अप ‘मोड्यूल्स हाउसिंग’ ने एक ऐसी तकनीक का विकास किया है, जिससे एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी तो वहीं, कोरोना संक्रमित मरीजों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा।‘मेडिकेब’ नामक इस पोर्टेबल माइक्रो स्ट्रक्चर के जरिए स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमितों की पहचान, जांच, आइसोलेशन और इलाज आसानी से किया जा सकेगा।मॉड्यूल हाउसिंग ऐसे कई माइक्रो अस्पताल विकसित कर रहा है, जिन्हें देशभर में तेजी से स्थापित किया जा सकता है।कोरोना महामारी को हराने के लिए इस प्रकार के बुनियादी ढांचे बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में ‘मेडिकेब’ जैसे सार्थक प्रयास कोरोना के खिलाफ लड़ाई में निश्चित रूप से काफी मददगार साबित होंगे।आईआईटी मद्रास के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘मोड्यूल्स हाउसिंग’ ने कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए ‘मेडिकेब‘ नामक एक पोर्टेबल अस्पताल इकाई विकसित की है। जिसे केवल चार आदमी मिलकर मात्र 2 घंटे में कहीं भी स्थापित कर सकते हैं। इसलिए इसे ‘मेडिकेब’ नाम दिया गया है। इसे हाल ही में केरल के वायनाड जिले में लॉन्च किया गया है।‘मेडिकेब’ नामक इस पोर्टेबल माइक्रो स्ट्रक्चर के जरिए स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमितों की पहचान, जांच, आइसोलेशन और इलाज आसानी से किया जा सकेगा।मॉड्यूल हाउसिंग स्टार्ट-अप को आईआईटी मद्रास के दो छात्रों राम रविचंद्रन और डॉ. तमस्वती घोष ने वर्ष 2018 में शुरू किया था, जिसे आईआईटी मद्रास के इंक्यूबेशन सेल का सहयोग प्राप्त रहा है।इसके साथ ही प्रोजेक्ट के सर्टीफिकेशन और बेहतर परिचालन के लिए स्टार्टअप ने श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी भी की है। (इंडिया साइंस वायर)Keywords:- India Science Wire, World Health Organization, The second wave of Corona infection,Start-up ‘Modules Housing’, Indian Institute of Technology (IIT) Madras,Timely treatment of corona infected patients,Portable micro structure, Medicabe, Module Housing,Fight against Corona, IIT Madras, Portable Hospital, Wayanad District of Kerala,Sri Chitra Tirunal Institute for Medical Sciences and Technology, आईआईटी मद्रास, केरल राज्य, कोरोना की दूसरी लहर, कोरोना से बचाव के उपाय, कोविड-19, पोर्टेबल अस्पताल, माइक्रो अस्पताल, मोड्यूल्स हाउसिंग,मेडिकेब
इसके कारण अस्पतालों में बेड, दवाई और अन्य चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी उत्पन्न हो गई है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के स्टार्ट-अप ‘मोड्यूल्स हाउसिंग’ ने एक ऐसी तकनीक का विकास किया है, जिससे एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी तो वहीं, कोरोना संक्रमित मरीजों का समय पर इलाज संभव हो सकेगा।
‘मेडिकेब’ नामक इस पोर्टेबल माइक्रो स्ट्रक्चर के जरिए स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमितों की पहचान, जांच, आइसोलेशन और इलाज आसानी से किया जा सकेगा।
मॉड्यूल हाउसिंग ऐसे कई माइक्रो अस्पताल विकसित कर रहा है, जिन्हें देशभर में तेजी से स्थापित किया जा सकता है।

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कोरोना महामारी को हराने के लिए इस प्रकार के बुनियादी ढांचे बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में ‘मेडिकेब’ जैसे सार्थक प्रयास कोरोना के खिलाफ लड़ाई में निश्चित रूप से काफी मददगार साबित होंगे।
आईआईटी मद्रास के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ‘मोड्यूल्स हाउसिंग’ ने कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए ‘मेडिकेब‘ नामक एक पोर्टेबल अस्पताल इकाई विकसित की है। जिसे केवल चार आदमी मिलकर मात्र 2 घंटे में कहीं भी स्थापित कर सकते हैं। इसलिए इसे ‘मेडिकेब’ नाम दिया गया है। इसे हाल ही में केरल के वायनाड जिले में लॉन्च किया गया है।
‘मेडिकेब’ नामक इस पोर्टेबल माइक्रो स्ट्रक्चर के जरिए स्थानीय स्तर पर कोरोना संक्रमितों की पहचान, जांच, आइसोलेशन और इलाज आसानी से किया जा सकेगा।
मॉड्यूल हाउसिंग स्टार्ट-अप को आईआईटी मद्रास के दो छात्रों राम रविचंद्रन और डॉ. तमस्वती घोष ने वर्ष 2018 में शुरू किया था, जिसे आईआईटी मद्रास के इंक्यूबेशन सेल का सहयोग प्राप्त रहा है।
इसके साथ ही प्रोजेक्ट के सर्टीफिकेशन और बेहतर परिचालन के लिए स्टार्टअप ने श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के साथ साझेदारी भी की है। (इंडिया साइंस वायर)
Keywords:- India Science Wire, World Health Organization, The second wave of Corona infection,Start-up ‘Modules Housing’, Indian Institute of Technology (IIT) Madras,Timely treatment of corona infected patients,Portable micro structure, Medicabe, Module Housing,Fight against Corona, IIT Madras, Portable Hospital, Wayanad District of Kerala,Sri Chitra Tirunal Institute for Medical Sciences and Technology, आईआईटी मद्रास, केरल राज्य, कोरोना की दूसरी लहर, कोरोना से बचाव के उपाय, कोविड-19, पोर्टेबल अस्पताल, माइक्रो अस्पताल, मोड्यूल्स हाउसिंग,मेडिकेब

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TAGGED:Fight against coronaIIT MadrasIndia Science WireIndian Institute of Technology (IIT) MadrasMedicabeModule HousingPortable HospitalPortable micro structureSri Chitra Tirunal Institute for Medical Sciences and TechnologyStart-up 'Modules Housing'The second wave of Corona infectionTimely treatment of corona infected patientsWayanad District of Keralaworld health organizationआईआईटी मद्रासकेरल राज्यकोरोना की दूसरी लहरकोरोना से बचाव के उपायकोविड-19पोर्टेबल अस्पतालमाइक्रो अस्पतालमेडिकेबमोड्यूल्स हाउसिंग
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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