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रामनगर डांडा में बना ‘गड्ढा’ 40 ट्राली रेत से भी नहीं भर पाया!

डोईवाला। यहां पहले कुआं था, या फिर जमीन के नीचे गुजरती कोई सुरंग है, जो भरने का नाम ही नहीं ले रही। आठ माह में भी इसका रहस्य पता नहीं चल पाया। भले ही, यह पूरे क्षेत्र के लिए पहेली बना हो, लेकिन एक परिवार के लिए तो करीब आठ महीने से आफत बना है।

देहरादून के थानो के पास रामनगर डांडा में राजेंद्र सिंह मनवाल के मकान से लगी जमीन धंसने से दिसंबर, 2020 में करीब 40 से 50 फीट गहरा गड्ढा, जिसे कुआं कहें तो ज्यादा अच्छा होगा, बन गया था।

उस समय अचानक जमीन धँसने की जांच हुई या नहीं, जांच हुई तो रिपोर्ट क्या है, के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

मनवाल बताते हैं कि दिसंबर 2020 में धंसी जमीन को 40 ट्राली रेत से भरा गया था। उस समय सभी निश्चिंत हो गए थे कि अब शायद यहां गड्ढा नहीं बनेगा। पर, 19 जुलाई, 2021 को उसी जगह पर फिर से जमीन धंस रही है। कुल मिलाकर यह गड्ढा मनवाल परिवार के लिए आफत बन गया है।

देहरादून के रामनगर डांडा में ट्रक से जमीन धंसी और कुआं बन गया

उनका मकान लगभग 15 साल पुराना है। यहां लगभग 50 साल से ज्यादा समय से रह रहे हैं। इससे पहले ऐसी कोई घटना यहां आसपास क्षेत्र में नहीं हुई।

घर में बच्चों और बुजुर्गों सहित दस लोग निवास करते हैं। कृषक राजेंद्र सिंह मनवाल ने बताया कि प्रशासन को सूचना दी गई है। उन्होंने इस समस्या के स्थाई समाधान की मांग प्रशासन से की है।

उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि कहीं, इस धँसाव की चपेट में उनका भवन भी न आ जाए। बताया कि जब से यह धंसाव हो रहा है, हमें रात को बार-बार जागकर यहां देखना पड़ रहा है। छोटे बच्चों और जानवरों के लिए ज्यादा खतरा बना रहता है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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