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खेल प्रबंधन में कार्यकारी स्नातकोत्तर डिप्लोमा के लिए नामांकन आमंत्रित

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) के तहत खेल विभाग ने ऐसे उम्मीदवारों की सहायता करने के लिए एक नई पहल शुरू की है, जो मेधावी हैं और जिन्होंने एशियाई, राष्ट्रमंडल या ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

इस पहल के तहत इनसे आईआईएम- रोहतक से संचालित खेल प्रबंधन में कार्यकारी स्नाकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) डिप्लोमा कार्यक्रम के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं।

खेल विभाग इस सहायता को आईआईएम रोहतक में ईपीजीडीएसएम पाठ्यक्रम शुरू होने की तारीख से 5 साल तक यानी सितंबर 2021 से सितंबर 2026 तक जारी रखेगा और प्रत्येक उम्मीदवार को 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आकस्मिक लागत की कोई अन्य मद जैसे; यात्रा खर्च, जेब खर्च का वहन उम्मीदवार खुद करेगा/करेगी।

उम्मीदवारों को आईआईएम- रोहतक के निर्धारित चयन मानदंडों के अनुसार अपना नामांकन सुरक्षित करना होगा और फिर आईआईएम- रोहतक में ईपीजीडीएसएम पाठ्यक्रम में नामांकन पर विचार करने के लिए खेल विभाग से संपर्क करना होगा।

इस पर खेल विभाग द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले उम्मीदवारों का नामांकन लिया जाएगा। इस संबंध में खेल विभाग का निर्णय अंतिम व बाध्यकारी होगा।

खेल विभाग ऐसे नामांकित उम्मीदवार, जो अंतिम रूप से नामांकित हो गए हैं और कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं, के लिए सीधे आईआईएम-रोहतक को पूर्व निर्धारित समयावधि पर उपस्थिति लागत जारी करेगा।

आईआईएम रोहतक या किसी अन्य स्रोत से छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले उम्मीदवार की स्थिति में आईआईएम रोहतक खेल विभाग को तत्काल सूचित करेगा और इसके द्वारा खेल विभाग से की गई मांग के मुकाबले छात्रवृत्ति की राशि को समायोजित किया जाएगा।

Keywords:- EPGDSM Programme, IIM Rohtak, Nomination for Executive Post Graduate Diploma in Sports Management, Department of Sports, Ministry of Youth Affairs and Sports, MYAS 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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