पद्मश्री ने बताया, गढ़वाल में उनके गांव ने लिया एक शानदार फैसला

Rajesh Pandey
पद्मश्री कल्याण सिंह रावत। फोटो- सोशल मीडिया से लिया है।

देहरादून। विश्वभर में ख्याति प्राप्त मैती आंदोलन के प्रेरणास्रोत कल्याण सिंह रावत पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवाओं के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं। कल्याण सिंह रावत चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लाक के बैनोली गांव के निवासी हैं। उन्होंंने अपने गांव के एक फैसले को साहसिक एवं शानदार पहल बताया है।

उन्होंने बताया कि उनके गांव के महिला मंगल दल तथा नवयुवक मंगल दल की संयुक्त बैठक में एक बड़ा निर्णय लिया है। उनके गांव ने अब किसी भी समारोह में शराब नहीं परोसे जाने का फैसला किया है। इस नियम का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित व्यक्ति को दस हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।

अपने गांवों में पेड़ लगाने के लिए बच्चे गुल्लक में रोज जमा करते हैं एक रुपया
पद्मश्री कल्याण सिंह रावत की पहल पर हिमालय, गंगा और गांव बचाने की एक और सकारात्मक पहल की गई है, जो देहरादून की नियोविजन संस्था मैती आंदोलन के साथ कार्य कर रही है। नियोविजन संस्था बच्चों की निशुल्क शिक्षा के लिए कार्य कर रही है।

नियोविजन के संस्थापक गजेंद्र रमोला बताते हैं, मैती ग्राम गंगा अभियान गांवों में पर्यावरण को बचाने की अभिनव पहल है। नियोविजन के छात्र-छात्राओं ने अपने घर में गुल्लक रखी है, जिस पर उनके गांव का पता तथा अपने पूर्वजों के नाम लिखे हैं। बच्चे प्रतिदिन मात्र एक रुपया गुल्लक में जमा करते हैं। कभी भूल या परिस्थितिवश रुपया नहीं डाल पाते तो उन दिनों के एकमुस्त 5 या 10 रुपये जमा करते हैं।

पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर परिवार के साथ बैठ कर गुल्लक में जमा राशि को गिनकर अपने गांव भेजते हैं। इसके बाद गुल्लक में फिर से प्रतिदिन एक रुपया जमा करने का क्रम शुरू हो जाता है। हर गांव में मैती ग्राम गंगा समिति बनाई गई है, जो छात्र-छात्राओं द्वारा भेजी गई राशि से एक पौधा खरीदकर उसको रोपती है तथा उस गांव के विद्यालय का इको क्लब पौधे की देखभाल करता है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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