
Tribal Area Infrastructure Development: दूरदराज के गांवों में कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर
भाकृअनुप-भारतीय मृदा और जल संरक्षण संस्थान, देहरादून ने 'जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा' के तहत इच्छला गांव में कार्यक्रम आयोजित किया
Tribal Area Infrastructure Development: देहरादून, 7 नवंबर 2025: भाकृअनुप-भारतीय मृदा और जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून ने ‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ के अंतर्गत, 7 नवंबर 2025 को देहरादून के कलसी ब्लॉक के इच्छला गांव में “आदिवासी क्षेत्र में अवसंरचना” पर एक महत्वपूर्ण चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया। डॉ. रमन जीत सिंह के समन्वयन में आयोजित इस कार्यक्रम में सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवा और संचार नेटवर्क जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं की प्रगति और चुनौतियों की गहन समीक्षा की गई।
प्रमुख उपस्थिति और चर्चा के मुख्य बिंदु
इस चर्चा कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय के नेताओं, सरकारी अधिकारियों, विकास एजेंसियों और आदिवासी जनसंख्या के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने सतत विकास के लिए अपने विचार और सुझाव साझा किए, जिसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित मुद्दे उभरे:
Tribal Area Infrastructure Development
सड़क संपर्क (Connectivity) बनी सबसे बड़ी चिंता
- चुनौती: प्रतिभागियों ने बताया कि कलसी ब्लॉक के कई दूरदराज के गांवों में, विशेषकर पहाड़ी और वन क्षेत्रों में, संपर्क अभी भी एक बड़ी चिंता है। खराब सड़कें बाजार, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच को सीमित करती हैं, खासकर मानसून के मौसम में।
- सुझाव: चर्चा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत चौबीसों घंटे चलने वाली सड़कों के निर्माण और मौजूदा मार्गों के तत्काल रखरखाव की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियाँ
- चुनौती: ब्लॉक में कई सरकारी स्कूल कार्यरत हैं, लेकिन प्रतिभागियों ने शिक्षकों की कमी, भवनों की अनुपयुक्तता और डिजिटल सुविधाओं के अभाव जैसी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
- सुझाव: आदिवासी बच्चों के लिए आवासीय स्कूलों की स्थापना और शिक्षक प्रशिक्षण व उपस्थिति में सुधार लाने के सुझाव दिए गए।
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स्वास्थ्य सेवा में सुधार की आवश्यकता
- चुनौती: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) अक्सर कर्मचारियों की कमी और उपकरणों की अनुपस्थिति से जूझ रहे हैं।
- सुझाव: दूरदराज के गांवों तक पहुंचने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, टेलीमेडिसिन और नियमित स्वास्थ्य शिविरों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
डिजिटल कनेक्टिविटी पर ज़ोर
- चुनौती: कई गांवों में अभी भी विश्वसनीय मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं, जिससे ई-गवर्नेंस, शिक्षा और वित्तीय समावेशन में बाधा आती है। संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी को व्यापक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया।
सामुदायिक भागीदारी और समन्वय पर बल
कार्यक्रम का समापन स्थानीय समुदायों की भागीदारी से समन्वित योजना बनाने की सामूहिक अपील के साथ हुआ ताकि अवसंरचना परियोजनाएं समावेशी, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और पर्यावरणीय रूप से स्थायी हों। विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करना यह सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख रणनीतियाँ बताई गईं कि कलसी ब्लॉक के हर आदिवासी परिवार तक विकास के लाभ पहुँचें।
कार्यक्रम समन्वयक और प्रतिभागी
यह कार्यक्रम डॉ. अभिमन्यु व मुदित मिश्रा की सहायता से आयोजित किया गया। गांव प्रधान अजय सिंह चौहान, वरिष्ठ बीडीसी सदस्य प्रियांका चौहान, रविंदर चौहान, प्रेम सिंह चौहान, केसर सिंह, रोशन सिंह, सुमित्रा, रीना आदि चर्चा में उपस्थित थे।













