
उत्तराखंड के प्राइमरी स्कूलों में आने वाला है ‘जादुई पिटारा’
Jadui Pitara: ‘जादुई पिटारा’ योजना के प्रमुख बिंदु:
- उद्देश्य: 3 से 8 वर्ष के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि, सीखने की उत्सुकता, चिंतन कौशल, गणितीय समझ और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना।
- निर्माता: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया।
- सामग्री: खिलौने, कठपुतलियाँ, पहेलियाँ, रोचक कहानियाँ, खेल, चित्रकला, नृत्य और संगीत पर आधारित शिक्षण सामग्री।
- लक्ष्य: उत्तराखंड के सभी प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- प्रथम चरण: पौड़ी (1,354 विद्यालय) और पिथौरागढ़ (973 विद्यालय) जनपदों के 2,327 प्राथमिक विद्यालयों में वितरण।
- द्वितीय चरण: शेष 11 जनपदों (अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी) के 8,939 विद्यालयों में शीघ्र वितरण।
- लाभ: बच्चों का सर्वांगीण विकास, शिक्षा में नवीन तकनीकों का उपयोग, और प्रारंभिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण।
प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गुरुवार को अपने विधानसभा क्षेत्र पाबौ ब्लॉक के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एनसीईआरटी द्वारा विकसित खेल-आधारित शिक्षण सामग्री ‘जादुई पिटारा’ का वितरण किया। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए नवीन तकनीकों और योजनाओं को लागू कर रही है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सके।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा विकसित नई शिक्षण सामग्री ‘जादुई पिटारा’ को प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराया जा रहा है।
समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में पौड़ी और पिथौरागढ़ जनपदों के 2,327 प्राथमिक विद्यालयों में जादुई पिटारा वितरित किया जा चुका है। इसमें पौड़ी के 1,354 और पिथौरागढ़ के 973 विद्यालय शामिल हैं।
डॉ. रावत ने बताया कि द्वितीय चरण में शेष 11 जनपदों के 8,939 प्राथमिक विद्यालयों में जादुई पिटारा वितरित किया जाएगा। इनमें अल्मोड़ा (1,248), बागेश्वर (561), चमोली (919), चंपावत (477), देहरादून (881), हरिद्वार (666), नैनीताल (937), रुद्रप्रयाग (521), टिहरी (1,265), ऊधमसिंह नगर (778) और उत्तरकाशी (686) जनपदों के विद्यालय शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जादुई पिटारा 3 से 8 वर्ष के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि, सीखने की उत्सुकता, चिंतन कौशल, गणितीय समझ और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देगा। इस पिटारे में खिलौने, पहेलियाँ, रोचक कहानियाँ, खेल, चित्रकला, नृत्य और संगीत पर आधारित शिक्षण सामग्री शामिल है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी।













