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उत्तराखंड में होमगार्ड जवानों को कोविड ड्यूटी के लिए 6000 रुपये प्रोत्साहन राशि की घोषणा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को तपोवन रोड स्थित होमगार्डस मुख्यालय में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन के स्थापना दिवस पर रैतिक परेड कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कोविड के दौरान लगातार कोविड ड्यूटी में तैनात सभी होमगार्ड जवानों को 6000 रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान थानो के छात्रावास तथा जिला कमान्डेंट होमगार्ड कार्यालय, हरिद्वार का लोकार्पण भी किया।
मुख्यमंत्री धामी ने भव्य परेड की सलामी ली और विभागीय स्मारिका का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने होमगार्ड्स तथा नागरिक सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को उनके कार्यों के प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कोविड ड्यूटी के दौरान दिवंगत होमगार्ड स्व० रोशन सिंह की पत्नी श्रीमती बबीता को दो लाख रुपये की राशि का चेक प्रदान किया। होमगार्ड राजबहादुर को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, होमगार्ड्स के जवान पूरे समर्पित भाव से जन सेवा और पुलिस को सहयोग करते आ रहे हैं। होमगार्ड्स जवानों को जिस भी मोर्चे पर तैनात किया गया, उन्होंने उम्मीद से बढ़कर कार्य करके दिखाया। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं के सही संचालन से लेकर, किसी भी आपात स्थिति से निपटने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में होमगार्ड्स के जवान उत्कृष्ट योगदान देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा हो या फिर कुंभ का आयोजन होमगार्डस के जवानों की हर स्थिति में भूमिका बेहद अहम रहती है। होमगार्ड्स सुदूर पर्वतीय ग्रामीण अंचलो में भी पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर शान्ति व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान होमगार्ड्स के जवानों ने सराहनीय कार्य किया। राज्य में अब होमगार्ड्स के जवानों की संख्या 6500 से और बढ़ाई जा रही है। होमगार्ड्स निदेशालय में समूह-ग के पदों पर होमगार्ड्स को 25 प्रतिशत आरक्षण भी तय किया जा चुका है। फोर्स का सर्वांगीण विकास सरकार की योजनाओं का अहम हिस्सा है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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