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Video- श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये देने वाले संत ने राजनीति और धर्म पर बोली यह बड़ी बात

Rajesh Pandey
Last updated: March 17, 2022 5:25 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
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स्वामी शंकर दास जी।
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न्यूज लाइव रिपोर्ट

ऋषिकेश। टाट वाले बाबा जी के शिष्य स्वामी  शंकर दास (Swami Shankar Dass) बेहद सादगी पसंद हैं और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। संत स्वामी शंकर दास ने अपना जीवन लोक कल्याण को समर्पित किया है। विद्यालयों को सहयोग की बात हो या फिर बेटियों के विवाह की, उन्होंने हमेशा सहयोग प्रदान किया है। अब भी लोक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं।

करीब 85 वर्षीय स्वामी शंकर दास हाल ही में उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर (Shri Ram Temple in Ayodhya) के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये भेंट किए। उन्होंने 50 वर्ष की जमा पूंजी मंदिर निर्माण के लिए भेंट कर दी।

स्वर्गाश्रम (Swargashram, Pauri Garhwal) में वेद निकेतन (Ved Niketan) में newslive24x7.com से वार्ता कहते हुए, स्वामी शंकर दास कहते हैं, कभी धन को महत्व नहीं दिया, पर उस समय धन के महत्व को महसूस किया, जब देशभर से लोग उनसे मिलने पहुंचे और वो धन पर ही बात कर रहे थे। क्या साधना की, क्या अनुभव हुआ, पर कोई बात नहीं की।

पौड़ी गढ़वाल जिला स्थित वेद निकेतन के पास से जानकी सेतु कुछ ऐसा दिखता है। जानकी सेतु गंगा नदी पर बना है। यह मुनिकी रेती (टिहरी गढ़वाल) और स्वर्गाश्रम (पौड़ी गढ़वाल) को जोड़ता है। फोटो- डुगडुगी

पैसों की वजह से इतना प्रसिद्ध हो गया। लोग मेरे पास आने लगे हैं। सभी पैसों से संबंधित बात करते हैं। भगवान के बारे मे कोई बात नहीं करता। किसी ने ईश्वर और ज्ञान पर चर्चा नहीं की।

टाट वाले बाबा जी के शिष्य शंकर दास कहते हैं, संसार में ऐसी कोई चीज नहीं है, जो प्रसन्नता दे सके। संतोष ही प्रसन्नता है। आपके पास जो है, उतने का ही सदुपयोग कीजिए। इसी में संतुष्टि है। जितनी चादर है उतनी ही फैलाएं। धन संचय से कुछ नहीं होता।

स्वर्गाश्रम (पौड़ी गढ़वाल) स्थित वेद निकेतन। फोटो- डुगडुगी

हां, पेट के लिए रोटी, तन के लिए कपड़ा और रहने के लिए छत की आवश्यकता होती है। बाकि संग्रह यहीं पड़ा रहता है, यह साथ नहीं जाएगा। बहुत से लोगों के पास करोड़ों, अरबों रुपया है, पर कुछ काम नहीं आता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, किसी के पास कुंतलों मिठाई है, पर डायबिटीज (Diabetes) जैसा रोग होने पर यह सब उसके किसी काम का नहीं है। मन की वासना से लोग धन इकट्ठा करते हैं। असली जरूरत के लिए धन रखो। यह नहीं कि उसके पीछे भागो।

यह पूछे जाने पर इतनी बड़ी धनराशि किसी अस्पताल या स्कूल के लिए भी दान कर सकते थे, पर स्वामी शंकर दास का कहना है, अस्पताल में मनुष्य के वात, कफ और पित्त का इलाज होता है, पर मंदिर में तो मन के रोगों का इलाज होता है। सबसे ज्यादा रोग तो मन का है। मंदिर- मस्जिद में हर बीमारी का इलाज होता है। वो सबसे बड़े अस्पताल हैं।

वेद निकेतन से शाम को गंगा नदी का अनुपम नजारा। फोटो- डुगडुगी

स्वामी शंकरदास कहते हैं, मंदिर मन को केंद्रित करने का स्थान है। सार्वजनिक मंदिर हो या घर में व्यक्तिगत मंदिर मन को केंद्रित करो। परिवार में सभी सदस्य एक-एक करके साथ छोड़ते जाते हैं, पर ईश्वर का सहारा तो हमेशा रहता है। ईश्वर का सहारा लेने वाला हर समस्या का समाधान कर सकता है। कुछ लोगों ने पाखंड पैदा करके ईश्वर के प्रति अविश्वास पैदा किया है। हर धर्म में किसी न किसी रूप में ईश्वर को माना जाता है। श्रद्धा का कोई केंद्र होना चाहिए। मंदिर किसी मोहल्ले में बनता है तो वहां सैकड़ों या हजारों लोग पहुंचते। श्री राम मंदिर में करोड़ों लोगों पहुंचेंगे।

उनका कहना है, धर्म और राजनीति का जुड़ना आवश्यकता है। धर्म सामाजिक व्यवस्था है। धर्म और राजनीति एक दूसरे के पूरक है। धर्म ईश्वर का नहीं, समाज के बुद्धिमान लोगों का बनाया हुआ है। समाज को एक व्यवस्था में रखने के लिए, समाज को सुरक्षा में रखने के लिए धर्म को बनाया गया था।

धर्म के नाम पर लड़ने की जरूरत नहीं है। किसी देश के कानून को बदलने के लिए लड़ाई कैसे कर सकते हैं।हमारे देश का अपना कानून है और दूसरे देश का अपना कानून है।

पहले के जमाने में कानून नहीं होता था, धर्म ही कानून होता था। हर विषय धर्म में होता था। एक आदमी को कैसे जीना है, किस परिस्थिति में क्या करना चाहिए, यह धर्म बताता था। धर्म एक कानून है, धर्म एक व्यवस्था है। समाज को सुरक्षा देने के लिए धर्म की व्यवस्था है।

पहले राजा एक दूसरे राज्य पर कब्जा करते थे। राजा अपना देवता साथ लेकर चलता था। वो अपनी प्रजा से अपने देवता की पूजा करने को कहता था। वो अपने कानून के अनुसार चलने को कहता था।  वो सारा कानून बदल देता था।

वो कहते हैं, धर्म ही राजनीति है और राजनीति ही धर्म है। राजनीति करने वाले धर्म को समझें तो कभी उपद्रव नहीं करेंगे और न ही पब्लिक को दुख देंगे। यहां राजनीति ही असली धर्म है। लेकिन कुछ लोगों ने उसको अलग माना है।

जीवन में प्रसन्न रहने के उपाय बताते हुए स्वामी शंकर दास कहते हैं, जो आपके पास है, उसमें संतुष्ट रहिए। पुरुषार्थ करिए। धनवान को देखकर धनवान बनने के लिए पुरुषार्थ कीजिए। मैं यदि हवाई जहाज नहीं खरीद सकता तो मैं उसके बारे में क्यों सोचूं। जो आप कर सकते हैं, उसके बारे में सोचिए। जो नहीं कर सकते, उसको छोड़ दो।

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TAGGED:Dharma in PoliticsPolitics and DharmaRelation in Politics and DharmaShri Ram MandirShri Ram Temple in AyodhyaWhat is Dharma
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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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