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कांग्रेस में शामिल होने के बाद सामने आया हरक सिंह का माफीनामा

बोले, 2016 में भाजपा ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों का दुरुपयोग किया था

देहरादून। भाजपा से निष्कासित होकर कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की एक चिट्ठी सामने आई है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए 2016 की घटना के लिए माफी मांगी है। यह चिट्ठी उनकी ज्वाइनिंग के बाद सामने आई है।इससे अब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की वो शर्त भी पूरी हो गई है, जिसके अनुसार कांग्रेस में शामिल होने से पहले 2016 की राजनीतिक घटना के लिए माफी मांगने को कहा था। 2016 में हरीश रावत की सरकार को संकट में डालने वाले विधायकों में हरक सिंह रावत भी शामिल थे। वहीं, इससे स्पष्ट है कि माफी मांगने के बाद ही हरक सिंह को कांग्रेस में एंट्री मिली।

इस पत्र में लिखा है, भाजपा नेताओं ने 2014 लोकसभा चुनावों में जनता से बहुत बड़े-बड़े वादे कर “अच्छे दिनों” के सपने दिखाए थे। जनता से भाजपा ने वादे किए थे कि महंगाई कम होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा, विदेशों से काला धन लाकर हर व्यक्ति को 15-15 लाख देंगे आदि- आदि। हमें व उत्तराखंड की महान जनता को भरोसा दिलाया कि डबल इंजन की सरकार बनने पर ये तमाम किए गए वादों को पूरा जाएगा। इन वादों से मुझे उम्मीद जगी कि उत्तराखंड में पलायन की समस्या, बेरोजगारी व शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी दूर करने में केंद्र सरकार से विशेष सहायता मिलेगी।

हरक सिंह के इस पत्र में लिखा है, भाजपा नेताओं ने 2016 में भी भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने पर तमाम समस्याओं को सुलझाने में केंद्र सरकार से विशेष सहायता मिलेगी। यही वादे दोबारा 2017 के विधानसभा चुनावों में भी दोहराए गए। 2017 के चुनावों में भाजपा सरकार बनने पर मैं इन वादों को पूरा करने के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं से बार-बार आग्रह करता रहा, जिसे हर बार यह कहकर टालते रहे कि विचार-विमर्श चल रहा है।

उन्होंने लिखा, सरकार का कार्यकाल समाप्त होने पर भी ये तमाम वादे पूरे नहीं हुए और ये वादे सिर्फ “जुमले” साबित हुए। भाजपा के मुख्यमंत्री बदलने से उम्मीद जगती थी, जो कुछ समय में धूमिल हो गई। सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के समय भी मैंने बार-बार भाजपा नेताओं को आगाह किया कि चुनावी वादों को पूरा करो, लेकिन जब कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई तो अंततः मैंने भाजपा को छोड़ने का फैसला ले लिया।

लिखा है, आज मैं जब पूर्व की घटनाओं का अवलोकन कर रहा हूँ और भाजपा व पूर्व कांग्रेस सरकार का तुलनात्मक अध्ययन कर रहा हूँ तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि उत्तराखंड की समस्याओं को सुलझाने व उत्तराखंड के चहुंमुखी विकास में कांग्रेस की सरकारों का बेहतरीन योगदान रहा है।

पत्र में लिखा है, पूर्व की इन घटनाओं के अवलोकन से ऐसा महसूस होता है कि कांग्रेस छोड़ने का फैसला मेरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल थी, जिसके लिए मैं कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ताओं व नेताओं तथा उत्तराखंड की महान जनता से क्षमायाचना करता हूँ। उत्तराखंड के विकास में श्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार के आगे भाजपा सरकार दूर-दूर तक भी कहीं मुकाबला नहीं कर पाई। जनता से झूठे वादे कर ठगने वाली और लोकतंत्र को अपमानित करने वाली भाजपा ने आगामी चुनावों में वोट मांगने का नैतिक अधिकार भी खो दिया है।

वो लिखते हैं, आज मुझे अहसास हुआ कि उत्तराखंड का तभी भला होगा जब उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार बनेगी। इसीलिए मैं कांग्रेस सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास करूँगा, ताकि जो सपने उत्तराखंड बनाने वाले आंदोलनकारियों ने देखे थे, वो पूरे हो सकें। 2016 में भाजपा ने कांग्रेस सरकार को अस्थिर कर अपनी सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों का दुरुपयोग किया और लोकतंत्रात्मक तरीकों को तार-तार कर दिया था।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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