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सैनिक स्कूल समिति से संबद्धता को अब तक 194 स्कूलों का रजिस्ट्रेशन, आवेदन जारी

स्वीकृत स्कूल अगले शैक्षणिक वर्ष से सैनिक स्कूल पाठ्यक्रम लागू करेंगे

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) के अनुरूप रक्षा मंत्रालय की सैनिक स्कूल समिति के अधीन सैनिक स्कूलों को पंजीकृत किया जा रहा है। ये स्कूल एक विशिष्ट कार्यक्षेत्र के रूप में काम करेंगे, जो रक्षा मंत्रालय के वर्तमान सैनिक स्कूलों से भिन्नता एवं विविधता लिए हुए होंगे। पहले चरण में राज्यों/गैर-सरकारी संगठनों/निजी भागीदारों से संबद्ध 100 स्कूलों को इसमें शामिल करना प्रस्तावित है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सैनिक स्कूलों के वर्तमान स्वरूप में बदलाव के रूप में रक्षा मंत्रालय की सैनिक स्कूल समिति के अधीन संबद्ध सैनिक स्कूलों को शुरू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।

इस योजना का उद्देश्य पूरे देश में इच्छुक छात्रों के बड़े वर्ग को सैनिक स्कूलों के समान शिक्षा प्रदान करना है। सैनिक स्कूल समिति ने ऐसे उन सभी आवेदक स्कूलों को आवेदन पत्र भेज दिए हैं, जिन्होंने 15 जनवरी 2022 तक खुद को पंजीकृत कराया है। आवेदन पत्र 21 जनवरी 2022 तक ऑनलाइन प्रारूप के माध्यम से भरकर सैनिक स्कूल सोसाइटी के पास वापस जमा कराना आवश्यक है। अब तक 194 स्कूल https://sainikschool.ncog.gov.in पर “पंजीकृत” किए जा चुके हैं।

इसके बाद जिला स्तर पर स्कूल मूल्यांकन समिति स्कूलों का मूल्यांकन करेगी और जनवरी 2022 के अंतिम सप्ताह तक सैनिक स्कूल समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। मूल्यांकन समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:

(क) अध्यक्ष के रूप में जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर

(ख) उसी जिले में स्थित नवोदय विद्यालय संगठन/केन्द्रीय विद्यालय संगठन के प्रधानाचार्य

(ग़) निकटतम सैनिक स्कूल के प्रधानाचार्य

सैनिक स्कूल समिति से अनुमोदित स्कूल अगले शैक्षणिक वर्ष यानी अप्रैल 2022 में कक्षा 6वीं ओर उससे आगे के लिए सैनिक स्कूल पाठ्यक्रम और उसकी गतिविधियों का पालन करना शुरू कर देंगे। शिक्षकों के प्रशिक्षण, खेलकूद और अतिरिक्त  पाठ्येतर गतिविधियों सहित स्कूल प्रबंधन के अन्य पहलुओं के बारे में अनुमोदित स्कूलों को अलग से सूचित किया जाएगा। नए सैनिक स्कूलों द्वारा ‘एक स्कूल एक खेल’ के सिद्धांत को भी लागू किया जाएगा, ताकि उस राज्य के लिए कम से कम एक खेल गतिविधि पर ध्यान केंद्रित किया जा सके, जहां स्कूल स्थित है ।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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