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नींद नहीं आती है तो यह जानकारी आपके लिए है

  • प्रोफेसर रवि गुप्ता
    निद्रा रोग विशेषज्ञ
    मनोरोग विभाग, एम्स ऋषिकेश
  • यह लेख एम्स ऋषिकेश की पत्रिका स्वास्थ्य चेतना में प्रकाशित हुआ है।

नींद (Sleep) एक नियमित रूप से होने वाली स्वाभाविक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, जिसमें शरीर और मस्तिष्क को आराम और पुनर्निर्माण के लिए समय मिलता है। यह हमारे जीवन का लगभग एक तिहाई हिस्सा बनाता है।

एक अच्छी एवं तरोताजगी देने वाली नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए उतनी आवश्यक है जितना भोजन और व्यायाम।

अनिद्रा शब्द अ (नहीं) और निद्रा (नींद) से मिलकर बना है- इसका मतलब है नींद का नहीं आना या सोने में असमर्थता।

अनिद्रा अपर्याप्त और खराब गुणवत्ता वाली नींद की स्थिति है। यह दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का अनुमान है कि दुनिया की लगभग 30% आबादी नींद की समस्याओं से ग्रस्त है और उनमें से लगभग 10% को अनिद्रा की बीमारी है।

तनावग्रस्त जीवन शैली के कारण प्रत्येक व्यक्ति कभी-कभी अनिद्रा का अनुभव करता है, जो बिना किसी गंभीर समस्या के आते और जाते हैं। लेकिन, कुछ लोगों के लिए, अनिद्रा के एपिसोड महीनों या वर्षों तक चलते हैं और जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं। इसलिए अनिद्रा की समस्या को ठीक से समझना जरूरी है।

सामान्यतः अनिद्रा में निम्नलिखित में से एक या एक से अधिक लक्षण देखने को मिलते हैं-

  • नींद आने में समस्या / परेशानी होना
  • रात को बार-बार नींद टूटना
  • सुबह नींद जल्दी खुल जाना
  • दिन में थकान
  • उदासी
  • चिड़चिड़ापन
  • सर दर्द
  • ध्यान देने में परेशानी

उपरोक्त लक्षण यदि हफ्ते में कम से कम 3 दिन रहते है तो आपको अनिद्रा की बीमारी हो सकती है। यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है की उपरोक्त परेशानी नींद के लिए पर्याप्त समय और वातावरण देने के बावजूद हो।

अनिद्रा के प्रकार

1 . एक्यूट इंसोमनिया या अल्पकालिक अनिद्रा

यह अनिद्रा का एक सामान्य रूप है और आमतौर पर मनोवैज्ञानिक या शारीरिक तनाव के परिणामस्वरूप होता है।

तीव्र अनिद्रा के रोगी अक्सर अनिद्रा के तत्काल कारण की पहचान कर सकते हैं। लक्षण अक्सर एक महीने से भी कम समय तक रहते हैं, हालांकि औपचारिक निदान मानदंड (स्टैंडर्ड डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया) लक्षणों को तीन महीने तक रहने की अनुमति देते हैं।

2. क्रोनिक अनिद्रा या दीर्घकालिक अनिद्रा

अनिद्रा की यह समस्या गंभीर हो सकती है। औपचारिक निदान मानदंड के अनुसार इसमें अनिद्रा के लक्षण तीन महीने से ज्यादा समय के लिए रह सकते है।

अनिद्रा के कारण
अनिद्रा के कई सारे कारण हो सकते है.-

लाइफस्टइल या जीवन शैली-

जाने अनजाने में कई बार हमारे जीवन शैली से जुड़ी चीजें अनिद्रा का कारण बनती है जैसे-

1. उत्तेजक पदार्थ का सेवन

अगर हम शाम के समय एक कप चाय या काफ़ी पीते है तो यह हमें लम्बे समय तक जगा कर रख सकता है, क्योंकि कैफीन हमारे ब्लड स्ट्रीम में लगभग छह घंटे तक रहता है।

2. निकोटिन का सेवन

कई बार हम बीड़ी, सिगरेट या तम्बाकू के माध्यम से निकोटिन का सेवन करते है, यह हमें नींद को शुरू करने में बहुत तकलीफ देता है।

3. शराब

आपको ऐसा लग सकता है कि सोते समय एक गिलास शराब लेने से आपको जल्दी नींद आ जाएगी, परन्तु इसके लगातार सेवन से आपकी नींद पूरी रात बार-बार टूटेगी और नींद की गुणवत्ता भी खराब होगी।

4. कार्य का समय-

यदि आप ऐसा काम करते है जिसका शिफ्ट बदलता रहता है तो आपको नींद की समस्या होने की सम्भावना अधिक हो जाती है।

5. खराब आदतें-

इंटरनेट पर देर रात तक काम करना, कोई भी स्क्रीन जैसे टीवी, मोबाइल या टेबलेट का उपयोग सोने से तुरंत पहले करना, प्रमुख रूप से बहुत डरावने या परेशान करने वाले प्रोग्राम आपकी नींद में परेशानी पैदा कर सकते हैं।

6. कसरत-

नियमित कसरत करने से अच्छी नींद आती है एवं इसकी गुणवत्ता में भी सुधार होता है। कसरत करने का सबसे अच्छा समय सुबह अथवा दोपहर बाद होता है। सोने से तीन घंटे पहले तक अधिक मेहनत या कसरत करने से नींद खराब हो सकती है।

मनोवैज्ञानिक कारण

छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव लेना या चिंता करने की आदत होना, नींद को लेकर लगातार सोचना, नींद आये इसके लिए बार- बार प्रयास करने से अनिद्रा की समस्या और खराब होती है।

वातावरणीय कारण बेडरूम में अधिक आवाज और अधिक प्रकाश होने से भी नींद में परेशानी हो सकती है।

1. दवाएं- स्टेरॉयड, थियोफिलाइन, फिनाइटोइन, लेवोडोपा और चयनात्मक सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर जैसी दवाएं अनिद्रा के जोखिम को बढ़ाती हैं।

2. मनोरोग- अवसाद और चिंता रोग के मरीज में भी अनिद्रा होने की सम्भावना ज्यादा रहती है।

3. नींद सम्बन्धी अन्य विकार- कई बार नींद सम्बन्धी दूसरी बीमारियों से भी अनिद्रा हो सकती है, जैसे:- ऑब्सट्र‌क्टिव स्लीप एपनिया (OSA), यह नींद के दौरान होने वाली श्वास की बीमारी है। सोने के दौरान तेज खर्राटे आते है, सांस बार बार रुकती, जिससे आपकी नींद बार-बार टूटती है और नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (RLS)- सोने के दौरान पैर में दर्द और असहजता होना या बेचैनी, पैर या पैर के पंजों को हिलाने की तीव्र इच्छा होना तथा हिलाने पर असहजता में आराम पड़ना, ये नींद को शुरू करने में परेशानी पैदा करता है और नींद के दौरान भी बार-बार उत्तेजना आने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है।

पीरियाडिक लिम्ब मूवमेंट्स (PLM)- इसमें नींद के दौरान थोड़े समय के लिए मांसपेशियों में संकुचन होता है, जिससे हाथ या पैर में झटके आ सकते हैं। यह 1 या 2 सेकेंड्स के लिए होता है, परन्तु ऐसा बार-बार होता रहता है, जिससे नींद में बार-बार व्यवधान पैदा होता है।

शारीरिक बीमारियाँ-

कई बार शारीरिक समस्याएं भी अनिद्रा का कारण बन सकती है।

उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, थायराइड, और श्वास-रोग जैसी बीमारियों नींद को प्रभावित कर सकती हैं।

अनिद्रा के प्रभाव- अनिद्रा का असर व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर होता है।

शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव-

1. थकान और कमजोरी

अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति दिनभर की गतिविधियों में थकावट महसूस कर सकता है और उसे कमजोरी आ सकती है।

2. इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है-

नींद की कमी के कारण शारीरिक रूप से सक्रियता कम हो सकती है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है और व्यक्ति अधिक संक्रमण का सामना कर सकता है।

3. वजन नियंत्रण में परेशानी-

अनिद्रा के कारण शरीर के वजन नियंत्रण में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, क्योंकि नींद की कमी से आपकी भूख और सैकड़ों हार्मोनल प्रणालियां प्रभावित हो सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभावः

1. ध्यान केंद्रित नहीं रहना:

अनिद्रा के कारण व्यक्ति ध्यान केंद्रित नहीं रख पाता है और मानसिक क्लैरिटी में कमी हो सकती है।

2. इरिटेबिलिटी और मुड स्विंग्सः

नींद की कमी से व्यक्ति इरिटेबिल हो सकता है और उसके मूड में बदलाव आ सकता है. जिससे मुड स्विंग्स हो सकते हैं।

3. याददाश्त तथा निर्णय लेने की क्षमता में कमी:

अनिद्रा से आपकी याददाश्त खराब हो सकती, तथा छोटे छोटे निर्णय लेने में भी लम्बा समय लग सकता है।

4. मानसिक चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो सकता है:

नींद की कमी के कारण व्यक्ति को मानसिक चुनौतियों का सामना करने में मुश्किल हो सकती है और उसकी सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में असुविधाएं हो सकती हैं।

अच्छी नींद के लिए ये हैं कुछ आदतें

नींद की कुछ अच्छी आदतें :

जब आप थका हुआ महसूस करें तभी सोएं।

सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध पिए।

सुनिश्चित करें कि आपका शयनकक्ष शांत हो और कमरे में अँधेरा हो।

अपने बेडरूम को आरामदायक तापमान पर स्खें।

सोने से कुछ घंटे पहले व्यायाम न करें।

सोने और यौन क्रिया के लिए ही बेडरूम का उपयोग करें।

शाम को भारी भोजन खाने या बहुत सारा पानी पीने से बचें।

दिन में देर से कैफीन युक्त पेय जैसे कॉफी और चाय, या तम्बाकू लेने से बचें।

सप्ताह के अंत में भी नियमित रूप से सोने और जागने के चक्र का पालन करें। यह शरीर को स्लीप शेड्यूल विकसित करने में मदद करता है।

पढ़ने, टीवी देखने या बिस्तर पर चिंता करने से बचें क्योंकि इससे नींद में खलल पड़ सकता है।

30 मिनट से ज्यादा की झपकी लेने से बचें। बार- बार झपकी न लें और दोपहर 3:00 बजे के बाद झपकी न लें।

सोने से पहले गुनगुने पानी से नहाएं या रात को सोने से पहले 10 मिनट के लिए उपन्यास या कहानी पढ़ें।

  • एम्स ऋषिकेश के मनोरोग विभाग में प्रोफेसर रवि गुप्ता का यह लेख एम्स ऋषिकेश की पत्रिका स्वास्थ्य चेतना में प्रकाशित हुआ है। प्रो. रवि गुप्ता निद्रा रोग विशेषज्ञ हैं। स्वास्थ्य चेतना पत्रिका का प्रकाशन एम्स ऋषिकेश की आउटरीच सेल द्वारा किया जा रहा है।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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