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एम्स की सलाहः डेंगी से निपटने के लिए ये जरूरी काम कर लें

डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव

जुलाई से अक्टूबर महीने में बारिश, आर्द्रता और तापमान डेंगी फैलाने वाले मच्छर के लिए अच्छा मौका होते हैं। इसके अंडे साल भर पानी में या इधर-उधर होते हैं। डेंगी के मच्छर को बढ़ने के लिए तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस चाहिए। अधिक आर्द्रता, तापमान और पानी का जोड़, इसके लिए सोने पर सुहागा जैसा है। पहले यह मच्छर 20 दिन में लार्वा से वयस्क बनता था, इन दिनों में यह सात दिन में ही लार्वा से वयस्क बन जाता है।

एम्स ऋषिकेश (AIIMS Rishikesh) के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग (CFM- Community and Family Medicine Department) में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार (Additional Professor Dr. Santosh Kumar) के निर्देशन कई टीमें ऋषिकेश शहर और आसपास के इलाकों में डेंगी के खिलाफ जंग चला रही हैं। उनका मानना है, डेंगी जैसी सामाजिक बीमारी का अंत भी सामाजिक सहयोग से ही संभव है।

रेडियो ऋषिकेश (Radio Rishikesh) से एक साक्षात्कार में डॉ. संतोष कुमार बताते हैं, ” डेंगी सामाजिक बीमारी है। यह वायरस से होता है, लेकिन यह अनोखा इसलिए है, क्योंकि यह व्यक्ति से व्यक्ति नहीं, बल्कि मच्छर से व्यक्ति को होता है। मच्छर को कंट्रोल करना तो हमारे हाथ में है। मच्छरों को कंट्रोल करके हम इस बीमारी पर नियंत्रण पा सकते हैं।”

“एडीज मच्छर डेंगी के वायरस को अपने शरीर में लाकर व्यक्तियों तक पहुंचाता है। ये घरों के आसपास मिलता है।”

“इस मच्छर के काटने का समय सूर्योदय से कुछ देर पहले से और सूर्यास्त से कुछ समय पहले तक है। मॉर्निंग एवं इवनिंग वॉक के दौरान पूरे वस्त्र पहनने चाहिए। शरीर का कम से कम भाग खुला रहे।”

“डेंगी में बहुत तेज बुखार, जिसे हड्डी तोड़ बुखार कहते हैं, होता है। सिर दर्द होता है, आंखों के पीछे दर्द होता है, इसमें वायरल वाले सभी लक्षण हैं। अगर, शरीर में लाल- लाल चकत्ते पड़ रहे हैं, रक्त स्राव हो रहा है, उल्टी हो रही है, तो यह खतरे की घंटी है, तुरंत डॉक्टर को दिखाया जाना चाहिए। वैसे तो आपको तेज बुखार से पीड़ित होते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।”

डॉ. संतोष कुमार का कहना है, ” भले ही आपने टेस्ट नहीं कराया। बुखार आते ही रेस्ट कीजिए, इससे आपके शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। आप यदि इस दौरान काम करते हैं तो प्रतिरक्षण क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसे में रोग बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।”

आप डॉक्टर की सलाह पर, पैरासिटामोल 500 ग्राम या 650 ग्राम, एक दिन में तीन बार ले सकते हैं। इस बीच, आप अपना टेस्ट कराने के लिए सैंपल दे सकते हैं।

आपको डेंगी है तो कोशिश करें आपको मच्छर फिर न काटें

उनकी सलाह है, यदि आपको डेंगी है, तो दिन में मच्छरदानी का प्रयोग करें। मच्छरदानी नहीं है तो पूरे वस्त्र पहनें। यदि आपको डेंगी है तो कोशिश करें कि आपको मच्छर न काटें, यदि आपको मच्छर काटता है तो वो अपने स्लाइवा से आपके शरीर से ब्लड लेकर न जाने कितने लोगों को काटेगा और डेंगी रोग फैलाएगा। ऐसे में खुद को बचाना, आपकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी हैं। खूब पानी पीजिए। ओआरएस पीजिए।

प्लेटलेट्स को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं

एम्स में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार कहते हैं, “प्लेटलेट्स को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है, यदि आपके शरीर में लाल चकत्ते नहीं पड़ रहे हैं या रक्त स्राव नहीं हो रहा है, उल्टी नहीं हो रही है और पेट में दर्द नहीं हो रहा है।”

“डेंगी का नाम सुनते ही, प्लेटलेट्स मरीज के दिमाग में आता है, उनका ध्यान प्लेटलेट्स की ओर जाता है। यह कहना गलत है कि सिर्फ प्लेटलेट्स ही डेंगी का इलाज है। यदि आपको डेंगी है, आप घर पर हैं, बुखार है, आराम कर रहे हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर भी डरने की आवश्यकता नहीं है। यह ध्यान रखने की बात है रक्तस्राव, चकत्ते, पेट में दर्द या फिर कोई क्रोनिक डिजीज तो नहीं है।”

“यह किताब में लिखा है, गाइड लाइन है कि प्लेटलेट्स 10 हजार तक पहुंचते हैं, तब ही हम इसे चढ़ाने की सोचते हैं। हम साधारणतः 20 हजार पर चिंता शुरू कर देते हैं। यदि आप दस हजार पर नहीं रुकते हैं, तो 20 हजार पर हम प्लेटलेट्स चढ़ाने की तैयारी करते हैं।”

“यदि बॉडी में रक्तस्राव हो रहा है, चकत्ते पड़ रहे हैं तो तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें।”

80 से 90 फीसदी मामलों में चार से पांच दिन में बुखार- सिरदर्द ठीक 

एम्स में प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार बताते हैं, अधिकतर केस में यानी 80 से 90 फीसदी में, चार से पांच दिन में खांसी बुखार सरदर्द खुद ठीक हो जाता है। ब्लीडिंग, उल्टी, पेट में तेज दर्द पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डायबिटीज रोगी, कैंसर, बीपी रोगियों, गर्भवती को सावधान रहने की जरूरत है, डरने की आवश्यकता नहीं है। इन लोगों को किसी भी दिक्कत पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पानी सात दिन तक इकट्ठा रखा तो समझो डेंगी का खतरा पैदा हो गया

डेंगी का मच्छर कहीं पर भी इकट्ठा हुए पानी में पैदा होता है। चलते हुए पानी में इसके पनपने की गुंजाइश कम होती है। ताजा पानी भी, अगर सात दिन तक इकट्ठा रहता है तो वहां इस मच्छर के लार्वा पैदा होंगे और सात दिन में यह वयस्क बन जाता है।

यदि आपने डेंगी के मच्छर को शरण दी तो आपको इससे डरना पड़ेगा। डेंगी का खात्मा करने के लिए कहीं पर भी पानी को इकट्ठा नहीं होने दें। अपने घर पर ही नहीं, बल्कि आप जहां रहते हैं यानी पूरी कॉलोनी में, पानी इकट्ठा मत होने दें। इसके खिलाफ जंग में सभी को शामिल होना चाहिए। कहीं कोई निर्माण चल रहा है तो वहां पानी इकट्ठा न होने दीजिए। कूलर, मनी प्लांट, गमले में, टायर, ट्यूब में जमा पानी को तुरंत हटा दीजिए। आपको साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखना होगा।

बकरी के दूध से डेंगू से राहत नहीं, बल्कि रोग बढ़ने की आशंका

प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार बताते है, अपनी मेडिकल प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने पाया कि लोग पुरानी धारणाओं को फॉलो करते हैं। डेंगू से बचने के लिए, ऐसे पदार्थों को सेवन करते हैं, जिसका बाद में उनको खामियाजा भुगतान पड़ता है। बकरी के दूध का कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं है। एलोपैथिक में तो बकरी के दूध से फायदा होने जैसी कोई बात नहीं है। बकरी के दूध से विशेष प्रकार के रोग होने की आशंका रहती है। ऐसा भोजन न करें, जिससे बचाव की जगह दूसरे रोग हो जाएं। सुपाच्य पदार्थों को खाएं। कही हुईं, सुनी हुईं बातों के अनुसार खाद्य पदार्थों को न खाएं।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए सलाह

मां का दूध बच्चे के लिए अमृत के समान है। मां का दूध पीने वाले बच्चों को प्रोटेक्शन मिलता है। डेंगी से बचाने के लिए बच्चों का शरीर खुला न रहे। उनको नेट के भीतर रखा जाए। दिन में सबसे ज्यादा आवश्यकता है। पहले यह बच्चों में अधिक होता था। बच्चों को फुल बांह वाले कपड़े ही पहनाएं।

बुजुर्गों को यदि कोई क्रोनिक डिजीज है। इनको हाइरिस्क ग्रुप माना जाता है। इनको रक्तस्राव होने की आशंका हो सकती है। पहले से ही रोग है तो डेंगी के सीजन में बहुत अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है।

क्या है सेवन प्लस वन मॉडल

डेंगी के खिलाफ जंग के लिए एम्स ऋषिकेश कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन डिपार्टमेंट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने सेवन प्लस वन मॉडल बनाया है, जिसे राज्य में फॉलो किया जा रहा है।

अगर हम सात दिन तक लगातार एक कम्युनिटी में यानी एक बस्ती या कॉलोनी जिसका दायरा लगभग इतना ही होता है या 500 मीटर तक, जहां भी पानी रुका है, उन सभी स्थानों को चिह्नित करके नष्ट करें। अपने घर के साथ दूसरे घरों के लोगों को भी यह करने के लिए प्रेरित करें, तो डेंगी का मच्छर पनप नहीं पाएगा।

डेंगी का मच्छर 400 मीटर तक उड़ सकता है और यह वर्तमान में लार्वा से सात दिन में वयस्क हो जाता है। लार्वा बनने से लेकर वयस्क होने की प्रक्रिया को नष्ट कर दें तो ये मच्छर पैदा ही नहीं होंगे। घरों में रखे कूलर का पानी प्रतिदिन बदलते रहें। एक कूलर में जमा पानी में लगभग एक हजार से अधिक मच्छर पैदा हो सकते हैं।

यदि किसी चम्मच में पानी डालकर छोड़ दिया जाए तो उसमें 50 से सौ मच्छर पैदा हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अंदाजा लगा सकते हैं, आपके आसपास जमा पानी कितने सारे मच्छरों को जन्म देगा।

आपके घर में फ्रिज के कम्प्रेशर के पीछे छोटी सी जगह में पानी जमा होता है। वहां पर,पानी जमा न होने दें।

मनी प्लांट, गमले सहित वो सभी स्ट्रक्चर जहां पानी जमा होता है, वहां से पानी हटा दीजिए।

सात दिन तक इस प्रक्रिया का लगातार पालन करते रहेंगे तो मच्छर पैदा होने का कोई विकल्प मौजूद नहीं रह पाएगा। सात दिन इसलिए, क्योंकि लार्वा से मच्छर बनने तक सात दिन लगते हैं।

आप सात दिन लगातार जमा पानी के स्थानों को नष्ट करेंगे तो इससे आप दो तीन हफ्ते तक अपने इलाके, घर को मच्छर फ्री कर पाएंगे।

वहीं अपने इलाके में स्थानीय निकायों जैसे नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, ग्राम पंचायतों से फॉगिंग कराएं। फॉगिंग से हवा में मौजूद मच्छरों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा और पानी इकट्ठा होने वाले स्थानों को खत्म करने से नीचे मौजूद मच्छर मारे जाएंगे।

एक दिन ऐसा भी आएगा कि मच्छर बनने से पहले ही खत्म होने लगेंगे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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