
Empower Society Internship Uttarakhand: मेघालय और उत्तराखंड के छात्रों ने चकराता और चमोली के गांवों का भ्रमण करके जानी विकास यात्रा
Empower Society Internship Uttarakhand: देहरादून, 17 दिसंबर, 2025ः उत्तराखंड के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए ‘एम्पावर सोसाइटी‘ (Empower Society) द्वारा आयोजित 10 दिवसीय विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत मेघालय और उत्तराखंड के समाजशास्त्र (Sociology) के छात्रों ने चकराता और चमोली के गांवों का भ्रमण किया। इस दल में मेघालय (North East) की 2 छात्राएं और उत्तराखंड के तीन छात्र शामिल हुए।

पीआरए (PRA) और माइक्रो प्लान के जरिए जानी जमीनी हकीकत
Empower Society Internship Uttarakhand: इंटर्नशिप में छात्रों ने Participatory Rural Appraisal – PRA, माइक्रो प्लान तैयार करना और सोशल ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। उन्होंने चमोली के बेमरू गांव में जाकर स्थानीय ग्रामीणों एवं एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) से सीधा संवाद किया और संसाधनों के मानचित्रण (Mapping) के माध्यम से गांव की आर्थिक स्थिति और बुनियादी समस्याओं को समझा। छात्रों ने यह भी जाना कि कैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर ग्रामीण अपनी आजीविका में सुधार कर सकते हैं। साथ ही, पीआरए किसी गांव में संसाधनों के विकास की योजना में सहयोगी होता है।

भ्रमण दल ने महिला स्वयं सहायता समूह से स्थानीय समस्याओं एवं उनके समाधान पर चर्चा की।
खास बातें
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सहभागी: 5 छात्र (मेघालय-2, उत्तराखंड-3)
- प्रमुख गतिविधियां: PRA टूल्स का उपयोग, सोशल ऑडिट, और आजीविका प्रशिक्षण का अध्ययन।
आजीविका संवर्धन और रिंगाल-बांस पौधारोपण पर जोर
Empower Society Internship Uttarakhand: इंटर्नशिप के दौरान छात्रों ने ‘एम्पावर सोसाइटी’ द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि कैसे रिंगाल और बांस जैसे स्थानीय संसाधनों पर आधारित हस्तशिल्प प्रशिक्षण ग्रामीणों के लिए आय का जरिया बन रहा है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे रिंगाल और बांस के प्लांटेशन की तकनीक को भी समझा।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान मास्टर ट्रेनर राजेश लाल ने ग्रामीणों और छात्रों को संबोधित करते हुए कहा: “हमारा उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके अपने संसाधनों के प्रति जागरूक करना है। रिंगाल और बांस हमारे लिए संजीवनी हैं। यदि हम आधुनिक डिजाइन और फिनिशिंग का सही प्रशिक्षण ग्रामीणों को दें, तो स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से हम युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहे हैं।”

सोसाइटी की सचिव मोनादीपा सरमा ने इस पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा: “एम्पावर सोसाइटी का सदैव प्रयास रहा है कि हम स्थानीय कौशल और आधुनिक तकनीक के बीच एक सेतु का कार्य करें। मेघालय और उत्तराखंड के छात्रों का यह समन्वय न केवल अनुभवों का आदान-प्रदान है, बल्कि यह भविष्य के समाजशास्त्रियों को ग्रामीण भारत के और बेहतर विकास के लिए तैयार कर रहा है। हमारा मुख्य फोकस स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पादन और सामुदायिक सशक्तिकरण है, ताकि पलायन जैसी समस्याओं को कम किया जा सके।”













