चूहों का पीछा क्यों करती हैं बिल्लियां

Rajesh Pandey
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क्या आप जानते हैं कि बिल्लियां चूहों का पीछा क्यों करती हैं। इसके पीछे एक चीन की कहानी है। हजारों साल पहले चीन के सम्राट ने 12 साल का राशि चक्र बनाने के लिए जानवरों की दौड़ कराई। दौड़ जीतने वाले 12 जानवरों के नाम से 12 साल का राशि चक्र बनाया जाना था। हर जानवर के नाम पर एक वर्ष का नाम रखा जाना था। दौड़ के लिए सभी जानवरों को आमंत्रित किया गया। 

बिल्ली और चूहे को भी इस रेस में भाग लेना था, लेकिन दोनों सुबह देरी से उठते थे। दौड़ में शामिल होने से छूट न जाएं, इसलिए उन्होंने अपने मित्र बैल से कहा था कि वो उनको सही समय पर नींद से जगा दे। निर्धारित समय से पहले बैल अपने दोस्तों चूहे और बिल्ली के घर पहुंचा और उनको उठाने का प्रयास किया। दौड़ का समय नजदीक आ रहा था, लेकिन चूहा और बिल्ली काफी जगाने के बाद भी नहीं उठ रहे थे। कभी आंखें खोल लेते और फिर करवट बदलकर सो जाते। 

बैल ने सोचा, इनके चक्कर में रहा तो मैं भी दौड़ में शामिल नहीं हो पाऊंगा। उसने दोनों को अपनी पीठ पर लादा और रेस में शामिल हो गया। रेस के अंतिम चरण में नदी को पार करना था। बैल जैसे ही नदी को पार करने लगा, वैसे ही चूहे ने होशियारी दिखाते हुए पीठ पर लदी बिल्ली को धक्का देकर नदी में गिरा दिया और खुद बैल से आगे कूदकर रेस के अंतिम निशान को पार कर लिया। चूहा जानता था कि वह बिल्ली को रेस में कभी नहीं हरा सकता, इसलिए उसने बिल्ली को धक्का देकर गिरा दिया। 

चूहा पहले, बैल दूसरे और बाघ तीसरे नंबर पर आया। बाघ ने भी अन्य जानवरों को धोखा दिया था। उसने निशान के रूप में तैर रहे जानवरों की पीठ पर पंजे रखकर छलांग लगाते हुए नदी को पार किया था। इस तरह 12 वर्ष का चीनी राशि चक्र चूहे से शुरू होता है। उसके बाद बैल, बाघ आते हैं। इनके बाद क्रम से खरगोश, अजगर, सांप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सुअर का नंबर आता है। 

बिल्ली को राशि चक्र में कोई जगह नहीं मिलने का काफी अफसोस हुआ। तब से वह चूहे की दुश्मन बन गई।  बिल्ली थोड़ा सा सतर्क हो जाती तो वह राशि चक्र में पहले नंबर पर होती। कहा जाता है कि बिल्लियां अपने पूर्वज के अपमान का बदला लेने के लिए चूहों का पीछा करती हैं। 

 

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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