लघु कहानीः घोड़ा और गधा

Rajesh Pandey
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बहुत पुरानी बात है। किसी देश में एक बहादुर सिपाही रहता था। उसके पास तेज रफ्तार वाला घोड़ा और मेहनती गधा था। युद्ध के दौरान वह घोड़े को इस्तेमाल करता था और अन्य समय पैसे कमाने के लिए गधे पर सामान ढोता था। गधा घोड़े से ईर्ष्या करने लगा, क्योंकि घोड़ा आमतौर पर आराम का जीवन बिता रहा था। गधा सोचता रहता कि वह कड़ी मेहनत करके मालिक के लिए धन अर्जित करने का काम कर रहा है और घोड़ा शानदार जिंदगी जी रहा है। मालिक इससे स्नेह भी बहुत करता है और उसका ख्याल भी ज्यादा रखा जाता है।

एक दिन सैनिक को  सूचना मिली कि उसके देश का पड़ोसी देश से युद्ध होगा। गधे ने जब यह सुना कि मालिक युद्ध की तैयारी कर रहा है तो उसे बहुत राहत मिली। उसने सोचा कि अब तो घोड़े को युद्ध में लड़ना होगा। यहां खाली समय में वह जीवन का आनंद उठाएगा। यह कहकर गधे ने घोड़े को चिढ़ाना शुरू कर दिया।

दूसरे दिन ही सैनिक को एक और संदेश मिला कि युद्ध नहीं होगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच संधि हो गई है। सैनिक ने गधे को माल ढोने के लिए दूर स्थित शहर भेज दिया। गधा सोचने लगा कि दूसरों को चिढ़ाना और दुर्व्यवहार करना अच्छी बात नहीं है। जिस बात को लेकर मैं उसे चिढ़ा रहा था, वह मेरे साथ ही घटित हो गई।

(अनुवादित)

 

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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