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Reading: अपशब्दों में भी होती है भला करने वाली ताकत
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NEWSLIVE24x7 > Blog > Blog Live > अपशब्दों में भी होती है भला करने वाली ताकत
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अपशब्दों में भी होती है भला करने वाली ताकत

Rajesh Pandey
Last updated: August 1, 2021 8:21 pm
Rajesh Pandey
7 years ago
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शब्दों में गजब की ताकत है, भले ही वो किसी काे तिरस्कृत करने के लिए या फिर पुरस्कृत करने के लिए हों। यह उस पर निर्भर करता है, जो सुन रहा है। मैं यह बात हर उस माहौल की कर रहा हूं, जहां कुछ लोग किसी का भी नुकसान करने के लिए शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

ये लोग चाहते हैं कि उनके शब्दों से उत्तेजना का माहौल बने और उनका टारगेट अपना नुकसान कर बैठे। वो खुद में कमजोर लोग होते हैं, जो किसी का भी, कहीं भी अपमान करना अपनी ड्यूटी या दिनचर्या का हिस्सा समझते हैं।

इनकी धारणा रहती है कि किसी को भी लज्जित करके उनको वाहवाही मिलेगी और लोग उनसे डरना सीख जाएंगे। मेरा ऐसा मानना है कि कोई भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हां, कुछ दिक्कतें जरूर आती हैं, लेकिन दिल और दिमाग से मजबूत लोगों का कुछ नहीं बिगड़ता।

जज्बा होना चाहिए, व्यक्ति फिर वहीं मुकाम हासिल हो जाता है, जिसे पीछे छोड़ दिया था। कहते हैं- नीयत साफ है तो नियति शानदार होगी।

खैर, अपनी बात पर आता हूं। मेरा मानना है कि किसी भी तरह के शब्द में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा होती है। मैंने पहले भी लिखा था कि तिरस्कार करने वाले को जवाब दिया जाना चाहिए, लेकिन ठीक उसी के लहजे वाली प्रतिक्रिया से नहीं।

अगर, हमने भी उसी का लहजा अपना लिया, तो उसमें और हमारे में कोई अंतर नहीं रह जाएगा और फिर कलह- विवाद के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। तिरस्कार या उत्तेजना के लिए कहे जाने वाले शब्दों से निकली ऊर्जा काे हासिल करने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन केवल इसके उजले पक्ष यानि सकारात्मकता को ग्रहण करें। मैं यह सब अपने अनुभवों के आधार पर कह रहा हूं।

आप कहेंगे कि अपशब्दों में सकारात्मक ऊर्जा कहां होती है। मेरा मानना है कि यहां आप सही नहीं हैं। इसको पहचानना होगा। आप उसी समय ठान लीजिए कि आपका मुकाम अपशब्द कहने वाले से कहीं ऊपर है और उस पर जवाबी प्रतिक्रिया के लिए पैदा होने वाले गुस्से की दिशा बदलकर उसको अपना लक्ष्य हासिल करने में लगा दीजिए।

सच मानिये, आपका यह गुस्सा सकारात्मक ऊर्जा में तब्दील होते ही आपकी ताकत बन जाएगा और जीवन में सब कुछ सकारात्मक होगा। यह तय मानिये कि आप अपने लक्ष्य की ओर दोगुनी गति से बढ़ रहे होंगे।

अगर लक्ष्य पाने के लिए प्रयास कहीं कम पड़ जाएं, तो यह सकारात्मक ऊर्जा बहुत काम आएगी, जो किसी के अपशब्दों से हासिल हुई है। आप सफल हो गए तो आपको अपमानित करने वाला एक दिन खुद लज्जित होता दिखेगा। यह ठीक किसी भी लकीर को छोटा करने के लिए बड़ी लकीर खींचने जैसा काम है।

अगर, अपशब्दों से उत्तेजित होकर प्रतिक्रिया, जवाबी हमला करने या अपशब्दों वाली ही होगी, तो नुकसान अपना ही होना है। ऐसे में हम अपने किसी भी लक्ष्य काे हासिल नहीं कर पाएंगे।

एक बात साफ है कि अपमानित करने वाले व्यक्ति को जवाब देने मात्र से ही हम उसके लेवल पर आकर खड़े हो जाते हैं।

अगर जवाब नहीं देते हैं तो हमारा स्तर उससे कहीं ऊंचा हो जाता है। यह सौ फीसदी सही बात है,क्योंकि मैं भी इस अनुभव से गुजरकर खुद को साबित करने पर तुला हूं। मैं जानता हूं कि मेरे प्रयासों में 50 फीसदी योगदान आज उन लोगों को भी है, जिन्होंने मुझे गुस्सा दिलाया। इसके लिए मैं इन लोगों को धन्यवाद कहते हुए उनका आभार जताता हू्ं।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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