शिक्षा दुनिया को बदलने की अपार क्षमता वाला एक ताकतवर औजार है, लेकिन अगर लोगों को इसका एहसास ही नहीं हो तो हम क्या करें? इफ्फी-52 में भारतीय पैनोरमा खंड की फीचर फ़िल्म श्रेणी में प्रदर्शित ‘बूम्बा राइड’ एक ऐसी फ़िल्म है, जो हमारी शिक्षा प्रणाली का स्वाभाविक चित्रण करती है, खासकर हमारे देश के कुछ ग्रामीण हिस्सों में शिक्षा की स्थिति का।
‘बूम्बा राइड’ : एक ऐसे स्कूल की कहानी जहां एक ही छात्र है, वो भी स्कूल नहीं जाना चाहता…

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140
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