बागवानी फसलों के लिए नई पॉलीहाउस प्रौद्योगिकी

Rajesh Pandey

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई), दुर्गापुर के निदेशक डॉ. (प्रो.) हरीश हिरानी ने पंजाब के लुधियाना में “नेचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस फैसिलिटी” का उद्घाटन किया और “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस” की आधारशिला रखी।

प्रोफेसर हिरानी ने प्रौद्योगिकी के बारे में बताया कि किसानों को अत्यधिक या अपर्याप्त ठंड, गर्मी, बारिश, हवा और अपर्याप्त वाष्पोत्सर्जन से जुड़े अन्य कारकों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

साथ ही, भारत में कीटों के कारण भी वर्तमान में लगभग 15 प्रतिशत फसल का नुकसान होता है तथा यह नुकसान बढ़ सकता है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन कीटों के खिलाफ पौधों की रक्षा प्रणाली को कम करता है। पारंपरिक पॉलीहाउस से कुछ हद तक इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

पारंपरिक पॉलीहाउस में मौसम की विसंगतियों और कीटों के प्रभाव को कम करने के लिए एक स्थिर छत होती है। हालांकि, छत को ढंकने के अब भी नुकसान हैं, जो कभी-कभी अत्यधिक गर्मी और अपर्याप्त प्रकाश (सुबह-सुबह) का कारण बनते हैं।

इसके अलावा, वे कार्बन डाईऑक्साइड, वाष्पोत्सर्जन और जल तनाव के अपर्याप्त स्तर के लिहाज से भी संदेवनशील होते हैं। खुले क्षेत्र की स्थितियों और पारंपरिक पॉलीहाउस स्थितियों का संयोजन भविष्य में जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिहाज से एक ज्यादा बेहतर तरीका है।

डॉ. हरीश हिरानी ने बताया कि केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमईआरआई) एक्सटेंशन सेंटर लुधियाना में एक “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी” स्थापित कर रहा है।

हर मौसम में काम करने लिहाज से उपयुक्त इस प्रतिष्ठान में ऑटोमैटिक रिट्रैक्टेबल रूफ (स्वचालित रूप से खुलने-बंद होने वाली छत) होगा, जो पीएलसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए कंडीशनल डेटाबेस से मौसम की स्थिति और फसल की जरूरतों के आधार पर संचालित होगा।

इस प्रौद्योगिकी से किसानों को मौसमी और गैर-मौसम वाली दोनों ही तरह की फसलों की खेती करने में मदद मिलेगी। यह पारंपरिक खुले मैदानी सुरंगों और प्राकृतिक रूप से हवादार पॉली हाउस की तुलना में इष्टतम इनडोर सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों का निर्माण करके उच्च उपज, मजबूत और उच्च शेल्फ-लाइफ उपज प्राप्त कर सकता है, और साथ ही यह जैविक खेती के लिए व्यवहार्य प्रौद्योगिकी भी है।

इस प्रौद्योगिकी के विकास में लगे अनुसंधान दल का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक जगदीश माणिकराव ने बताया कि रिट्रैक्टेबल रूफ का उपयोग सूर्य के प्रकाश की मात्रा, गुणवत्ता एवं अवधि, जल तनाव, आर्द्रता, कार्बन डाई-ऑक्साइड और फसल एवं मिट्टी के तापमान के स्तर को बदलने के लिए किया जाएगा।

वहीं फार्म मशीनरी एंड प्रिसिजन एग्रीकल्चर के प्रमुख और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप राजन ने बताया कि यह प्रतिष्ठान वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और फसल के आधार पर पॉलीहाउस को स्वचालित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने की प्रक्रिया में है।

यह मौसम की जरूरतों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर आधारित होगा तथा  किसान अनुकूल यूजर इंटरफेस प्रदान करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि नई पॉलीहाउस प्रणाली के लाभों पर वैज्ञानिक प्रयोगात्मक आंकड़े की कमी है, इसलिए फसल उत्पादन और उपज की गुणवत्ता की तुलना करने के लिए प्राकृतिक रूप से हवादार पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉली हाउस दोनों में बागवानी फसलों की खेती की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नैचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस को साथ-साथ स्थापित करके, हम जरूरी वैज्ञानिक आंकड़ा प्राप्त कर सकते हैं और परिणामों का विश्लेषण करके उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। इस प्रतिष्ठान का उपयोग किसानों के लिए एक प्रदर्शनी खेत के रूप में किया जाएगा।

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वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई), दुर्गापुर के निदेशक डॉ. (प्रो.) हरीश हिरानी ने पंजाब के लुधियाना में “नेचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस फैसिलिटी” का उद्घाटन किया और “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस” की आधारशिला रखी।प्रोफेसर हिरानी ने प्रौद्योगिकी के बारे में बताया कि किसानों को अत्यधिक या अपर्याप्त ठंड, गर्मी, बारिश, हवा और अपर्याप्त वाष्पोत्सर्जन से जुड़े अन्य कारकों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।साथ ही, भारत में कीटों के कारण भी वर्तमान में लगभग 15 प्रतिशत फसल का नुकसान होता है तथा यह नुकसान बढ़ सकता है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन कीटों के खिलाफ पौधों की रक्षा प्रणाली को कम करता है। पारंपरिक पॉलीहाउस से कुछ हद तक इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है।पारंपरिक पॉलीहाउस में मौसम की विसंगतियों और कीटों के प्रभाव को कम करने के लिए एक स्थिर छत होती है। हालांकि, छत को ढंकने के अब भी नुकसान हैं, जो कभी-कभी अत्यधिक गर्मी और अपर्याप्त प्रकाश (सुबह-सुबह) का कारण बनते हैं।इसके अलावा, वे कार्बन डाईऑक्साइड, वाष्पोत्सर्जन और जल तनाव के अपर्याप्त स्तर के लिहाज से भी संदेवनशील होते हैं। खुले क्षेत्र की स्थितियों और पारंपरिक पॉलीहाउस स्थितियों का संयोजन भविष्य में जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिहाज से एक ज्यादा बेहतर तरीका है।डॉ. हरीश हिरानी ने बताया कि केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएमईआरआई) एक्सटेंशन सेंटर लुधियाना में एक “रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस टेक्नोलॉजी” स्थापित कर रहा है।हर मौसम में काम करने लिहाज से उपयुक्त इस प्रतिष्ठान में ऑटोमैटिक रिट्रैक्टेबल रूफ (स्वचालित रूप से खुलने-बंद होने वाली छत) होगा, जो पीएलसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए कंडीशनल डेटाबेस से मौसम की स्थिति और फसल की जरूरतों के आधार पर संचालित होगा।इस प्रौद्योगिकी से किसानों को मौसमी और गैर-मौसम वाली दोनों ही तरह की फसलों की खेती करने में मदद मिलेगी। यह पारंपरिक खुले मैदानी सुरंगों और प्राकृतिक रूप से हवादार पॉली हाउस की तुलना में इष्टतम इनडोर सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों का निर्माण करके उच्च उपज, मजबूत और उच्च शेल्फ-लाइफ उपज प्राप्त कर सकता है, और साथ ही यह जैविक खेती के लिए व्यवहार्य प्रौद्योगिकी भी है।इस प्रौद्योगिकी के विकास में लगे अनुसंधान दल का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक जगदीश माणिकराव ने बताया कि रिट्रैक्टेबल रूफ का उपयोग सूर्य के प्रकाश की मात्रा, गुणवत्ता एवं अवधि, जल तनाव, आर्द्रता, कार्बन डाई-ऑक्साइड और फसल एवं मिट्टी के तापमान के स्तर को बदलने के लिए किया जाएगा।वहीं फार्म मशीनरी एंड प्रिसिजन एग्रीकल्चर के प्रमुख और वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप राजन ने बताया कि यह प्रतिष्ठान वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और फसल के आधार पर पॉलीहाउस को स्वचालित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करने की प्रक्रिया में है।यह मौसम की जरूरतों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर आधारित होगा तथा  किसान अनुकूल यूजर इंटरफेस प्रदान करेगा।उन्होंने यह भी बताया कि चूंकि नई पॉलीहाउस प्रणाली के लाभों पर वैज्ञानिक प्रयोगात्मक आंकड़े की कमी है, इसलिए फसल उत्पादन और उपज की गुणवत्ता की तुलना करने के लिए प्राकृतिक रूप से हवादार पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉली हाउस दोनों में बागवानी फसलों की खेती की जाएगी।उन्होंने कहा कि नैचुरली वेंटिलेटेड पॉलीहाउस और रिट्रैक्टेबल रूफ पॉलीहाउस को साथ-साथ स्थापित करके, हम जरूरी वैज्ञानिक आंकड़ा प्राप्त कर सकते हैं और परिणामों का विश्लेषण करके उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। इस प्रतिष्ठान का उपयोग किसानों के लिए एक प्रदर्शनी खेत के रूप में किया जाएगा।
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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