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अधिकारी 15 दिसंबर तक पूरा करें स्वरोजगार योजनाओं के ऋणों का लक्ष्यः सीएम

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ष विभिन्न योजनाओं के तहत लोन देने के लक्ष्य को 15 दिसम्बर 2021 तक पूरा किया जाए।

संबंधित विभागीय अधिकारी एवं बैंकर्स आपसी समन्वय स्थापित कर हर हाल में लक्ष्य पूर्ण करें। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न योजनाओं के तहत जो लोन दिए जा रहे हैं, उनकी प्रत्येक सप्ताह प्रगति की समीक्षा की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं की विभिन्न माध्यमों से लोगों को जानकारी दी जाए। विभिन्न योजनाओं के तहत जो लोन दिए जा रहे हैं, उनकी आम जन को जानकारी हो। इसके लिए जिलाधिकारी एवं बैंक के अधिकारी अभियान चलाएं।

एक ही जगह पर लोगों की लोन संबंधी समस्या का समाधान हो, जिला स्तरीय अधिकारी एवं बैंक के अधिकारी कैंपों के माध्यम से जन समस्याओं का समाधान करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 दिसम्बर 2021 तक निर्धारित लक्ष्य पूर्ण करने के साथ ही जिन योजनाओं में अधिक आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, लक्ष्य से अधिक लोन स्वीकृत करने के लिए प्रयास किए जाएं। अनावश्यक आपत्तियां लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाए।

बैंकों द्वारा आवेदन प्राप्त होने के एक सप्ताह के अन्दर लोन की सम्पूर्ण कार्यवाही की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि योजनाओं का लाभ लोगों को समय पर मिले। अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने एनआरएलएम, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम स्टे, स्पेशल कम्पोनेंट प्लान, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, एनयूएलएम, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन प्रोग्राम, स्टैंड अप इंडिया, पीएम स्वनिधि, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की प्रगति की समीक्षा की।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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