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चेंज मेकर्सः उत्तराखंड की बसंती देवी और पूनम नौटियाल की प्रेरणादायक कहानियों पर लघु फिल्में

केंद्रीय मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स के सहयोग से बनाई लघु वीडियो श्रृंखला 'आजादी की अमृत कहानी' लॉंच की

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने एक लघु वीडियो श्रृंखला ‘आजादी की अमृत कहानी’ को लॉन्च किया, जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के सहयोग से बनाया है। मंत्रालय और नेटफ्लिक्स ने वीडियो के पहले सेट का निर्माण करने के लिए सहयोग किया है, जिसमें देश की सात महिला चेंज मेकर्स का वर्णन है, जिन्होंने रुढ़िवादिता को तोड़ने वाले अपने अनुभव को साझा किया है। इन दो मिनट की लघु फिल्मों की शूटिंग देश के विभिन्न स्थानों पर की गई और इनका कथानक प्रसिद्ध अभिनेत्री नीना गुप्ता ने सुनाया है।

बदलाव लाने वाली इन सात हस्तियों में सुश्री पूनम नौटियाल शामिल हैं, जो एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं और उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में मीलों पैदल चलकर सबको को टीका लगाती हैं। डॉ. टेसी थॉमस भारत में मिसाइल परियोजना का नेतृत्व करने वाली पहली महिला वैज्ञानिक हैं। सुश्री तन्वी जगदीश, भारत की पहली प्रतिस्पर्धी महिला स्टैंड-अप पैडलबोर्डर हैं। सुश्री आरोही पंडित विश्व की सबसे युवा और पहली महिला पायलट हैं, जिन्होंने लाइट स्पोर्ट विमान में अकेले अटलांटिक महासागर व प्रशांत महासागर को पार किया है।

आज सुश्री बसंती देवी, सुश्री अंशु और सुश्री हर्षिनी की विशेषता वाले तीन वीडियो और इस श्रृंखला में एक झलक पेश करने वाला एक ट्रेलर आज जारी किया गया। इन अनुकरणीय महिलाओं पर प्रकाश डालने वाले और इन्हें सम्मानित करने पर ध्यान देने के साथ-साथ इन तीनों चेंज मेकर्स को अनुराग ठाकुर ने सम्मानित किया।

महिला चेंज मेकर्स पिथौरागढ़ की पद्म पुरस्कार विजेता पर्यावरणविद् सुश्री बसंती देवी, जिन्हें कोसी नदी को पुनर्जीवित करने में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता सुश्री अंशु जामसेनपा को वर्ष 2017 में पांच दिनों में दो बार माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली महिला होने का गौरव प्राप्त है। सुश्री हर्षिनी कान्हेकर भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं, इस अवसर पर उपस्थित रहीं।

कोसी नदी की रक्षक बसंती देवी की कहानी

इस दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, भारत में आजादी का विचार महिला मुक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। इस बारे में उन्होंने कहा कि आजादी या स्वतंत्रता शब्द उन महिलाओं के लिए व्यापक अर्थ रखता है, जिन्हें समाज में रूढ़िवाद और वर्जनाओं के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की मुक्ति समाज में स्वतंत्रता की स्थिति की पहचान है।

इस सहयोग के बारे में ठाकुर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारतीयों की प्रेरणादायक कहानियों को सबके सामने लाना है, क्योंकि कहानियां अधिक से अधिक लोगों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेंगी और सशक्त बनाएंगी।

माउंट एवरेस्ट की विजेता अंशु जामसेनपा की कहानी

उन्होंने कहा कि यह एक दीर्घकालिक साझेदारी है, जिसमें विभिन्न विषयों और विविध कहानियों पर प्रकाश डाला जाएगा। “नेटफ्लिक्स महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण और सतत विकास तथा महत्व के अन्य दिनों सहित विभिन्न विषयों पर पच्चीस वीडियो का निर्माण करेगा। नेटफ्लिक्स मंत्रालय के लिए दो मिनट की 25 लघु फिल्मों का निर्माण करेगा, जिन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा और दूरदर्शन नेटवर्क पर प्रसारित किया जाएगा।

ठाकुर ने इस साझेदारी के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेटफ्लिक्स और मंत्रालय भारत में फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं और मास्टर कक्षाओं का आयोजन करना जारी रखेंगे, ताकि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विभिन्न विषयों पर प्रेरक सामग्री का निर्माण किया जा सके।

उन्होंने यह घोषणा की कि “नेटफ्लिक्स और मंत्रालय पोस्ट-प्रोडक्शन, वीएफएक्स, एनिमेशन, संगीत निर्माण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके एक रचनात्मक इकोसिस्टम विकसित करने के लिए साझेदारी करेंगे और ये कार्यक्रम वास्तविक एवं वर्चुअल माध्यम से आयोजित किए जाएंगे।

जीवन के लिए आग से लड़ने वाली साहसी हर्षिनी कान्हेकर की कहानी

उन्होंने मंच पर उपस्थित तीन महिलाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इनकी कहानियां देशभर के लोगों को प्रेरित करेंगी। उन्होंने यह भी उम्मीद जाहिर की कि इस सहयोग के बाद विश्व के निर्माता न केवल भारतीय दर्शकों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए फिल्में और वृत्तचित्र बनाने के लिए भारत आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय और नेटफ्लिक्स के बीच साझेदारी केवल शुरुआत ही है जो आजादी का अमृत महोत्सव तक ही सीमित नहीं होगी।

इससे पहले मंत्रालय में सचिव अपूर्व चंद्र ने उद्घाटन भाषण में सूचना और प्रसारण मंत्रालय और नेटफ्लिक्स के बीच समन्वय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं ने एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए और ये तीन वीडियो इस साझेदारी के तहत बनाए वीडियो का पहला सेट है। उन्होंने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम में एक लंबे समय तक चलने वाली श्रृंखला और दुनिया को बताई जाने वाली कहानियों की विशेषता वाला एक मजबूत सहयोग विचाराधीन है।

इस अवसर पर नेटफ्लिक्स, ग्लोबल टीवी की प्रमुख सुश्री बेला बजरियाने कहा कि भारत दुनिया के सबसे जीवंत मनोरंजन उद्योगों में से एक है और भारत इंटरनेट मनोरंजन समय में उल्लेखनीय रूप से अच्छी स्थिति में है। उन्होंने यह भी कहा कि नेटफ्लिक्स ऐसे समय का हिस्सा बनने के लिए बहुत उत्साहित है, जब भारत से कहानियां दुनियाभर में भेजी जा रही हैं और सर्वश्रेष्ठ भारतीय कहानियों की वैश्विक स्तर पर खोज की जा रही है और पसंद भी किया जा रहा है।

‘आजादी की अमृत कहानियां’ के वीडियो मंत्रालय और नेटफ्लिक्स के विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों पर उपलब्ध होंगे, साथ ही दूरदर्शन नेटवर्क पर प्रसारित होंगे। उन्हें जल्द ही गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, अंग्रेजी और मलयालम जैसी अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहानियां पूरे देश में लोगों द्वारा देखी और सुनी जा सकें।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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