
Graca Machel: मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल को ‘इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025’, जानें उनके बारे में
Graca Machel: नई दिल्ली, 21 जनवरी, 2026ः मोजाम्बिक की स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व मंत्री और विश्व प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल (Graça Machel) को वर्ष 2025 के ‘इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार’ के लिए चुना गया है। ‘इंदिरा गांधी स्मारक न्यास’ इस सम्मान की घोषणा करता है। अंतरराष्ट्रीय जूरी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को इस सम्मान का आधार बनाया है।
Graca Machel: 17 अक्टूबर 1945 को मोजाम्बिक के एक ग्रामीण इलाके में ग्रासा सिम्बिने के रूप में जन्मी माशेल की यात्रा प्रेरणादायक रही है।उन्होंने मेथोडिस्ट मिशन स्कूलों से पढ़ाई की और बाद में लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल से जर्मन भाषा के अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त की। यहीं से उनके भीतर स्वतंत्रता और राजनीति के प्रति चेतना जागी।
1973 में स्वदेश लौटकर वह ‘मोजाम्बिक लिबरेशन फ्रंट’ से जुड़ीं और आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने एक शिक्षक के रूप में भी योगदान दिया।
शिक्षा मंत्री के रूप में ऐतिहासिक सुधार
1975 में आजादी के बाद वह मोजाम्बिक की पहली शिक्षा और संस्कृति मंत्री बनीं। उनके कार्यकाल में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षा में क्रांति आई। छात्रों की भागीदारी 40% से बढ़कर 90% से अधिक हो गई। लड़कियों की भागीदारी को 75% तक पहुँचाने का श्रेय उन्हें ही जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘माशेल रिपोर्ट’ का प्रभाव
Graca Machel: 1990 के दशक में उन्होंने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई। 1996 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए ‘द इम्पैक्ट ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट ऑन चिल्ड्रन’ नाम से एक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर दुनिया का नजरिया बदल दिया। इस कार्य के लिए उन्हें 1997 में संयुक्त राष्ट्र का नैनसेन शरणार्थी पुरस्कार और ब्रिटेन का मानद डेम कमांडर सम्मान मिला।
संस्थाएं और सामाजिक परिवर्तन
ग्रासा माशेल ने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं के माध्यम से मानवता की सेवा की है:
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ग्रासा माशेल ट्रस्ट (2010): यह ट्रस्ट महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन पर केंद्रित है।
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द एल्डर्स और गर्ल्स नॉट ब्राइड्स: इन अंतरराष्ट्रीय समूहों के माध्यम से वह बाल विवाह और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर काम कर रही हैं।
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जिजिले इंस्टीट्यूट: बच्चों के विकास के लिए उन्होंने इस संस्थान की शुरुआत की।
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वैश्विक भूमिका: वह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) सलाहकार समूह की सदस्य और मंडेला इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट स्टडीज की अध्यक्ष भी हैं।
सम्मान और जूरी का निर्णय
2018 में उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। जूरी के अनुसार, ग्रासा माशेल ने लाखों लोगों को एक न्यायपूर्ण और समान दुनिया बनाने की प्रेरणा दी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कठिन परिस्थितियों में किए गए उनके मानवीय कार्यों के कारण ही उन्हें इस वर्ष का इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार दिया जा रहा है।- Source: DDNews













