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True Value Accounting in Uttarakhand Agriculture: खेती-किसानी के ‘असली फायदे’ पहचानने के लिए देहरादून में बड़ी बैठक

Rajesh Pandey
Last updated: January 19, 2026 6:54 pm
Rajesh Pandey
3 months ago
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True Value Accounting in Uttarakhand Agriculture: देहरादून, 19 जनवरी 2026: क्या खेती का मतलब सिर्फ फसल उगाना और बाजार में बेचना ही है? वैज्ञानिकों का मानना है कि खेती इससे कहीं बढ़कर है। जब किसान खेत में काम करते हैं, तो वो हवा को शुद्ध रखने, पानी बचाने और जमीन को उपजाऊ बनाने में भी मदद करते हैं। इसी बात को आर्थिक नीतियों में शामिल करने के लिए आज देहरादून में एक बड़ी बैठक हुई। इसी ‘ट्रू वैल्यू’ पर मंथन के लिए सोमवार को देहरादून के भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC) में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने मंथन किया।

Contents
बैठक के तीन प्रमुख तकनीकी सत्रबैठक की महत्वपूर्ण बातें:

True Value Accounting in Uttarakhand Agriculture: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के सहयोग से एक खास प्रोजेक्ट चल रहा है। इसका मकसद यह है कि किसान जब खेती करते हैं, तो वो केवल फसल नहीं उगाते, बल्कि प्रकृति की भी रक्षा करते हैं। सरकार अब ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जिससे यह पता चल सके कि उत्तराखंड के पहाड़ों और मैदानों में की जा रही खेती से पर्यावरण को कितना लाभ मिल रहा है।

True Value Accounting in Uttarakhand Agriculture: इस खास कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR), मोदीपुरम ने किया। इसमें उत्तराखंड के तीन बड़े संस्थानों— जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (अल्मोड़ा), भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (देहरादून) और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (अल्मोड़ा) ने सहयोग किया। इस बैठक में देश-विदेश के 20 से ज्यादा संस्थानों के 100 से अधिक विशेषज्ञों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर इस बात पर मंथन किया कि खेती से हमें जो मुफ्त सुविधाएं मिलती हैं—जैसे शुद्ध हवा, साफ पानी और उपजाऊ मिट्टी—उन्हें सरकारी नीतियों और आर्थिक फैसलों में कैसे शामिल किया जाए ताकि खेती और पर्यावरण दोनों को फायदा हो।

बैठक के तीन प्रमुख तकनीकी सत्र

परामर्श बैठक को तीन मुख्य विषयों में विभाजित किया गया था।

  1. इकोनॉमिक टूल के रूप में TVA: आर्थिक निर्णयों और नीतियों में प्रकृति के मूल्यों को शामिल करना।

  2. सिनेरियो सेटिंग: उत्तराखंड के विशिष्ट भौगोलिक संदर्भ में संकेतकों (Indicators) का चयन।

  3. मेथोडोलॉजी रिव्यू: पूंजी अनुमान और एकीकरण के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का तकनीकी परीक्षण।

तकनीकी सत्रों का समन्वय डॉ. मेराज आलम अंसारी (IIFSR), इंजीनियर हिमांशु जोशी (GBPNIHE), डॉ. रमन जीत सिंह (IISWC) और डॉ. प्रकाश चंद्र घसाल (VPKAS) की टीम ने किया। समापन सत्र में उत्तराखंड के पर्वतीय कृषि संदर्भ में ‘ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग’ (TVA) फ्रेमवर्क को पायलट स्तर पर लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परामर्श बैठक क्षेत्रीय कृषि नीतियों में ‘पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं’ के मूल्यांकन को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

बैठक की महत्वपूर्ण बातें:

  • फोकस जिले: फिलहाल अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार जिलों पर खास ध्यान दिया गया है।

  • प्रकृति का हिसाब-किताब: विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कैसे खेती में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, पानी और सामाजिक मेहनत का सही मूल्यांकन किया जाए ताकि सरकार भविष्य में बेहतर नीतियां बना सके।

  • कौन शामिल हुए: उत्तराखंड के प्रमुख सचिव योजना आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. के. रविचंद्रन, निदेशक, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल, डॉ. भानु पिंगले, IFS, CASFOS शामिल हुए। उद्घाटन स्वागत भाषण डॉ. सुनील कुमार, निदेशक, ICAR–IIFSR ने दिया। डॉ. एम. मधु (निदेशक, ICAR–IISWC), डॉ. लक्ष्मी कांत (ICAR–VPKAS), डॉ. के. रविचंद्रन (निदेशक, IIFM, भोपाल), और Reuben Gergan परियोजना प्रबंधक, UNEP TEEB AgriFood) ने सत्र संबंधी टिप्पणियां दीं।

आम किसान को क्या होगा फायदा?

अगर यह ‘असली वैल्यू’ (True Value) तय हो जाती है, तो भविष्य में सरकार उन किसानों को विशेष प्रोत्साहन या मदद दे सकती है जो पर्यावरण को बचाते हुए खेती कर रहे हैं (जैसे जैविक या प्राकृतिक खेती करने वाले)। इससे पहाड़ी खेती को नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी।

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TAGGED:Ecosystem ServicesICAR-IISWC DehradunNatural Capital Valuation.Sustainable Food SystemsTrue Value AccountingUNEP TEEB AgriFoodUttarakhand agriculture
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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