
Weekend catch-up sleep: वॉशिंगटन: किशोरों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हुए एक बड़े शोध में यह सामने आया है कि वीकेंड पर देर तक सोकर हफ्ते भर की नींद की कमी को पूरा करना (कैच-अप स्लीप), डिप्रेशन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन और न्यूयॉर्क अपस्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि 16 से 24 वर्ष के जो युवा सप्ताहांत में अपनी नींद पूरी करते हैं, उनमें अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षणों की संभावना उन लोगों की तुलना में 41 प्रतिशत कम होती है जो वीकेंड पर भी कम सोते हैं।
Highlights
-
वीकेंड पर देर तक सोना (फायदेमंद): अगर आप हफ्ते भर कम सो पाए हैं और शनिवार-रविवार को देर तक सोकर उसकी भरपाई कर लेते हैं, तो आप डिप्रेशन से काफी हद तक बच सकते हैं। इससे मानसिक तनाव का खतरा लगभग आधा (41%) कम हो जाता है।
-
बहुत कम या बहुत ज्यादा सोना (नुकसानदेह): अगर आप जरूरत से कम सोते हैं या बहुत ज्यादा सोते हैं, तो डिप्रेशन का खतरा दोगुने से भी ज्यादा (105%) बढ़ जाता है। यानी नींद का संतुलन बिगड़ना दिमाग के लिए खतरनाक है।
-
सोने का गलत समय: अगर आपके सोने और जागने का समय बहुत ज्यादा बिगड़ा हुआ है (जैसे बहुत जल्दी सो जाना या बहुत देर रात तक जागना), तो यह मानसिक सेहत के लिए सबसे बुरा है। इससे डिप्रेशन का खतरा 130% यानी सवा दो गुना बढ़ जाता है।
-
वजन और मोटापा: रिसर्च यह भी कहती है कि शारीरिक रूप से फिट न होना भी मन को उदास करता है। अगर वजन ज्यादा है, तो डिप्रेशन का खतरा 92% और अगर मोटापा बहुत ज्यादा है, तो यह खतरा 112% तक बढ़ जाता है।
Weekend catch-up sleep:‘जर्नल ऑफ एफेक्टिव डिसऑर्डर’ में प्रकाशित यह अध्ययन बताता है कि शैक्षणिक दबाव, सामाजिक गतिविधियों और नौकरियों के कारण किशोरों में ‘sleep debt’ यानी नींद का कर्ज जमा हो जाता है। शोधकर्ता मिलिंडा केसमेंट के अनुसार, हालांकि हर दिन 8 से 10 घंटे की नियमित नींद आदर्श है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में वीकेंड पर अतिरिक्त नींद एक “सुरक्षा कवच” की तरह काम करती है।
Weekend catch-up sleep: वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि किशोरावस्था में जैविक रूप से ‘सर्केडियन रिदम‘ (शरीर की आंतरिक घड़ी) बदल जाती है, जिससे युवा स्वाभाविक रूप से ‘नाइट आउल’ बन जाते हैं और उन्हें रात में जल्दी नींद नहीं आती। यह प्राकृतिक बदलाव अक्सर स्कूल के जल्दी शुरू होने वाले समय से टकराता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरों को वीकेंड पर देर तक सोने से रोकना नहीं चाहिए, क्योंकि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को स्थिर रखने का एक प्रभावी तरीका है।













