कब टूटेंगी ये वर्जनायें

Rajesh Pandey

कब टूटेंगी ये वर्जनायें                                                     

अनीता मैठाणी

जो चस्पा कर दी गयी हैं उसके जन्म के साथ                           

जाने किसने

क्या

जब इस मिथक से हटकर कुछ करने की सोचती हैं

हममें से ही कुछ तो हममें से ही कुछ उसे

टटोलती हैं शक-ओ-सुबह से!

मन में एक लडखड़ाता सा विश्वास

या यूं कहें अविश्वास लिए

कि- क्या ये कर पायेगी

तब ये नहीं हो पाता हमसे कि

हम सब साथ दें चल पड़ें अपना नहीं तो

उसका ही साथ दें जो कर रही है ये प्रयास कि

टूटे वो वर्जनायें

जिसे हम अब और नहीं ढो सकते।

हाँ ढोना ही नहीं चाहते।

  •  अनीता मैठाणी

 

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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