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उत्तराखंडः प्रतियोगी परीक्षार्थियों को रोडवेज बसों में आधा किराया ही देना होगा

राज्य सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री धामी ने की घोषणा

देहरादून। उत्तराखंड सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग से प्रकाशित विकास पुस्तिका ‘‘एक साल नई मिसाल’’ का विमोचन किया और ग्राम तरला नागल में बनने वाले सिटी पार्क का भी शिलान्यास किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 16 घोषणाएं की, जिनमें प्रमुख रूप से राज्य में मुख्यमंत्री प्रतियोगी परीक्षार्थी परिवहन योजना शामिल है। इसके तहत परीक्षाओं में भाग लेने वाले परीक्षार्थियों को उत्तराखंड में आने-जाने के लिए परिवहन निगम की बसों में किराये में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, दिवालीखाल से गैरसैंण तक सड़क का चौड़ीकरण किया जाएगा।

उत्तराखंड के लोकपर्वों उत्तरायणी, फूलदेई, हरेला, ईगास, बूढ़ी दिवाली आदि को व्यापक पहचान दिलाने के लिए समेकित नीति बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, जब भी जनहित में कोई फैसला लेते हैं, तो सबसे पहले समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों को ध्यान में रखते हैं, इससे निर्णय लेने में आसानी होती है। लोगों का विश्वास ही हमारी प्रेरणा है, उनके इस विश्वास को हमें और अधिक मजबूत करना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक खजान दास, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, सचिव शैलेश बगोली, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी आदि उपस्थित रहे।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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