Uttarakhand Election: आखिर क्यों डर रहे हरीश रावत, जो दोस्तों को दी यह सलाह

Rajesh Pandey
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। फोटो- पूर्व सीएम हरीश रावत के सोशल मीडिया पोस्ट से ली गई है।
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली से लौटने के बाद चुनावी माहौल बना रहे हैं। दिल्ली से आते हुए उत्तराखंड में एंट्री करते ही माहौल बनाना शुरू कर दिया। वहीं उनके सोशल मीडिया पोस्ट भी खूब चर्चाएं बटोर रहे हैं।

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देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दिल्ली से लौटने के बाद चुनावी माहौल बना रहे हैं। दिल्ली से आते हुए उत्तराखंड में एंट्री करते ही माहौल बनाना शुरू कर दिया। वहीं उनके सोशल मीडिया पोस्ट भी खूब चर्चाएं बटोर रहे हैं।नेतृत्व शब्द को लेकर माफी मांगने के बाद हरीश रावत ने एक और पोस्ट किया है, वो लिखते हैं- क्रिसमस, बड़ा दिन, नया वर्ष, लोहड़ी, उत्तरायणी सारे त्योहारों की आप सबको बहुत-बहुत बधाई।हरीश रावत ने लिखा, कई मेरे दोस्त बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाकर मेरे नाम से बधाई देते हैं, उनसे मेरा आग्रह है कि ऐसे होर्डिंग्स में अपना नाम और चित्र न लगाएं या फिर होर्डिंग लगाएं नहीं, क्योंकि आपने होर्डिंग लगाई तो इनकम टैक्स और ई.डी. आपके दरवाजे पर दस्तक देने पहुंच जाएगी, #हरीश_रावत का नाम ही चौरिया है।इस पर एक यूजर्स ने कमेंट किया, आपकी बातों से लगता है। आपके पास भी खजांची दोस्तों की कमी नहीं है।
नेतृत्व शब्द को लेकर माफी मांगने के बाद हरीश रावत ने एक और पोस्ट किया है, वो लिखते हैं- क्रिसमस, बड़ा दिन, नया वर्ष, लोहड़ी, उत्तरायणी सारे त्योहारों की आप सबको बहुत-बहुत बधाई।
हरीश रावत ने लिखा, कई मेरे दोस्त बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाकर मेरे नाम से बधाई देते हैं, उनसे मेरा आग्रह है कि ऐसे होर्डिंग्स में अपना नाम और चित्र न लगाएं या फिर होर्डिंग लगाएं नहीं, क्योंकि आपने होर्डिंग लगाई तो इनकम टैक्स और ई.डी. आपके दरवाजे पर दस्तक देने पहुंच जाएगी, #हरीश_रावत का नाम ही चौरिया है।
इस पर एक यूजर्स ने कमेंट किया, आपकी बातों से लगता है। आपके पास भी खजांची दोस्तों की कमी नहीं है।
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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