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Uttarakhand Election: हरक सिंह को कांग्रेस ने अभी तक क्यों नहीं पूछा, वापस क्यों लेगी भाजपा?

सोशल मीडिया में हरक सिंह को लेकर अटकलों के साथ कुछ सवाल भी उठ रहे

क्या हरक सिंह भाजपा में वापस जा रहे हैं या फिर कांग्रेस में या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे, ये सवाल सोशल मीडिया में चल रहे हैं। हरक सिंह को लेकर जो अटकलें, पहले से लगती रही हैं, वो आज भी हैं। हरक सिंह ने कभी साफ शब्दों में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की। हालांकि इस बार उनके सामने जो परिस्थितियां हैं, उनको लेकर वो भी, कुछ स्पष्ट कहने की स्थिति में नहीं हैं।

मीडिया में हरक सिंह के हवाले से एक खबर है- आज तय करूंगा, किस मोर्चे से लडू़ंगा चुनाव। भाजपा और कांग्रेस के संदर्भ में, एक सवाल तो बनता है क्या अब भी हरक सिंह ही तय करेंगे, जबकि भाजपा उनको निष्कासित कर चुकी है और छठें दिन भी कांग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया।

सोशल मीडिया में उनको कांग्रेस में एंट्री नहीं मिलने की स्थिति में कहा जा रहा है कि वो पुनः भाजपा में शामिल हो सकते हैं, पर इस संबंध में भाजपा के किसी भी वरिष्ठ नेता की कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। सवाल यह उठता है कि कुछ दिन पहले ही हरक सिंह को कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में रहने और कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं को देखते हुए निष्कासित करने वाली भाजपा उनको वापस क्यों लेगी।

यदि मान भी लिया जाए कि भाजपा उनको वापस ले भी लेती है, तो कोई वजह तो होगी और यह वजह भाजपा को बतानी होगी। उनको भाजपा में लेने की बात, केदारनाथ, कोटद्वार और डोईवाला सीटों के प्रत्याशी घोषित नहीं होने के बाद उठी। जिन लोगों ने हरक सिंह के भाजपा में फिर से शामिल होने की अटकलों  को आगे बढ़ाया, क्या वो बताएंगे कि भाजपा उनको क्यों लेगी। यदि इन तीन सीटों में से किसी एक पर उनको टिकट देने के आसार बताए जाते हैं, तो सवाल उठता है क्या भाजपा के पास इन सीटों पर उम्मीदवार नहीं है। जहां भाजपा से टिकट पाने के दावेदारों की लंबी लाइन हो, वहां हरक सिंह की वापसी का इंतजार क्यों किया जाएगा। इसलिए फिलहाल हरक सिंह ही भाजपा में वापसी के कयास तो खारिज हो जाते हैं।

वहीं, छह दिन बाद भी कांग्रेस में हरक सिंह की एंट्री नहीं हो सकी। जबकि महीनों से उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से सौ-सौ बार माफी मांग सकता हूं, कांग्रेस में शामिल हुए बिना ही कांग्रेस के लिए काम करने, कांग्रेस की सरकार बनने की बात कहने के बाद भी कांग्रेस ने उनका हाथ नहीं थामा। भले ही प्रदेश कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता हरक सिंह को कांग्रेस में शामिल कराने के पक्ष में हो, पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की सहमति के बिना उनका स्वागत नहीं हो सकता। अभी तक तो उनके कांग्रेस में स्वागत के आसार नहीं दिखते।

भाजपा में वापसी और कांग्रेस में शामिल होने का कोई भी रास्ता, हरक सिंह की इच्छा पर निर्भर नहीं है। यहां भाजपा या फिर कांग्रेस को ही निर्णय लेना है। तीसरा सवाल यह कि क्या हरक सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे, यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। निर्दलीय चुनाव लड़ने से पहले हरक सिंह को काफी आकलन करना होगा।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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