
Tribal Pride Fortnight ICAR-IISWC Dehradun: समावेशी विकास और सांस्कृतिक विरासत की ओर एक कदम
Tribal Pride Fortnight ICAR-IISWC Dehradun: देहरादून, 15 नवंबर 2025: ICAR-IISWC, देहरादून ने अपने पांच अनुसंधान केंद्रों (कोरापुट, कोटा, उधगमंडलम, वासद और बेल्लारी) के साथ मिलकर ‘जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा’ के तहत कार्यक्रमों की एक व्यापक श्रृंखला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करने और समग्र जनजातीय विकास को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह पखवाड़ा 1 से 15 नवंबर 2025 तक मनाया गया। यह आयोजन ICAR-IISWC के निदेशक डॉ. एम. मधु के मार्गदर्शन और पादप विज्ञान प्रभाग के प्रमुख डॉ. जे.एम.एस. तोमर के समन्वय में आयोजित किया गया।
Tribal Pride Fortnight ICAR-IISWC Dehradun
पहल का उद्देश्य: सशक्तिकरण और आजीविका
इन पहल में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, उद्यमिता, संस्कृति, डिजिटल समावेशन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया।
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जागरूकता कार्यक्रम: स्कूलों और गाँवों में शिक्षा में सुधार, वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने, कौशल निर्माण और युवाओं को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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आजीविका एवं उद्यमिता: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की मजबूती, मूल्य संवर्धन और आदिवासी उत्पादों की ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। मशरूम की खेती, वर्मीकंपोस्टिंग, कृषि वानिकी और देशी हर्बल औषधियों के भंडारण पर प्रदर्शनों ने आय के नए अवसर प्रदान किए।
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स्वास्थ्य एवं कल्याण: पोषण, मातृ देखभाल, स्वच्छता, आयुष पद्धतियों, मलेरिया की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान चलाए गए।
सांस्कृतिक और तकनीकी समावेशन
Tribal Pride Fortnight ICAR-IISWC Dehradun: प्रदर्शनियों और संवाद सत्रों में जीआई-टैग प्राप्त आदिवासी कलाओं, हथकरघा, टोडा और कोटा शिल्प और स्थानीय परंपराओं को उजागर किया गया, जिससे सांस्कृतिक गौरव और उत्पादों के बाजार से संबंधों को बल मिला। तकनीकी सशक्तिकरण के लिए डिजिटल आदिवासी विरासत, आईसीटी उपकरण, मौसम और मृदा परीक्षण ऐप्स, डिजिटल साक्षरता और ई-गवर्नेंस पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
बुनियादी ढाँचा और संस्थागत सुदृढ़ीकरण
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बुनियादी ढाँचा: बेहतर सड़कों, जल संचयन संरचनाओं, सिंचाई, संचार और शैक्षणिक सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ऊटी में पंक्तिबद्ध झरने के जल संचयन तालाब जैसे हस्तक्षेपों ने कृषक समुदायों के लिए व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए।
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शासन: पंचायती राज, पारदर्शिता, बीज बैंक प्रशासन और समुदाय-आधारित विकास की भूमिका को बढ़ावा दिया गया।
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सरकारी योजनाओं की जागरूकता: किसानों को पीएम-किसान, एनआरएलएम, पीएम फसल बीमा योजना सहित कई केंद्र और राज्य की योजनाओं से अवगत कराया गया।
बाजार संपर्क और बीज संरक्षण
किसानों को कृषि-स्टार्टअप, बाजार संपर्क और सफल आदिवासी उद्यमियों (विशेषकर महिला उद्यमिता और डिजिटल मार्केटिंग पर) से परिचित कराया गया। आदिवासी किसानों की बाजार पहल ने उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए उपज की सीधी बिक्री, मूल्य संवर्धन और स्थानीय हाट विकास को प्रोत्साहित किया।
सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण ने जैव विविधता, स्वदेशी बीज संरक्षण और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया।
भागीदारी और समापन
सभी केंद्रों पर हजारों किसानों, छात्रों, एसएचजी सदस्यों, कारीगरों, महिलाओं और युवाओं ने रैलियों, प्रदर्शनियों, क्षेत्र प्रदर्शनों और सेमिनारों में सक्रिय भागीदारी की। ये कार्यक्रम उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक के विभिन्न आदिवासी गाँवों और क्षेत्रों में आयोजित किए गए।
जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 15 नवंबर, 2025 को भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि और सतत कृषि, सांस्कृतिक संरक्षण, सामुदायिक सशक्तिकरण और समावेशी आदिवासी विकास के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ।
इस आयोजन को सभी प्रभागों और केंद्र प्रमुखों के साथ-साथ वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक और अन्य कर्मचारियों का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ। इंजीनियर अमित चौहान और प्रवीण कुमार तोमर ने संस्थान के सोशल मीडिया अपडेट की रिपोर्टिंग और प्रबंधन में बहुमूल्य सहायता प्रदान की।













