
96 वर्षीय भगवान सिंह तोपवाल का निधन, पचास के दशक में गडूल के उपप्रधान रहे
गडूल क्षेत्र में शिक्षा और सहकारिता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया
डोईवाला। 26 फरवरी, 2025
गडूल ग्राम पंचायत के इठारना गांव निवासी भगवान सिंह तोपवाल का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1955 में गडूल ग्राम पंचायत के उप प्रधान निर्वाचित हुए भगवान सिंह तोपवाल ने इठारना क्षेत्र में शिक्षा और सहकारिता के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पुत्र जगमोहन सिंह तोपवाल ने बताया कि मंगलवार सुबह देहरादून में भगवान सिंह जी का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार श्रीपूर्णानंद घाट, मुनिकी रेती में किया गया।
करीब एक माह पहले ही भगवान सिंह तोपवाल जी से उनके घर पर मुलाकात हुई। जब भी इठारना गांव गया, वहां भगवान सिंह जी से जरूर मिला। 96 वर्ष की आयु में भी भगवान सिंह अपने गांव के विकास के लिए चिंतन करते थे। घर पर मिलने के लिए आने वाले हर व्यक्ति से बड़े उत्साह से मिलते थे।
गांधी टोपी लगाने वाले भगवान सिंह जी ने किसी भी व्यक्ति को अपने घर से चाय, नाश्ता कराए बिना जाने नहीं दिया। वो हमेशा कहते थे, खाना खाकर जाना। अपने अनुभवों, जीवन संघर्ष और क्षेत्र के विकास के लिए किए गए कार्यों के बारे में बताते और वर्तमान हालात पर भी चिंतन करते थे। उनका कहना था कि शिक्षा से ही विकास होता है। इसलिए उन्होंने सबसे पहला कार्य क्षेत्र में विद्यालय की स्थापना का कराया। सहकारिता के माध्यम से कृषि उपज एवं स्वरोजगार को विकसित करने पर जोर दिया। इसलिए इठारना गांव का नाम सुनते ही, सबसे पहले भगवान सिंह जी का जिक्र होता है।
भगवान सिंह जी से बातचीत का एक वीडियो-
वर्ष 1998 में ऋषिकेश में एक अखबार के लिए कार्य करने के दौरान आपसे मुलाकात हुई थी। आप इठारना से ऋषिकेश में प्रशासन तक गांव की बात पहुंचाने के लिए 30 से 35 किमी. तक का सफर करते थे, उस समय इठारना से भोगपुर तक आज जैसी सड़क सुविधा भी नहीं थी। मैंने उस दौरान 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग व्यक्ति को गांव के विकास के लिए बड़े उत्साह से कार्य करते हुए देखा था। अपने गांव के लिए आप का समर्पण और लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत बना है। यही वजह थी कि वर्षों बाद इठारना में आपसे मिलने गया।
भगवान सिंह जी 1955 में गडूल ग्राम पंचायत के उपप्रधान चुने गए थे। बाद में, गडूल साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष व गडूल के ग्राम प्रधान भी रहे। अंग्रेजों के जमाने के किस्से भी बताते थे। भगवान सिंह जी का जीवन बहुत संघर्ष में बीता, पर कभी हार नहीं मानी। कड़ी मेहनत और लगन को सफलता का मंत्र माना और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहे।
आज भगवान सिंह जी, हमारे बीच में नहीं हैं। अब इठारना में आपसे मुलाकात नहीं हो पाएगी। पर, आप बहुत याद आओगे भगवान सिंह जी। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति













