Traditional Hydration Science: देहरादून, 04 मई, 2026ः यह बात तो सौ फीसदी सही है कि पुराने समय से चली आ रही पंरपराओं का विज्ञान के नियमों से गहरा वास्ता रहा है। आज मैं एक स्टोरी पढ़ रहा था, जिसमें बताया गया था कि गर्मियों में दिनभर भागदौड़ करने वाले लोग अपने साथ पानी से भरी बोतल रखते हैं।
उनका मानना होता है कि पानी खूब पीने से शरीर में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। गर्मी में बहे पसीने से पानी की जो कमी शरीर को होती है, उसे पूरा किया जा सकता है। पर, क्या ज्यादा पानी पीने मात्र से ही शरीर स्वस्थ रह पाता है, शायद नहीं। क्योंकि सादा पानी पीने से शरीर की कोशिकाओं को महत्वपूर्ण मिनरल्स नहीं मिल पाते हैं। शरीर को पानी के साथ आवश्यक मिनरल्स भी चाहिए। ऐसी स्थिति में जो सादा पानी दिनभर पीया गया है, वो शरीर बिना किसी उपयोग के बाहर निकाल देता है।
Traditional Hydration Science: आइए, इस पूरी बात को समझने के लिए एक पुरानी परंपरा को जानते हैं, जिसे हम अपने घर परिवार में वर्षों से देखते आए हैं। तेज धूप में या बाहर से घर आए किसी व्यक्ति को पानी के साथ खाने के लिए गुड़ भी दिया जाता रहा है। पानी में नींबू, नमक या चीनी मिलाकर दिया जाता है। गर्मियों में घड़े का पानी दिया जाता है। मट्ठा भी पिलाया जाता है। पहले चावल का मांड नमक मिलाकर पीया जाता था। अब तो फास्ट होते जमाने में खाना भी फास्ट पकाया जाता है। कुकर में चावल दो सीटी यानी कुछ मिनट में पक जाते हैं, मांड देखने को नहीं मिलता।
एक और खास बात, मैंने अपनी दादी को गर्मियों में सफर के दौरान अपने साथ सत्तू की पोटली को संभालकर रखते हुए देखा है। सत्तू को पानी में मिलाकर खाने का आनंद ही कुछ और है। सत्तू एक ‘नेचुरल प्रोटीन और इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक’ है। इसे सात तरह के अनाज की वजह से सत्तू नाम मिला। इसको जौ, चना, गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार मिलाकर बनाया जाता है। पर, आजकर यह दो या तीन तरह के अनाज का भी मिलता है।
Traditional Hydration Science:सत्तू ऊर्जा को धीरे-धीरे रिलीज करता है, जिससे तेज धूप में भी लंबे समय तक ऊर्जावान महसूस किया जा सकता है। सत्तू की तासीर ठंडी होती है। यह शरीर के आंतरिक तापमान को बढ़ने से रोकता है, जिससे ‘हीट स्ट्रोक’ का खतरा कम हो जाता है। जब सत्तू के शरबत में काला नमक और भुना जीरा मिलाया जाता है, तो यह एक शक्तिशाली इलेक्ट्रोलाइट घोल बन जाता है। यह पोटैशियम और सोडियम की कमी को तुरंत पूरा करता है।
आज हम ओआरएस ( ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), को शरीर में पानी ( सिर्फ पानी ही नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स- नमक और खनिज) की कमी पूरी करने के लिए पीते हैं। जिस परंपरा का जिक्र अभी किया गया है, यह उसका ही आधुनिक रूप है। मतलब साफ है, पानी के साथ नमक और खनिज की कमी को पूरा करना है।
Traditional Hydration Science:गुड़ में सुक्रोज होता है जो शरीर को ऊर्जा देता है। इसमें भरपूर मात्रा में पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन होता है। इसके साथ मिलकर शरीर में गए पानी को कोशिकाएं अंदर खींच लेती हैं, इसे ‘ऑस्मोसिस’ कहते हैं। कोशिका के अंदर जाने के लिए पानी को सोडियम और ग्लूकोज की जरूरत होती है, जो गुड़ से मिल जाता है। जबकि सादा पानी शरीर में रक्त को पतला तो करता है, पर किडनी के जरिये शरीर से बाहर निकल जाता है। इसी तरह नींबू, मांड, घड़े का पानी, नमक, बाजार में मिलने वाले ओआरएस के घोल की भूमिका शरीर में पानी के साथ खनिजों की पूर्ति की है।
| पारंपरिक तरीका | वैज्ञानिक लाभ |
| पानी और गुड़ | पोटैशियम और सुक्रोज पानी को कोशिकाओं के अंदर खींचते हैं। |
| चावल का मांड | स्टार्च और नमक का मेल शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है। |
| घड़े का पानी | प्राकृतिक वाष्पीकरण से पानी का pH संतुलित और ठंडा रहता है। |
| मट्ठा/छाछ | प्रोबायोटिक्स के साथ-साथ प्राकृतिक सोडियम की पूर्ति। |
हमारी अन्य ‘वैज्ञानिक’ परंपराएं
- मट्ठा केवल प्यास नहीं बुझाता, बल्कि यह प्रोबायोटिक्स (मित्र बैक्टीरिया) का सबसे बड़ा स्रोत है। यह पेट के सुरक्षा कवच को मजबूत करता है और लू से बचाता है।
- घड़े की मिट्टी क्षारीय (Alkaline) होती है। यह पानी के अम्लीय (Acidic) गुणों को खत्म कर उसे शरीर के लिए अमृत समान बनाती है।
- चावल का मांड और नमक का घोल दुनिया का सबसे सस्ता और प्रभावी नेचुरल ओआरएस है। यह शरीर को डीहाइड्रेशन से तुरंत उबार लेता है।
* नोटः किसी भी जानकारी की पुष्टि के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लीजिए।




