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सेहत के लिए कुछ मीठा मतलब थोड़ा गुड़ हो जाए

Rajesh Pandey
Last updated: June 8, 2021 9:05 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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भोजन के बाद आमतौर हम कुछ मीठा खाना पंसद करते हैं। कुछ लोग मीठे के तौर पर गुड़ खाना अधिक पसंद करते हैं। दरअसल, गुड़ हमारी पाचन क्रिया को तेज और साथ ही साथ मजबूत भी करता है। गुड़ के ऐसे कई फायदे हैं, जिन्हें लोग आमतौर पर नहीं जानते।
गुड़ को पैनेला भी कहा जाता है, का उत्पादन विश्व के लगभग 25 देशों में बड़े पैमाने पर होता है। विश्व के कुल गुड़ उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की भागीदारी के साथ भारत शीर्ष पर है।
भारत हर वर्ष औसतन 60 से 80 लाख टन गुड़ उत्पादित करता है। देश में कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुड़ और खांडसारी उद्योगों में उपयोग होता है, जिससे करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

Contents
भोजन के बाद आमतौर हम कुछ मीठा खाना पंसद करते हैं। कुछ लोग मीठे के तौर पर गुड़ खाना अधिक पसंद करते हैं। दरअसल, गुड़ हमारी पाचन क्रिया को तेज और साथ ही साथ मजबूत भी करता है। गुड़ के ऐसे कई फायदे हैं, जिन्हें लोग आमतौर पर नहीं जानते।गुड़ को पैनेला भी कहा जाता है, का उत्पादन विश्व के लगभग 25 देशों में बड़े पैमाने पर होता है। विश्व के कुल गुड़ उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की भागीदारी के साथ भारत शीर्ष पर है।भारत हर वर्ष औसतन 60 से 80 लाख टन गुड़ उत्पादित करता है। देश में कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुड़ और खांडसारी उद्योगों में उपयोग होता है, जिससे करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।पूरे देश का 80 से 90 प्रतिशत गुड़ का उत्पादन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में होता है। देश में गुड़ को बनाने के लिए गन्ने के रस को बड़े-बड़े बर्तनों में उबालकर उसे ठंडा किया जाता है। लेकिन, देश के कई अन्य हिस्सों में इसे फलों के जूस जैसे अनार और पेड़ के रस जैसे ताड़ी से बनाया जाता है।गुड़ अपने आप में खनिज, प्रोटीन और विटामिन से समृद्ध एक पोषक आहार है। इसमें मौजूद पोषक तत्व इसे स्वस्थ आहार के लिए आवश्यक बनाते हैं।यह चीनी का एक बेहतर और स्वस्थ विकल्प भी माना जाता है। वैसे तो चीनी और गुड़ दोनों से ही हमें समान मात्रा में कैलोरी प्राप्त होती है। लेकिन, इसके साथ ही चीनी के मुकाबले गुड़ से हमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, पोटैशियम, फैट, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम भी प्राप्त होता है। इसके अलावा, आयरन, विटामिन-बी, कैल्शियम, कॉपर और जिंक भी हमें गुड़ से मिलता है।कोल्हापुर स्थित क्षेत्रीय गन्ना और गुड़ अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर विलास सालवे ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “गुड़ में 10 से 15 प्रतिशत ग्लूकोज, 60 से 85 प्रतिशत शर्करा, 0.25 प्रतिशत प्रोटीन, 0.40 कैल्शियम, 383 कैलोरी ऊर्जा के साथ-साथ कई अन्य पोषक तत्व होते हैं।जबकि, चीनी में हमे 99.5 प्रतिशत शर्करा और 398 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गुड़ का सेवन करती है। यह उनके आहार का अभिन्न हिस्सा है।” उन्होंने बताया कि चीनी की तुलना में गुड़ का सेवन अधिक गुणकारी है।आयुर्वेद में गुड़ का एक महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेद में इसे अत्यंत गुणवान, आयु को बढ़ाने वाला और शरीर को निरोग तथा यौवण को स्थिर रखने वाला कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार गुड़ क्षारीय, भारी और स्निग्ध होता है।गुड़ एक ऐसा आहार है, जिसको आहार में शामिल करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर किया जा सकता है। आमतौर पर ठंड के मौसम में गुड़ का सेवन अधिक किया जाता है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है, और यह हमारे शरीर को गर्म भी रखता है, जिससे शरीर के रक्त संचार में तेजी आती है। गुड़ खून को पतला भी करता है, जिससे उसमें थक्के बनने की सम्भावना कम हो जाती है।भोजन के बाद गुड़ का सेवन पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है। इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है, और अम्लता, सूजन एवं गैस जैसी समस्याओं दूर होती हैं।गुड़ के भीतर आयरन की संतुलित मात्रा होती है, जो गर्भवती महिलाओं, एनीमिया और कम हीमोग्लोबिन वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन आहार हो सकता है।गुड़ से काफी मात्रा में हमें सेलेनियम, जिंक और सूक्ष्म पोषक तत्व प्राप्त होते हैं, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।हल्दी के साथ गुड़ का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।प्रोफेसर विलास सालवे ने बताया कि गुड़ जितना पुराना होता है, वह उतना ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है, और उसमे उतने ही ज्यादा औषधीय गुण विद्यमान होते हैं।उन्होंने बताया कि गुड़ हमारे रक्त को शुद्ध करता है। यह बवासीर, गठिया और पित्त के विकारों को रोकने और कम करने में भी सक्षम है।यदि गुड़ का अदरक के साथ सेवन किया जाए, तो इससे कफ यानी बलगम जैसी समस्याओं को दूर किया जा सकता है।वहीं, अगर गुड़ का सेवन हरड़ के साथ किया जाए, तो यह पित्त का नाश करता है।गुड़ का सेवन सोंठ के साथ किया जाए, तो यह वात-दोष संबंधी बीमारियों को दूर करता है।गुड़ एक स्थानीय तौर पर सुलभ पोषक आहार है, जिसके फायदों के बारे बहुत कम लोग ही जानते हैं।आयुर्वेदिक और पारंपरिक औषधियों में गुड़ को विशेष स्थान दिया गया है। गुड़ के सेवन से हमारी छोटी-बड़ी हर तरह की समस्याओं का समाधान हो सकता है।अगर नियमित रूप से गुड़ का सेवन किया जाए, तो यह न केवल कई गंभीर बीमारियों से बचाव करने में मदद करता है, बल्कि शरीर को फिट रखने में भी सहायक होता है।साभार- इंडिया साइंस वायर
पूरे देश का 80 से 90 प्रतिशत गुड़ का उत्पादन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में होता है। देश में गुड़ को बनाने के लिए गन्ने के रस को बड़े-बड़े बर्तनों में उबालकर उसे ठंडा किया जाता है। लेकिन, देश के कई अन्य हिस्सों में इसे फलों के जूस जैसे अनार और पेड़ के रस जैसे ताड़ी से बनाया जाता है।
गुड़ अपने आप में खनिज, प्रोटीन और विटामिन से समृद्ध एक पोषक आहार है। इसमें मौजूद पोषक तत्व इसे स्वस्थ आहार के लिए आवश्यक बनाते हैं।

यह चीनी का एक बेहतर और स्वस्थ विकल्प भी माना जाता है। वैसे तो चीनी और गुड़ दोनों से ही हमें समान मात्रा में कैलोरी प्राप्त होती है। लेकिन, इसके साथ ही चीनी के मुकाबले गुड़ से हमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, पोटैशियम, फैट, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम भी प्राप्त होता है। इसके अलावा, आयरन, विटामिन-बी, कैल्शियम, कॉपर और जिंक भी हमें गुड़ से मिलता है।
कोल्हापुर स्थित क्षेत्रीय गन्ना और गुड़ अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर विलास सालवे ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “गुड़ में 10 से 15 प्रतिशत ग्लूकोज, 60 से 85 प्रतिशत शर्करा, 0.25 प्रतिशत प्रोटीन, 0.40 कैल्शियम, 383 कैलोरी ऊर्जा के साथ-साथ कई अन्य पोषक तत्व होते हैं।
जबकि, चीनी में हमे 99.5 प्रतिशत शर्करा और 398 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गुड़ का सेवन करती है। यह उनके आहार का अभिन्न हिस्सा है।” उन्होंने बताया कि चीनी की तुलना में गुड़ का सेवन अधिक गुणकारी है।
आयुर्वेद में गुड़ का एक महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेद में इसे अत्यंत गुणवान, आयु को बढ़ाने वाला और शरीर को निरोग तथा यौवण को स्थिर रखने वाला कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार गुड़ क्षारीय, भारी और स्निग्ध होता है।
गुड़ एक ऐसा आहार है, जिसको आहार में शामिल करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर किया जा सकता है। आमतौर पर ठंड के मौसम में गुड़ का सेवन अधिक किया जाता है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है, और यह हमारे शरीर को गर्म भी रखता है, जिससे शरीर के रक्त संचार में तेजी आती है। गुड़ खून को पतला भी करता है, जिससे उसमें थक्के बनने की सम्भावना कम हो जाती है।
भोजन के बाद गुड़ का सेवन पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है। इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है, और अम्लता, सूजन एवं गैस जैसी समस्याओं दूर होती हैं।

गुड़ के भीतर आयरन की संतुलित मात्रा होती है, जो गर्भवती महिलाओं, एनीमिया और कम हीमोग्लोबिन वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन आहार हो सकता है।
गुड़ से काफी मात्रा में हमें सेलेनियम, जिंक और सूक्ष्म पोषक तत्व प्राप्त होते हैं, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
हल्दी के साथ गुड़ का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
प्रोफेसर विलास सालवे ने बताया कि गुड़ जितना पुराना होता है, वह उतना ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है, और उसमे उतने ही ज्यादा औषधीय गुण विद्यमान होते हैं।
उन्होंने बताया कि गुड़ हमारे रक्त को शुद्ध करता है। यह बवासीर, गठिया और पित्त के विकारों को रोकने और कम करने में भी सक्षम है।
यदि गुड़ का अदरक के साथ सेवन किया जाए, तो इससे कफ यानी बलगम जैसी समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

वहीं, अगर गुड़ का सेवन हरड़ के साथ किया जाए, तो यह पित्त का नाश करता है।
गुड़ का सेवन सोंठ के साथ किया जाए, तो यह वात-दोष संबंधी बीमारियों को दूर करता है।

गुड़ एक स्थानीय तौर पर सुलभ पोषक आहार है, जिसके फायदों के बारे बहुत कम लोग ही जानते हैं।
आयुर्वेदिक और पारंपरिक औषधियों में गुड़ को विशेष स्थान दिया गया है। गुड़ के सेवन से हमारी छोटी-बड़ी हर तरह की समस्याओं का समाधान हो सकता है।
अगर नियमित रूप से गुड़ का सेवन किया जाए, तो यह न केवल कई गंभीर बीमारियों से बचाव करने में मदद करता है, बल्कि शरीर को फिट रखने में भी सहायक होता है।
साभार- इंडिया साइंस वायर

Key words: गुड़ के फायदे, गुड़ खाने के नुकसान, आयुर्वेद में गुड़, गुड़ का अदरक के साथ सेवन,  पारंपरिक औषधियों में गुड़ का  स्थान, गुड़ कैसे बनता है, गुड़ खाने से क्या होता है, गुड़ और चीनी में अंतर, गुड़ में पोषक तत्व, पुराना गुड़ कैसा होता है, भारत में गुड़ उद्योग, गुड़ का कोई और नाम, भारत में गुड़ का उत्पादन, Benefits of jaggery, disadvantages of eating jaggery, jaggery in Ayurveda, jaggery consumed with ginger, jaggery in traditional medicines, jaggery Production process, what happens by eating jaggery, difference in jaggery and sugar, nutrients in jaggery, What about the old jaggery, jaggery industry in India, jaggery’s another name, jaggery production in India

 

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TAGGED:Benefits of jaggerydifference in jaggery and sugardisadvantages of eating jaggeryjaggery consumed with gingerjaggery in Ayurvedajaggery in traditional medicinesjaggery industry in Indiajaggery production in Indiajaggery Production processjaggery's another namenutrients in jaggeryWhat about the old jaggerywhat happens by eating jaggeryआयुर्वेद में गुड़गुड़ और चीनी में अंतरगुड़ का अदरक के साथ सेवनगुड़ का कोई और नामगुड़ के फायदेगुड़ कैसे बनता हैगुड़ खाने के नुकसानगुड़ खाने से क्या होता हैगुड़ में पोषक तत्वपारंपरिक औषधियों में गुड़ का  स्थानपुराना गुड़ कैसा होता हैभारत में गुड़ उद्योगभारत में गुड़ का उत्पादन
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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