व्यंग्य भी बढ़ाता है आपकी क्रियेटिविटी को 

Rajesh Pandey

व्यंग्य के भी कुछ एेसे फायदे होते हैं, जिनकी कभी आपने अपेक्षा न की हो। शोध और अध्ययन बताते हैं कि अगर एक दूसरे को अच्छी तरह जानने वाले लोग आपस में बिना पूर्वाग्रह के हंसी मजाक में कटाक्ष करें तो कभी कभी यह स्थिति किसी को भी नया मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित कर सकती है। मनोवैज्ञानिकों के शोध अध्ययन बताते हैं कि व्यंग्य या ताना कसना रचनात्मकता को बढ़ाता है न कि यह सिर्फ एक मानसिक उत्पाद है।

यह बात इस प्रकार के प्रयोग से प्रमाणित हुई है। कुछ लोगों को तीन अलग-अलग स्थितियों में रखा गया। यह स्थितियां उदासीन, व्यंग्यपूर्ण और गंभीर वातावरण वाली थीं। इन लोगों की अलग-अलग वातावरण में आपस में वार्ता कराई गई। इस पूरे प्रयोग का रिजल्ट यह रहा कि जिन लोगों को व्यंग्यपूर्ण वातावरण में रखा गया था, उन्होंने गंभीरता पूर्वक काम करने वालों की बजाय ज्यादा क्रियेटिविटी के साथ बेहतर काम किया। इससे यह निष्कर्ष सामने आता है कि किसी भी इंसान में क्रियेटिविटी को प्रोत्साहित करने के लिए तंज कसना, आलोचना करना जरूरी हो सकता है, लेकिन ये लोग एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हों और व्यंग्य सौहार्द्रपूर्ण हों।

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शोध का प्रमुख निष्कर्ष यह भी रहा कि जो लोग जन्म से रचनात्मक हैं, उन पर व्यंग्य कसने से उनकी क्षमता और बेहतर हो गई। यहां यह बात स्पष्ट है कि जो लोग विश्वास के रिश्ते में बंधे हैं, उन लोगों में ही व्यंग्य या तंज कसने के वार्तालाप से बेहतर क्षमता वृद्धि हो सकती है। एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास करने वाले लोग व्यंग्यपूर्ण वातावरण में ज्यादा बेहतर काम कर सकते हैं। वहीं जहां लोग एक दूसरे को नहीं जानते हों या उनके बीच विश्वास और सौहार्द्र का रिश्ता न हो, वहां व्यंग्य करने से बचना चाहिए।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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